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एसोसिएट क्रिकेट के लिए आवाज! Paul van Meekeren ने दिया दिलचस्प आइडिया


नई दिल्ली। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की पिछली ऐतिहासिक डील के बाद अब क्रिकेट जगत में एक नई बहस छिड़ गई है। फ्रेंचाइजी के मालिकाना हक में बदलाव और करीब 16,660 करोड़ रुपये की बड़ी डील ने जहां खेल व्यवसाय को ठिकाने में ला दिया है, वहीं इस पर अब एसोसिएट क्रिकेट के विकास को लेकर भी आवाज उठ रही है। नीदरलैंड के तेज गेंदबाज पॉल वैन मीकेरेन ने इस डील के एक छोटे हिस्से को उभरती क्रिकेट टीमों के विकास में लगाने का सुझाव देकर चर्चा को नई दिशा दे दी है। उनकी राय है कि इतनी बड़ी रकम का मामूली हिस्सा भी छोटे क्रिकेट देशों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर रखी बड़ी बात, 0.5 प्रतिशत फंड की मांग

पॉल वैन मीकेरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर इस डील का केवल 0.5 प्रतिशत हिस्सा भी नीदरलैंड क्रिकेट बोर्ड को दिया जाए, तो इससे वहां के क्रिकेट माहौल में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने साफ किया कि एसोसिएट देशों के पास जमा की कमी होती है, जिससे वे बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर समझ पाते। ऐसे में इस तरह की आर्थिक मदद उन्हें बेहतर ट्रेनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारी का मौका दे सकती है।

एसोसिएट और बड़ी टीमों के बीच अंतर कम करने पर जोर

डच बॉलर का रुझान है कि इस तरह की पहल से एसोसिएट और फुल मेंबर देशों के बीच का अंतर काफी हद तक कम किया जा सकता है। हाल ही में ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप 2026 में नीदरलैंड की टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान और भारत जैसी मजबूत टीमों को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह दिखा दिया कि सही रिसोर्स मिलने पर ये टीमें बड़े स्तर पर चुनौती पेश कर सकती हैं।

अन्य खिलाड़ियों ने भी ती आवाज, ICC से उम्मीदें

इस मुद्दे पर पॉल वैन मीकेरेन अकेले नहीं हैं। ओमान के कप्तान जतिंदर सिंह और नीदरलैंड्स के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल से अपील की है कि एसोसिएट टीमों को बड़े टूर्नामेंट के अलावा भी रेगुलर रूप से टॉप टीमों के खिलाफ खेलने के मौके दिए जाएं। इससे न सिर्फ उनका अनुभव बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर क्रिकेट का विस्तार भी होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सुझाव पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं, लेकिन अगर यह पहल क्रिकेट को ज़्यादा समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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