इस नियुक्ति के पहले इस पद पर विजय कुमार अंबाड़े तैनात थे, जिनका कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हुआ और वे अब सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके सेवानिवृत्ति से पहले ही सरकार ने शुभरंजन सेन को पीसीसीएफ हॉफ बनाने का आदेश जारी कर दिया था। सेन मूल रूप से भुवनेश्वर, उड़ीसा के रहने वाले हैं और उन्होंने लंबे समय तक वाइल्डलाइफ विभाग में सेवाएं दी हैं।
इस नियुक्ति को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि शुभरंजन सेन ने विभागीय वरिष्ठता क्रम को पीछे छोड़ते हुए दो वरिष्ठ अफसरों को पीछे छोड़कर यह पद हासिल किया है। वन विभाग में परंपरा रही है कि पीसीसीएफ हॉफ की कमान ग्रेडेशन लिस्ट के अनुसार दी जाती है। पहले चर्चा थी कि इस पद के लिए अंबाड़े के ठीक नीचे मौजूद एचयू खान को चुना जाएगा, जिनकी सेवानिवृत्ति जुलाई 2026 में थी। उनके ठीक नीचे 1990 बैच के आईएफएस अधिकारी विभाष कुमार ठाकुर का नाम था। लेकिन इस बार शुभरंजन सेन ने दोनों को पीछे छोड़ते हुए पद प्राप्त किया।
वन विभाग में यह नियुक्ति वरिष्ठता के पारंपरिक क्रम को तोड़ने वाली मानी जा रही है। लंबे समय से आईएफएस लॉबी इतनी मजबूत थी कि पीसीसीएफ हॉफ की कमान किसी अधिकारी को सिर्फ एक दिन या एक महीने के लिए मिलती थी। उदाहरण के तौर पर कुछ समय पहले पीसीसीएफ एके जैन को महज एक दिन के लिए यह पद संभालना पड़ा और आदेश उसी दिन दोपहर में जारी हुआ और शाम को वे सेवानिवृत्त हो गए। इस बार शुभरंजन सेन ने सभी को पीछे छोड़कर पद हासिल कर विभाग में अपनी पकड़ और प्रशासनिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नियुक्ति से वन विभाग में रणनीतिक बदलाव की संभावना बढ़ सकती है। शुभरंजन सेन के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण, प्रशासनिक नीतियों और विभागीय सुधारों में नए आयाम देखने को मिल सकते हैं। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव विभाग के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित हो सकते हैं।