पति ने पत्नी को गोली मारी, Facebook Live पर किया कबूलनामा, जानिए पूरा मामला

ग्वालियर : एक युवक ने अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। आरोपी ने 315 बोर के कट्टे से एक के बाद एक पांच गोलियां चलाईं। इनमें से चार गोलियां महिला को लगीं, जबकि एक सड़क पर जा धंसी। गोली लगने के बाद पत्नी तड़पती रही। इसी दौरान आरोपी पति हाथ में कट्टा लिए ‘अरविंद ठाकुर’ नाम की फेसबुक आईडी से लाइव आकर वारदात का कबूलनामा करता रहा। फेसबुक लाइव के दौरान आरोपी ने लगाए गंभीर आरोप वारदात के तुरंत बाद आरोपी ने फेसबुक पर लाइव आकर अपना पक्ष रखा। उसने पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में आरोपी कहता है, “भाइयों, इसने मुझ पर अपने बॉयफ्रेंड अंकुश पाठक और कल्लू के कहने पर झूठा केस दर्ज कराया है। यह महिला बेहद झूठी है। इसके कई लोगों से संबंध हैं। मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है।” टियर गैस फायरिंग के बाद आरोपी गिरफ्तार घटना के कुछ देर बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नियंत्रण पाया। आरोपी को काबू में करने के लिए टियर गैस का इस्तेमाल करना पड़ा, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उधर, घायल महिला को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। वहीं, उसके कथित बॉयफ्रेंड्स अंकुश और कल्लू भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में अंकुश ने बताया, “हम एसपी ऑफिस में अरविंद परिहार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर लौट रहे थे। तभी रास्ते में अरविंद ने हमला कर दिया। हम डरकर वहां से भाग गए। उसी दौरान उसने नंदिनी को गोली मार दी।” बॉयफ्रेंड का दावा घटना 13 सितंबर (शुक्रवार) दोपहर की है, जब नंदिनी अपने दो साथियों अंकुश पाठक और कल्लू पंचाल के साथ थी। इसी दौरान आरोपी अरविंद ने रास्ता रोककर नंदिनी पर 315 बोर का कट्टा तान दिया। हालात बिगड़ते देख अंकुश और कल्लू मौके से भाग गए। बाद में जब नंदिनी को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, तो दोनों युवक भी वहां पहुंच गए। अस्पताल में अंकुश ने बताया कि वे एसपी ऑफिस में अरविंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हमला हुआ। चौथे बॉयफ्रेंड की हत्या में जा चुकी है जेल आरोपी अरविंद द्वारा दिए गए आवेदनों के मुताबिक, नंदिनी केवट झांसी के चिरगांव की रहने वाली थी। अरविंद से उसका पांचवां प्रेम संबंध था। इससे पहले उसकी शादी लगभग 10 साल पहले दतिया के कैरोना धार गांव निवासी गोटीराम केवट से हुई थी। शादी के बाद उसके अपने पति के कुछ दोस्तों छोटू केवट, निमलेश सेन और फिरोज खान से भी संबंध रहे। साल 2017 में नंदिनी ने अपने चौथे प्रेमी के साथ मिलकर बॉयफ्रेंड निमलेश सेन की हत्या कर दी थी। यह वारदात दतिया में हुई थी। हत्या के आरोप में नंदिनी को 4 साल 6 महीने जेल की सजा भुगतनी पड़ी। वर्ष 2022 में रिहा होने के बाद वह ग्वालियर आ गई, जहां उसने एक ब्यूटी पार्लर खोल लिया था। थानों में दर्ज हुए कई मामले वर्ष 2022-23 में नंदिनी केवट की ठेकेदार अरविंद परिहार से जान पहचान हुई, जिसके बाद दोनों के बीच प्यार हुआ। उन्होंने लव मैरिज कर ली। शादी के बाद परिवारों से अलग होकर वे मुरार के ऑरेंजवुड इलाके में किराए के फ्लैट में 2 से 3 साल तक साथ रहे। अपराधी अरविंद ने पूछताछ में बताया कि बिना परिवार को बताए 2023 में मुरार के आर्य समाज मंदिर में नंदिनी से शादी की थी। हालांकि, बिना तलाक लिए ही दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में थे। कुछ ही समय बाद उनके बीच विवाद शुरू हो गए। इन विवादों के चलते नंदिनी ने सिरोल थाना और विश्वविद्यालय थाना में अरविंद के खिलाफ तीन मामले दर्ज कराए, जिनमें 17 नवंबर 2024 को सिरोल थाने में दर्ज एक केस भी शामिल है, जिसमें अरविंद पर कार से कुचलने का आरोप है। यह भी पढ़ें :https://chambalkichugli.com/big-action-in-love-jihad-case-crackdown-on-accused-of-rape-and-conversion-on-the-pretext-of-friendship/
क्यों प्रसिद्ध है ग्वालियर? जानिए इस ऐतिहासिक शहर की खास बातें

