इस सम्मेलन की शुरुआत काशी के प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी जहां तीर्थस्थल प्रबंधन क्राउड कंट्रोल और आधुनिक अधोसंरचना के सफल मॉडल का अवलोकन किया जाएगा। इस अनुभव के आधार पर मध्यप्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास और सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी जिससे तीर्थ पर्यटन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सके।
सम्मेलन का प्रमुख फोकस ओडीओपी जीआई टैग उत्पादों पारंपरिक शिल्प कृषि और फूड उत्पादों को एकीकृत मंच प्रदान करना होगा। उत्तरप्रदेश की ओडीओपी पहल के अनुभवों से यह समझ विकसित की जाएगी कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में कैसे प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। दोनों राज्यों के उत्पादों को साझा ब्रांडिंग के तहत प्रस्तुत करने से निर्यात को बढ़ावा मिलने और मूल्य संवर्धन के नए अवसर खुलने की संभावना है।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे जिनके माध्यम से व्यापार औद्योगिक निवेश कौशल विकास और पर्यटन क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाएगा। यह समझौते केवल दस्तावेजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि जमीनी स्तर पर लागू कर उद्योगों उद्यमियों और शिल्पकारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सम्मेलन में उद्योग जगत निवेशकों नीति निर्माताओं और शिल्पकारों को एक साझा मंच मिलेगा जहां वे निवेश अवसरों लॉजिस्टिक्स अधोसंरचना और नीतिगत प्रोत्साहनों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। वस्त्र हस्तशिल्प एमएसएमई खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों की सहभागिता इस आयोजन को बहुआयामी बनाएगी और उद्योग सरकार समन्वय को नई मजबूती देगी।
इसके साथ ही आयोजित प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं ओडीओपी उत्पादों जीआई टैग हस्तशिल्प और प्रमुख पर्यटन स्थलों को एकीकृत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी निवेशकों के लिए राज्य की संभावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी।
शिल्पकारों के लिए गंगा नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर जैसी अभिनव पहल भी इस सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहेगी जिसमें चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार बनारसी कारीगरों के साथ मिलकर साझा ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर काम करेंगे। इससे पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिलने के साथ कारीगरों की आय और आजीविका में वृद्धि होगी।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काशी उज्जैन चित्रकूट सर्किट पर भी विशेष चर्चा होगी जिसमें पर्यटन को एक संयुक्त उत्पाद के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जाएगी। इस पहल से दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर यह सम्मेलन निवेश निर्यात रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह पहल मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच सहयोग को दीर्घकालिक और परिणामदायी दिशा देने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।