मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को भूमि विवाद और गड़बड़ियों के खिलाफ एक मजबूत डिजिटल हथियार बताते हुए कहा कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है। उनके अनुसार लंबे समय से दिल्ली में एक सुव्यवस्थित भू-प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जिसे अब मिशन मोड में लागू किया जा रहा है।
यह योजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग की पहल का हिस्सा है जिसे वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे लागू नहीं किया लेकिन अब दिल्ली सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू कर रही है। भू आधार के रूप में जानी जा रही इस प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है जिसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग का तकनीकी सहयोग मिलेगा।
सरकार के मुताबिक प्रणाली लागू होने के बाद भूमि स्वामित्व में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि डेटा का समन्वय भी आसान होगा। इससे धोखाधड़ी वाले लेन-देन एक ही जमीन के बहु-पंजीकरण और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी। आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें जमीन की पहचान और सत्यापन के लिए कई दस्तावेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे बल्कि एक ही यूनिक नंबर से पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इस योजना के तहत अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग से लगभग 2 टेराबाइट उच्च गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही ड्रोन के जरिए ली गई ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजेज़ की मदद से जमीन की सटीक मैपिंग की जा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली के ग्रामीण इलाकों समेत उन 48 गांवों के लिए सटीक तैयार किए जाएंगे जो पहले से स्वामित्व योजना में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि यह डिजिटल पहल राजधानी में भू-प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा देगी और भूमि विवादों के समाधान को अधिक सरल पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।