अप्रैल की शुरुआत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश में लगातार बदलाव देखने को मिला। गुरुवार को भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) सक्रिय रहा, जिससे पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में मौसम प्रभावित रहा। कहीं तेज आंधी चली, तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार से इन सिस्टम्स का असर समाप्त हो जाएगा। अगले पांच दिनों तक प्रदेश में कहीं भी बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा और तापमान लगातार बढ़ेगा। 15 अप्रैल के आसपास उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव मध्यप्रदेश में बहुत कम रहने की संभावना है।
गर्मी के लिहाज से अप्रैल और मई सबसे अहम महीने माने जाते हैं। विभाग के अनुसार, जैसे दिसंबर-जनवरी सर्दी के और जुलाई-अगस्त बारिश के चरम महीने होते हैं, वैसे ही अप्रैल-मई में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस साल मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।
आमतौर पर मार्च के अंतिम दिनों से तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से तापमान में गिरावट देखने को मिली। इसी कारण अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी प्रदेश में बारिश, ओले और आंधी का दौर जारी रहा। पिछले आठ दिनों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कहीं न कहीं बारिश दर्ज की जा रही थी।