वायरल हो रहे वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक गंभीर रूप से घायल मरीज अस्पताल के फर्श पर पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है जबकि पास ही कई बेड खाली थे इस दृश्य ने न केवल परिजनों को परेशान किया बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं सूत्रों के मुताबिक अस्पताल स्टाफ की ओर से यह तर्क दिया गया कि मरीज को बेड इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उसे आगे रीवा रेफर किया जाना था और इस दौरान बेडशीट खराब होने की आशंका थी आरोप है कि खून लगने के डर से मरीज को बिस्तर पर न लिटाकर फर्श पर ही छोड़ दिया गया
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एक चादर की कीमत मानव जीवन और उसकी गरिमा से अधिक हो सकती है स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है बल्कि मऊगंज सिविल अस्पताल में लापरवाही और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैंकभी मरीजों के साथ दुर्व्यवहार तो कभी डॉक्टरों की अनुपस्थिति जैसी घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर जांच और कार्रवाई की बात कह रहा है लेकिन स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों में ऐसी संवेदनहीनता देखने को मिलेगी यह मामला न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार को लेकर अभी भी गंभीर सुधार की जरूरत है