शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया

नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अमेरिका को “पतनशील राष्ट्र” कहे जाने पर वह कुछ हद तक सहमत हैं। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि यह टिप्पणी मौजूदा अमेरिकी स्थिति पर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की नीतियों पर लागू होती है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बीजिंग यात्रा बेहद सफल रही और शी जिनपिंग ने कई मुद्दों पर उनकी सराहना भी की। ट्रंप के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका की स्थिति को लेकर जो टिप्पणी की, उसका इशारा बाइडेन प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति की ओर था। ट्रंप ने कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक कमजोरी, वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका की वैश्विक छवि कमजोर हुई और चीन जैसे देशों को बढ़त मिली। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वापसी के बाद अमेरिका फिर से मजबूत स्थिति में आ रहा है। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र किया। माना जा रहा है कि वह चीन-अमेरिका संबंधों पर हुई बंद कमरे की बातचीत या “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से जुड़े बयान की ओर इशारा कर रहे थे। अपनी मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका और चीन के रिश्तों का संतुलित रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचनात्मक टिप्पणी को सही ठहराने जैसा संकेत दिया है। वहीं रिपब्लिकन खेमे में इसे बाइडेन प्रशासन पर सीधा हमला माना जा रहा है।
मध्य-पूर्व में बड़ा खुलासा: UAE पर ईरान हमले का आरोप, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

नई दिल्ली। ईरान और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान पर गुप्त सैन्य कार्रवाई की थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में ईरान के लावान द्वीप स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई थी और उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हमला अप्रैल की शुरुआत में हुआ था, उसी समय जब अमेरिका युद्धविराम की घोषणा कर रहा था। ईरान ने उस दौरान दावा किया था कि उसकी रिफाइनरी पर दुश्मन देश ने हमला किया है। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में ईरान ने UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया था। हालांकि UAE ने कभी भी इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि देश को किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों पर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “बेईमान” बताया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत को लंबा खींचता है और बार-बार अपने रुख बदलता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन दस्तावेजों को कुछ मिनटों में पहुंचना चाहिए, उन्हें ईरान कई दिनों तक रोककर रखता है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया बाधित होती है। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कई विवादित मुद्दों में उलझी हुई है। इनमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, ईरानी जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम प्रमुख हैं। इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी असहमति बनी हुई है। हाल के 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका ने मांग की है कि ईरान कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद 60% एनरिच्ड यूरेनियम भी सौंप दे। इसके जवाब में तनाव और बढ़ गया है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधा और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्धविराम अब “बहुत कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को “कूड़ा” बताते हुए अमेरिका के लिए “पूर्ण जीत” की बात कही है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करते हैं तो उसे जवाब दिया जाएगा। इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच लेबनान सीमा पर भी तनाव तेज हो गया है। हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष में तेजी देखी गई है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक में 6 लोगों की मौत और 7 के घायल होने की खबर है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है, जिससे सीमा क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इसी बीच एक और रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर अस्थायी रूप से जगह दी थी, ताकि उन्हें संभावित हमलों से बचाया जा सके। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि नूर खान एयरबेस पर बड़े पैमाने पर विमानों को छिपाना संभव नहीं है। कुल मिलाकर ईरान, अमेरिका और मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर दिन नए तनाव और नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।