Mahakal Temple : उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली पर्व की शुरुआत रूप चतुर्दशी के दिन भक्तिभाव के साथ हुई। सोमवार तड़के भगवान महाकाल का विशेष राजसी श्रृंगार किया गया। पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान को गर्म जल से स्नान कराकर सुगंधित उबटन चढ़ाया। मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
सुबह की भस्म आरती में भगवान महाकाल को मां लक्ष्मी के स्वरूप में सजाया गया। उन्हें भांग, चंदन, केसर और आभूषण पहनाए गए। सोने-चांदी के गहनों और नए वस्त्रों से भगवान का राजसी श्रृंगार किया गया। इसके बाद अन्नकूट भोग अर्पित कर फुलझड़ी आरती के साथ दिवाली उत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर पुजारी परिवार की महिलाओं को विशेष रूप से श्रृंगार में भाग लेने का अवसर मिला। उन्होंने सुगंधित द्रव्यों से उबटन तैयार किया और कर्पूर आरती कर भगवान को समर्पित की।
पुजारी महेश के अनुसार, महाकाल को अन्नकूट भोग में धान, खाजा, शक्करपारे, मूली और बैंगन की सब्जी अर्पित की गई। यह परंपरा उज्जैन की विशेषता मानी जाती है। आमतौर पर अन्नकूट भोग गोवर्धन पूजा पर लगाया जाता है, लेकिन महाकाल मंदिर में यह दीपावली के अवसर पर ही संपन्न होता है।
उज्जैन में दिवाली पर्व के बाद अब कार्तिक मास की सवारियों की शुरुआत 27 अक्टूबर से होगी। भगवान महाकाल रजत पालकी में शिप्रा तट पर विराजमान होंगे। यह सवारी 17 नवंबर तक चलेगी, जबकि 3 नवंबर को हरिहर मिलन सवारी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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