बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव का मुख्य कारण बिजली कंपनियों को लगातार हो रहे वित्तीय घाटे और बढ़ते परिचालन खर्च हैं। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 6,044 करोड़ रुपये के घाटे को भरने के लिए दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। इस कदम से उपभोक्ताओं पर प्रत्यक्ष आर्थिक असर पड़ेगा और घरेलू बिजली खर्च बढ़ने की संभावना है।
वर्तमान और प्रस्तावित दरों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 50 यूनिट तक के उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान दर 4.45 रुपये प्रति यूनिट है, जिसे प्रस्तावित दर 4.78 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ाया गया है। 51 से 150 यूनिट वाले उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान दर 5.41 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि प्रस्तावित दर 5.82 रुपये तक पहुंच गई है।
151 से 300 यूनिट वाले उपभोक्ताओं के लिए दरें 6.79 रुपये से बढ़कर 7.3 रुपये प्रति यूनिट हो सकती हैं। खास बात यह है कि प्रस्ताव में 151-300 यूनिट वाले स्लैब को समाप्त कर इसे 300 यूनिट से ऊपर वाले स्लैब में विलय करने का भी सुझाव दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि 151-300 यूनिट इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की दरें और बढ़ जाएंगी। 300 यूनिट से ऊपर वाले उपभोक्ताओं की वर्तमान दर 8.98 रुपये प्रति यूनिट है, लेकिन प्रस्तावित दर 7.3 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से स्लैब बदलाव के कारण बिल में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दरों में यह बढ़ोतरी केवल उपभोक्ताओं के लिए ही चुनौतीपूर्ण नहीं होगी, बल्कि छोटे उद्योगों और व्यवसायों पर भी इसका असर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को अब अपने बिजली उपयोग पर अधिक ध्यान देना होगा और बचत के उपाय अपनाने पड़ सकते हैं।
पावर कंपनियों ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में परिचालन खर्च काफी बढ़ गए हैं। कर्मचारियों का वेतन, मेंटेनेंस और नई तकनीक में निवेश की लागत ने घाटे को और बढ़ा दिया है। यही कारण है कि यह दर बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि दर बढ़ोतरी स्वीकृत हो जाती है तो यह कदम कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करेगा।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने कहा है कि यह प्रस्ताव अब समीक्षा प्रक्रिया में है। जनता से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दरों में वृद्धि का उद्देश्य केवल घाटा पूरा करना है, किसी अन्य लाभ के लिए नहीं है।इस प्रस्ताव के लागू होने पर मध्यप्रदेश में बिजली के महंगे होने से घरों की खर्चीली स्थिति और बढ़ सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को ऊर्जा की खपत पर नजर रखनी और आवश्यकता से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल बचाने की रणनीति अपनानी जरूरी हो जाएगी।