Why is Gwalior Famous: मध्य प्रदेश को उसकी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविधता के लिए जाना जाता है। इन सबमें ग्वालियर का नाम सबसे ऊपर आता है। चंबल के करीब बसे इस शहर ने इतिहास के पन्नों में अपनी खास पहचान बनाई है। चाहे वो वीरता की गाथाएं हों, स्थापत्य की मिसालें या फिर संगीत की मधुर धुनें…आइए जानते हैं इस शहर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें… संगीत की आत्मा ग्वालियर को यूं ही ‘City of Music’ नहीं कहा जाता। यूनेस्को ने 2023 में इसे आधिकारिक रूप से “संगीत का शहर” घोषित किया। यह वही धरती है जहां महान संगीतकार और अकबर के नवरत्नों में शामिल तानसेन का जन्म हुआ था। तानसेन की ध्रुपद शैली ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई ऊंचाई दी। आज भी उनके सम्मान में हर साल तानसेन संगीत समारोह का आयोजन होता है। देश का पहला भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) यहीं स्थापित हुआ था, जिसे आज अटल बिहारी वाजपेयी IIIT के नाम से जाना जाता है। 1997 में स्थापित यह संस्थान तकनीक और इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। जय विलास पैलेस के भव्य झूमरों की कहानी ग्वालियर के जय विलास पैलेस में ऐसी भव्यता देखने को मिलती है जो देश में कहीं और मुश्किल से मिलती है। इस महल की सबसे बड़ी खासियत हैं यहाँ लगे दो विशाल झूमर, जिनका वजन करीब 7 टन है। इन झूमरों को भारत के सबसे बड़े झूमरों में गिना जाता है । कहा जाता है कि इन झूमरों की मजबूती जांचने के लिए उनकी छत पर हाथियों को चलाया गया था। जब कोई मेहमान इस महल में कदम रखता है, तो इन झूमरों की भव्यता और चमक देख कर दंग रह जाता है। दुनिया का दूसरा सबसे पुराना ‘शून्य’ ग्वालियर किला गणितीय इतिहास की दृष्टि से भी बेहद खास है। इस किले की दीवारों पर स्थित चतुर्भुज मंदिर में दुनिया का दूसरा सबसे पुराना ज्ञात ‘शून्य’ (0) अंक उकेरा गया है। यह मंदिर 876 ईस्वी में प्रतिहार शासक बोज देव के शासनकाल में बनवाया गया था। ग्वालियर का प्रतिष्ठित सिंधिया स्कूल ग्वालियर की शिक्षा व्यवस्था भी पूरे देश में अलग पहचान रखती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है सिंधिया स्कूल, जो भारत के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित स्कूलों में गिना जाता है। इस स्कूल की औसत वार्षिक फीस करीब 12 लाख रुपये बताई जाती है, जो इसे एक एलिट बोर्डिंग स्कूल बनाती है। राजा माधवराव सिंधिया द्वारा 1897 में स्थापित यह स्कूल आज भी शाही परंपराओं और आधुनिक शिक्षा का अनोखा संगम पेश करता है। यहां देशभर से विद्यार्थी आते हैं। कई नामी-गिरामी हस्तियां इस स्कूल के पूर्व छात्र रह चुके हैं। ग्वालियर की धरती से निकला एक महान नेता ग्वालियर देश को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों की जन्मभूमि रहा है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को यहीं, ग्वालियर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।
ग्वालियर पुलिस के सामने घोड़े को लेकर छिड़ा विवाद, राजीनामे से सुलझा मामला

Police Solved The “horse” Dispute: ग्वालियर में रविवार को एक अनोखी घटना सामने आई। एक घोड़ा रहस्यमयी तरीके से बार-बार तीन किलोमीटर दूर महलगांव इलाके के एक ही घर पहुंच जाता था। घरवाले हर बार घोड़े को संभालते और पुलिस को भी सूचना देते, ताकि उन पर चोरी का शक न हो। ग्वालियर में घोड़े का मज़ेदार विवाद सुलझा रविवार को महलगांव के निवासी किन्नू अपने घर बार-बार आने वाले घोड़े को लेकर विश्वविद्यालय थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि एक साल में यह घोड़ा दूसरी बार उनके घर पहुँच गया है। किन्नू ने घोड़े को खिला-पिला कर अपने घर बाँध लिया था। मामले की पड़ताल में पता चला कि घोड़ा थाटीपुर निवासी कोमल का है। पुलिस ने कोमल को थाने बुलाया, जिन्होंने शुरू में किन्नू पर घोड़ा चोरी करने का आरोप लगाया। पुलिस के हस्तक्षेप से मामला समझौते और राजीनामे के साथ सुलझ गया। थाने में समझौते के दौरान घोड़े के मालिक कोमल ने स्वीकार किया कि घोड़े की देखभाल और खिलाने पर जितना खर्च हुआ है, उसकी भरपाई वे करेंगे। हालांकि, इस बात का कारण न तो कोमल बता पाए और न ही किन्नू कि आखिर घोड़ा बार-बार तीन किलोमीटर दूर उनके घर क्यों पहुंच जाता है। यह रहस्यमयी आदत सभी के लिए पहेली बनी हुई है। https://chambalkichugli.com/supreme-court-initiative-on-transgender-inclusive-sex-education-notices-to-six-states-including-ncert/ पुलिस ने कराया समझौता एएसआई सुरेन्द्र सिंह (विश्वविद्यालय थाना) ने बताया कि घोड़े को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हो गया है। समझौते के तहत घोड़े को खिलाने-पिलाने का खर्च मालिक को चुकाना होगा। साथ ही पुलिस ने घोड़े के मालिक को यह सलाह भी दी कि वह अपने घोड़े को बांधकर रखे, ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद दोबारा न हो।