डीपफेक और एआई के दुरुपयोग का आरोप
गौतम गंभीर ने 19 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और आवाज का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर उनके नकली वीडियो बनाए जा रहे हैं। इन वीडियो में उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया जा रहा है, जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं।
फेक वीडियो से बढ़ी चिंता, लाखों में व्यूज
गंभीर की लीगल टीम के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके फर्जी कंटेंट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एक फर्जी वीडियो जिसमें उनके इस्तीफे की बात कही गई, उसे 29 लाख से ज्यादा बार देखा गया। वहीं एक अन्य क्लिप, जिसमें उन्हें सीनियर खिलाड़ियों पर टिप्पणी करते हुए दिखाया गया, उसे 17 लाख से अधिक व्यूज मिले। इस तरह के वीडियो उनकी छवि और गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
16 पक्षकारों के खिलाफ दायर मुकदमा
इस मामले में गंभीर ने 16 प्रतिवादियों के खिलाफ केस दायर किया है। इसमें कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ-साथ बड़े प्लेटफॉर्म्स भी शामिल हैं, जैसे Amazon, Flipkart, Meta Platforms, Google और YouTube। इसके अलावा आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी प्रोफार्मा पार्टी बनाया गया है, ताकि कोर्ट के आदेशों को लागू कराया जा सके।
2.5 करोड़ हर्जाना और कंटेंट हटाने की मांग
गंभीर ने अपनी याचिका में 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि सभी फर्जी अकाउंट्स और कंटेंट को तुरंत हटाया जाए और भविष्य में उनके नाम, चेहरा और आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल रोका जाए। उन्होंने मामले में जल्द कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि इस तरह के दुरुपयोग पर रोक लग सके।
कुल मिलाकर, यह मामला एआई और डीपफेक तकनीकों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जहां किसी भी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी जानकारी फैलाना आसान हो गया है। अब इस मामले में 23 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।