जिले में गेंहू की फसल पकने के कारण कटाई के बाद खेतों में अवशेष बच जाते हैं। कई किसान इन्हें साफ-सफाई के लिए जलाते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और आग लगने का खतरा रहता है। कलेक्टर ने कहा कि अवशेष जलाना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि इससे पर्यावरण और स्थानीय समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पंचायत में समिति गठित की जाएगी जो खेतों में अवशेष जलाने की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अर्थदंड लगाया जाएगा। अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई को जलाने के बजाय खेतों में दहन रहित तरीकों का उपयोग करें, जैसे मल्चिंग, कंपोस्टिंग या मशीनों द्वारा कटाई और अवशेष निपटान।
कलेक्टर रितुराज सिंह ने कहा कि प्रशासन इस दिशा में सख्ती बरतेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। इसके तहत एसडीएम नियमित निगरानी करेंगे और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।यह कदम किसानों और प्रशासन को पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित कृषि प्रथाओं की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।