अंकुरित अनाज कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा होती है, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती है। लेकिन यदि इसे सही तरीके से नहीं लिया जाए तो यह पाचन संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार अंकुरित अनाज पचने में थोड़ा भारी होता है और अधिक सेवन से वात दोष और गैस की समस्या बढ़ सकती है। इससे शरीर में रूखापन बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि स्प्राउट्स को हमेशा हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ और सीमित मात्रा में ही लिया जाए। ऐसा करने से यह शरीर को ताकत देने के साथ पाचन को भी संतुलित रखता है।
विशेष रूप से जिन लोगों का पाचन मंद है और कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें अंकुरित आहार से बचना चाहिए। पाचन मंद होने पर अंकुरित अनाज शरीर में ठीक से पच नहीं पाता और पोषण की जगह शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसी कारण बच्चे और बुजुर्गों को भी अंकुरित अनाज देने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन उम्र में पाचन सबसे कमजोर होता है।
इसके अलावा वात प्रवृत्ति वाले लोग भी इस आहार का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। आयुर्वेद में वात दोष को बढ़ाने वाले आहार से बचने की सलाह दी जाती है, और अंकुरित अनाज वात में वृद्धि कर सकता है। इसलिए इसे हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ, और उचित मात्रा में लेना ही फायदेमंद होता है।
अंकुरित अनाज का सेवन करते समय कुछ विशेष उपाय भी ध्यान में रखने चाहिए। सबसे पहले इसे कच्चा खाने से बचें। अंकुरित अनाज को हल्का उबालकर या घी/तेल में पकाकर ही खाना चाहिए। इसके अलावा अंकुरित अनाज को तुरंत ही सेवन करना चाहिए। ज्यादा लंबे समय तक अंकुरित रहने पर इसके पोषक तत्वों पर असर पड़ सकता है।
इस प्रकार, अंकुरित अनाज का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है, लेकिन केवल सही व्यक्ति और सही तरीके से ही। नियमित रूप से नियंत्रित मात्रा में और हल्का पकाकर सेवन करने से यह ऊर्जा, ताकत और पाचन दोनों में सुधार करता है। वहीं, गलत तरीके या अधिक मात्रा में लेने पर यह पाचन और वात दोष जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक दृष्टि से स्प्राउट्स को संतुलित, समय पर और विधिपूर्वक ही आहार में शामिल करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।