यह पूरा मामला कुटुंब न्यायालय में दर्ज हुआ। 42 वर्षीय पति का दिल अपने दफ्तर में साथ काम करने वाली 54 वर्षीय महिला अधिकारी पर आ गया। वह अपनी पत्नी से 10 साल बड़ी है। पत्नी और पति के बीच कई बार काउंसलिंग भी हुई लेकिन पति ने अपनी नई प्रेमिका के साथ रहने का फैसला कर लिया। पत्नी ने भी यह बात समझ ली कि पति वापस नहीं आएगा लेकिन अपने और अपनी बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा की शर्त रखी। पत्नी ने पति से कहा कि वह उसे छोड़ दे लेकिन इसके बदले 27 लाख रुपए कैश चाहिए।
यह सुनते ही प्रेमिका ने तुरंत सहमति दे दी। उसने यह भी नहीं चाहा कि प्रेमी का परिवार सड़क पर आ जाए और उनकी जिंदगी बर्बाद हो। प्रेमिका ने अपनी गाढ़ी कमाई से यह रकम चुकाने को तैयार हो गई। धीरे धीरे बातचीत आगे बढ़ी और दोनों पक्षों के बीच सौदा तय हो गया। कुल मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए मकान + कैश में मामला सुलझा लिया गया। दोनों पक्षों ने सहमति से अलग होने का फैसला किया और कुटुंब न्यायालय में यह मामला भी दर्ज हुआ।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह प्यार है या केवल पैसों का सौदा? क्या कानून की नजर में यह समझौता सही है? इस मामले में पत्नी ने अपने भविष्य और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जबकि प्रेमिका ने अपने प्रेमी को पाने के लिए आर्थिक दांव खेला। कुटुंब न्यायालय में इस तरह की पैसे से तलाक की डीलें दुर्लभ हैं लेकिन यह मामला एक बार फिर सामाजिक और नैतिक सीमाओं पर बहस को बढ़ा देगा।
किसी भी मामले में यह स्पष्ट है कि पति पत्नी के बीच रिश्तों का टूटना केवल परिवार को ही नहीं बल्कि समाज को भी प्रभावित करता है। वहीं इस घटना से यह भी संदेश जाता है कि आर्थिक स्थिति मजबूत होने पर लोग रिश्तों को अपनी मर्जी से बदलने से नहीं चूकते। अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और कुटुंब न्यायालय में यह केस कैसे निपटता है यह देखने वाली बात होगी।