कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने पहले भी अपनी समस्याओं को लेकर बीएमओ को ज्ञापन दिया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस बार उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक उनका बकाया वेतन और पीएफ का भुगतान नहीं किया जाता, वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ठेकेदार उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के अनुसार उचित मासिक वेतन नहीं दे रहा है, जिससे उनका जीवन यापन मुश्किल हो गया है।
सिवनी मालवा के स्वास्थ्य केंद्र में आउटसोर्स कर्मचारियों का यह विरोध न केवल उनके व्यक्तिगत हित से जुड़ा है, बल्कि यह स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन तेज कर सकते हैं और केंद्र में काम पूरी तरह से बंद कर देंगे। यह मामला मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और आउटसोर्सिंग नीति की गंभीरता को भी उजागर करता है।