सोनू सूद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि युद्ध के चलते कई यात्री दुबई में फंसे हुए हैं और उनके पास रहने की जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि मदद किसी भी शर्त या राष्ट्रीयता के बिना इंसानियत के नाते की जा रही है। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि यह सुविधा पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है।
इस समय दुबई में फंसे लोगों में पंजाब के कई नागरिक भी शामिल हैं। पंजाब सरकार के अनुसार, अब तक 150 से अधिक कॉल दुबई में फंसे लोगों की प्राप्त हो चुकी हैं। ज्यादातर लोग होटलों में ठहरे हुए हैं, लेकिन उनका संपर्क सीमित है। मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि नवंबर से मार्च तक दुबई में टूरिस्ट सीजन होता है, इसलिए कई लोग छुट्टियों के लिए गए थे और वर्तमान हालात में फंस गए।
सोनू सूद का यह कदम नया नहीं है। इससे पहले अगस्त 2025 में पंजाब में आई भयंकर बाढ़ के समय भी उन्होंने राहत और बचाव कार्य में सक्रिय योगदान दिया था। तब वह अपनी बहन मालविका सूद के साथ प्रभावित इलाकों जैसे मोगा, धर्मकोट, फाजिल्का, खमाणों और संगेरा में पहुंचे और पीड़ित परिवारों की मदद की।
बाढ़ के समय उनके द्वारा प्रदान की गई सहायता में खाद्य सामग्री, पीने का पानी, बेबी न्यूट्रिशन किट, कंबल, तिरपाल, हाइजीन किट, मच्छरदानी और पशुओं के लिए चारा शामिल था। साथ ही, उन्होंने मेडिकल कैंप भी लगाए और एक बच्चे का किडनी का इलाज करवाया। निचले इलाकों में राशन और बचाव के लिए दो नावें भी भेजी गई थीं, और प्रभावित परिवारों की आजीविका के लिए 100 भैंसें देने का वादा भी किया गया।
सोनू सूद के इस कदम ने दुबई में फंसे लोगों को राहत दी है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी कोशिश है कि किसी भी आम नागरिक को डर और असुरक्षा के माहौल में जीना न पड़े।
यह पहल दर्शाती है कि सोनू सूद ने हमेशा विपरीत परिस्थितियों में भी इंसानियत और सेवा के लिए आगे आकर मदद करने का संकल्प रखा है। दुबई में फंसे लोगों के लिए यह राहत एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।