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सामूहिक विवाह से बढ़ा सामाजिक सद्भाव, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं


भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति का मूल सामाजिकता और सद्भाव है और इसे मजबूत करने में सामूहिक विवाह सम्मेलन एक प्रभावी माध्यम है। बेटियों के पाणिग्रहण संस्कार से बड़ा पुण्य और कोई काम नहीं हो सकता। पहले बेटी के जन्म के साथ ही परिवार को उसकी शादी की चिंता सताती थी लेकिन अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह निकाह योजना के माध्यम से सरकार जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का कन्यादान कर उनके घर को बसाने में मदद कर रही है।

शनिवार को शुजालपुर जिला शाजापुर में हुए सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार जन्म से लेकर पढ़ाई नौकरी मातृत्व और विवाह तक बेटियों के साथ हर कदम पर खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची से बचें और अपने बच्चों का विवाह सामूहिक विवाह समारोह में कर धन को उनके बेहतर जीवन के लिए बचाएं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पुत्र का विवाह भी सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराया है।

सम्मेलन में 200 बेटियों का सामूहिक विवाह निकाह संपन्न हुआ जिसमें 162 बेटियों का विधि-विधान से विवाह और 38 बेटियों का कबूलियत निकाह कराया गया। नवविवाहित जोड़ों को मंगलाशीष के रूप में सरकार की ओर से 49-49 हजार रुपये गृहस्थी के लिए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह जन्म-जन्मांतर तक साथ देने की अमरता की बेला का उत्सव है और भविष्य में यह और भी बड़ा होकर जरूरतमंद परिवारों के लिए मददगार बनेगा।

उच्च शिक्षा आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सामूहिक विवाह और मुख्यमंत्री कन्या विवाह निकाह योजना ने सामाजिक सुरक्षा और सद्भाव के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उनका जीवन प्रेम विश्वास सम्मान और संस्कारों से परिपूर्ण रहे।

सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया जनपद पंचायत शुजालपुर की अध्यक्षा सीताबाई रामचन्दर पाटोदिया उपाध्यक्ष मंजूबाई गोविन्दसिंह मेवाड़ा नगर पालिकाध्यक्ष बबीता परमार और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव परस्पर सहयोग और गरीब परिवारों के लिए मदद का प्रतीक है। इस पहल से मध्यप्रदेश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम और मजबूत उदाहरण स्थापित हुआ है।

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