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मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य अधोसंरचना विस्तार से स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार, मेडिकल हब बनने की ओर प्रगति


भोपाल । मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त करने के लिए समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ प्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार की ओर अग्रसर है।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश की मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के तहत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू और एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में वृद्धि हुई है।

जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है। सिकल सेल मिशन के तहत व्यापक स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार किए गए, जिससे पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है। आपात स्थिति में गंभीर रोगियों को पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा से उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, और अब तक 120 से अधिक नागरिकों को सेवा का लाभ मिला है। साथ ही निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब 33 मेडिकल कॉलेज हैं। पिछले दो वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी मेडिकल कॉलेज 12 से बढ़कर 14 हो गए हैं। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन शुरू हो गया है। आगामी दो वर्षों में 6 शासकीय और पीपीपी मॉडल पर 13 मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना है। सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हो गई हैं, जबकि कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी सीटें भी बढ़ाकर 2862 की गई हैं, साथ ही 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।

कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 773.07 करोड़ रुपये के अधोसंरचनात्मक कार्य शुरू किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ और सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल के लिए 383.22 करोड़ रुपये के कार्य प्रारंभ हुए हैं। 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन और एमआरआई, भोपाल और रीवा में कार्डियक कैथ लैब स्थापित की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ शुरू हुई हैं, जबकि इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए और विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है।

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