धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। पंचवटी क्षेत्र को रामायण के अनुसार भगवान राम के वनवास का स्थान माना जाता है, जहां उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण के साथ समय बिताया। यही कारण है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मंदिर का निर्माण 1782 ईस्वी में हुआ था। यह 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर के चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार हैं और महाद्वार से प्रवेश करने पर भव्य सभामंडप दिखाई देता है, जिसकी ऊँचाई 12 फीट है। मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां हैं, जो भगवान राम के वनवास के 14 वर्षों का प्रतीक हैं। मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ खड़े हैं, जो 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में हनुमान जी की एक काली मूर्ति भी है, जो भगवान राम के चरणों की ओर देखती हुई नजर आती है।
श्री कालाराम मंदिर में धार्मिक उत्सवों का आयोजन विशेष धूमधाम से होता है। रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा यहां प्रमुख त्योहार हैं, जिनमें देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ये उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी बनाते हैं।
इस मंदिर की खासियत केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 1930 में डॉ. भीम राव अंबेडकर ने यहां दलितों के मंदिर प्रवेश आंदोलन का नेतृत्व किया था। उस समय दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में आंदोलन के बाद दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली, जिससे सामाजिक असमानता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश गया। यह आंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
श्री कालाराम मंदिर का महत्व धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक तीनों दृष्टियों से देखा जा सकता है। इसकी वास्तुकला, धार्मिक मान्यताएं, उत्सव और सामाजिक आंदोलन इसे नासिक की पहचान और भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बनाते हैं।