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KHANDWA ENCROACHMENT : खंडवा के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस और वन कर्मी पर जानलेवा हमला

 
KHANDWA ENCROACHMENT : मध्यप्रदेश/खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों के बढ़ते दुस्साहस ने प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलाईखेड़ा के जंगलों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा करने की नियत से पहुंचे करीब तीस से चालीस हमलावरों ने वन विभाग की टीम पर हिंसक हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब विभाग के कर्मचारी नियमित गश्त और सूचना के आधार पर जंगल की सुरक्षा के लिए मौके पर पहुंचे थे। अतिक्रमणकारियों का समूह सुनियोजित तरीके से वन भूमि को कृषि भूमि में बदलने की तैयारी कर रहा था और उनके पास जंगल की जमीन साफ करने के उपकरण भी मौजूद थे।

वन विभाग के अमले ने जैसे ही उन्हें रोकने की कोशिश की तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जंगल में अवैध खेत तैयार करने की जिद पर अड़े इन लोगों ने सरकारी ड्यूटी पर तैनात चौकीदार रामदास को अपना निशाना बनाया। हमलावरों ने न केवल उनके साथ गाली गलौज की बल्कि शारीरिक रूप से भी उन पर टूट पड़े। इस हिंसक झड़प में हमलावरों ने चौकीदार का गला दबाने और उन्हें नाखूनों से घायल करने जैसी क्रूर हरकतें कीं। इस दौरान वर्दी फाड़ दी गई और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों को भी जान से मारने की धमकी दी गई। यह हमला इतना अचानक और उग्र था कि शुरुआती क्षणों में कर्मचारियों को अपनी जान बचाना भारी पड़ गया।

अतिक्रमणकारियों की यह भीड़ पड़ोसी जिलों बड़वानी खरगोन और बुरहानपुर से संगठित होकर यहां पहुंची थी। जंगलों के बीच जमीन कब्जाने का यह सिलसिला नया नहीं है लेकिन जिस तरह से हमलावरों ने कानून को अपने हाथ में लिया उससे वन कर्मियों के बीच भारी आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद वन विभाग का अतिरिक्त अमला और पुलिस बल सक्रिय हुआ जिसके बाद हमलावर वहां से भाग खड़े हुए। इस संबंध में पिपलौद पुलिस थाने में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार आमाखुजरी क्षेत्र में लगभग पचास हेक्टेयर वन भूमि पर वर्तमान में अतिक्रमण का बड़ा संकट मंडरा रहा है। यहां बड़ी संख्या में लोग बुवाई की तैयारी कर रहे हैं जो पर्यावरण और वन संपदा के लिए एक अपूरणीय क्षति साबित हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इन बाहरी तत्वों पर नकेल नहीं कसी गई तो घने जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। फिलहाल घायल कर्मचारी का उपचार कराया जा रहा है और पुलिस प्रशासन के सहयोग से पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी हिंसक वारदात को टाला जा सके और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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