नई दिल्ली आईपीएल 2026 के कार्यक्रम से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट जगत में एक बड़ी खोज की चर्चा है। पूर्व स्पिनर और लंबे समय से कमेंट्री का जाना-पहचाना सामना कर रहे लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कमेंट्री में शिक्षकों के अपने जजमेंट को लेकर साफ कर दिया है कि इसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड या जय शाह की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक निजी मामला है और इसे बोर्ड से जोड़ा जाएगा।
“ये वन-ऑन-वन मामला है, बीसीसीआई को नहीं घसीटें”
शिवकृष्णरामन ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका विवाद किसी एक कर्मचारी के साथ व्यक्तिगत स्तर पर है। उन्होंने लिखा, “बीसीसीआई प्रशासन को मत लाओ। यह वन-ऑन-वन मामला है। जय शाह और उनकी टीम का इससे कोई लेना-देना नहीं है।” उनके इस बयान के बाद कई तरह की अटकलों को खारिज कर दिया गया, जो उनकी अचानक टिप्पणी रिलीज के फैसले को लेकर जा रही थी।
20 मार्च को कमेंट्री रिलीज का ऐलान किया गया था
सिद्धांत यह है कि लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 20 मार्च को आधिकारिक रूप से बास्केटबॉल के साथ अपनी टिप्पणी ली थी और इस फैसले को खत्म करने का निर्णय लिया था। लगभग दो दशकों से लेकर अब तक कमेंट्री पैनल का हिस्सा रहे शिवरामकृष्णन ने अपने अनुभव और विश्लेषण से क्रिकेट प्रेमियों के बीच खास पहचान बनाई थी। ऐसे में उनका अचानक हटना सभी के लिए चमकता हुआ दिखाई दे रहा है।
ऑन-एयरोस्ट्रक्चर से डायरेक्टोरेट करने का आरोप
अपने फैसले के पीछे तर्कपूर्ण टिप्पणी में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय तक एक साथ रहने के बावजूद अहम ने कई ऑन-एयर होस्टेस से दूर रखा है। विशेष रूप से टॉस प्रेजेंटेशन और मैच के बाद के शो में उन्हें शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ”अगर 23 साल में मुझे इन स्टूडियो के लिए नहीं चुना गया, तो इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?”
भेदभाव के संकेत भी दिये गये
शिवकृष्णन ने भेदभाव की ओर भी अपना बयान दिया। एक सोशल मीडिया गीतकार द्वारा दिए गए रंगभेद से संबंधित टिप्पणी पर सहमति प्रस्ताव में यह एक विशेष कारण बताया गया है। हालाँकि उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके इस संकेत ने विवाद खड़ा कर दिया है।
निजी निर्णय बताया, नियंत्रण पेशेवर की बात
लगातार तीखी चर्चाओं और आलोचनाओं के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह से निजी है। उनका कहना है कि वह अपनी प्रोफेशनल लाइफ पर खुद पर नियंत्रण रखना चाहती हैं और इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है।
शानदार करियर, अब नई राह की ओर
क्रिकेट इतिहास की बात करें तो लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 1985 से 1987 के बीच भारत के लिए 9 टेस्ट और 16 लोकप्रिय मैच खेले, जिसमें उन्होंने क्रमशः 26 और 15 विकेट हासिल किए। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने वॉव और सफल उद्यमियों पर टिप्पणी की।
कमेंट्री विवाद पर Laxman Sivaramakrishnan का बयान, BCCI और जय शाह को बताया निर्दोष
“ये वन-ऑन-वन मामला है, बीसीसीआई को नहीं घसीटें”
शिवकृष्णरामन ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका विवाद किसी एक कर्मचारी के साथ व्यक्तिगत स्तर पर है। उन्होंने लिखा, “बीसीसीआई प्रशासन को मत लाओ। यह वन-ऑन-वन मामला है। जय शाह और उनकी टीम का इससे कोई लेना-देना नहीं है।” उनके इस बयान के बाद कई तरह की अटकलों को खारिज कर दिया गया, जो उनकी अचानक टिप्पणी रिलीज के फैसले को लेकर जा रही थी।
20 मार्च को कमेंट्री रिलीज का ऐलान किया गया था
सिद्धांत यह है कि लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 20 मार्च को आधिकारिक रूप से बास्केटबॉल के साथ अपनी टिप्पणी ली थी और इस फैसले को खत्म करने का निर्णय लिया था। लगभग दो दशकों से लेकर अब तक कमेंट्री पैनल का हिस्सा रहे शिवरामकृष्णन ने अपने अनुभव और विश्लेषण से क्रिकेट प्रेमियों के बीच खास पहचान बनाई थी। ऐसे में उनका अचानक हटना सभी के लिए चमकता हुआ दिखाई दे रहा है।
ऑन-एयरोस्ट्रक्चर से डायरेक्टोरेट करने का आरोप
अपने फैसले के पीछे तर्कपूर्ण टिप्पणी में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय तक एक साथ रहने के बावजूद अहम ने कई ऑन-एयर होस्टेस से दूर रखा है। विशेष रूप से टॉस प्रेजेंटेशन और मैच के बाद के शो में उन्हें शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ”अगर 23 साल में मुझे इन स्टूडियो के लिए नहीं चुना गया, तो इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?”
भेदभाव के संकेत भी दिये गये
शिवकृष्णन ने भेदभाव की ओर भी अपना बयान दिया। एक सोशल मीडिया गीतकार द्वारा दिए गए रंगभेद से संबंधित टिप्पणी पर सहमति प्रस्ताव में यह एक विशेष कारण बताया गया है। हालाँकि उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके इस संकेत ने विवाद खड़ा कर दिया है।
निजी निर्णय बताया, नियंत्रण पेशेवर की बात
लगातार तीखी चर्चाओं और आलोचनाओं के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह से निजी है। उनका कहना है कि वह अपनी प्रोफेशनल लाइफ पर खुद पर नियंत्रण रखना चाहती हैं और इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है।
शानदार करियर, अब नई राह की ओर
क्रिकेट इतिहास की बात करें तो लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 1985 से 1987 के बीच भारत के लिए 9 टेस्ट और 16 लोकप्रिय मैच खेले, जिसमें उन्होंने क्रमशः 26 और 15 विकेट हासिल किए। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने वॉव और सफल उद्यमियों पर टिप्पणी की।
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