छात्रों का आरोप है कि शहर में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी है और इसका फायदा उठाकर कुछ लोग खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो सिलेंडर सामान्य रूप से करीब 900 रुपये में मिलता है उसे 3500 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस वजह से किराए के कमरों में रहने वाले और सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन हो गया है।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार सरिता मालवीय तथा शक्ति तोमर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की और तत्काल राहत के तौर पर दीनदयाल रसोई योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा लेकिन छात्रों ने इसे साफ तौर पर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि उन्हें मुफ्त भोजन नहीं बल्कि उचित कीमत पर गैस सिलेंडर चाहिए ताकि वे खुद अपना खाना बना सकें और सम्मानजनक तरीके से रह सकें।
प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि अधिकांश छात्र बाहरी जिलों से आकर यहां रह रहे हैं और उनके पास स्थानीय गैस एजेंसियों के कनेक्शन नहीं हैं। यही वजह है कि वे नियमित आपूर्ति से वंचित हैं और मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
करीब एक घंटे तक चले इस विरोध के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों के पास जिले के गैस कनेक्शन हैं वे अगले दिन अपनी बुक और डीएससी नंबर के साथ आएं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।इसी बीच स्थानीय कांग्रेस नेता Faizan ने आगे आकर छात्रों के भोजन की निजी व्यवस्था करने की बात कही जिसके बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ और छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया।
हालांकि छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है बल्कि शहर में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।