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ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, रूस और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर अमेरिका-चीन के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरे में ईरान से जुड़ा तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और चीन द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका की नजर चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी पड़ेगा। खासकर ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे इस बैठक को और जटिल बना रहे हैं। भारत के दृष्टिकोण से यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों ही उसकी रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा नीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी बदलाव का असर भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है। कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने रविवार को कहा कि अमेरिका (America) ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Reserves) पर सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी उस स्थान के पास पहुंचने की कोशिश करता है तो वाशिंगटन को तुरंत पता चल जाएगा और उसे उड़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की एक संस्था बनाई है और वे उस पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा, तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। शैरिल एटकिंसन के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की संस्था बनाई है और वे उस पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्पेस फोर्स इतना सक्षम है कि अगर कोई अंदर घुसा भी तो उसका नाम, पता और बैज नंबर तक बता सकता है। वहीं, ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से सैन्य रूप से पराजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, न विमानरोधी हथियार और न ही कोई नेता। ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार समझौते करता और तोड़ता रहा, लेकिन अब सैन्य दृष्टि से वह पूरी तरह कमजोर हो गया है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान को अकेला छोड़ दे तो उसे अपने ढांचे को दोबारा खड़ा करने में करीब 20 साल लग जाएंगे। ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम दो हफ्ते और अभियान जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह तो बस अंतिम काम होगा… लेकिन अगर हम वह भी नहीं करते तो भी उन्हें पुनर्निर्माण में 20 साल लग जाएंगे। इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं देंगे और इसे ‘पागलपन’ करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन द्वारा 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने उस समझौते को समाप्त नहीं किया होता तो ईरान अब तक इजराइल और पूरे मध्य पूर्व पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका होता।

रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक

वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) में फरवरी, 2022 से ही लड़ाई जारी है. दोनों देश अब सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यह युद्ध रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए यह ऐलान किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में 9 से 11 मई तक तीन दिन सीजफायर रहेगा.सीजफायर के दौरान सभी सैन्य गतिविधियों पर रोक रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे की क्रेमलिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelensky) ने पुष्टि कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर इस सीजफायर का ऐलान किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हूं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन (9, 10 और 11 मई) सीजफायर रहेगा। उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा है कि रूस में यह जश्न विजय दिवस के लिए है और यूक्रेन के लिए भी, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के समय वह भी इसका हिस्सा था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि दोनों देश एक-दूसरे के एक हजार कैदियों की अदला-बदली करने पर भी सहमत हो गए हैं। रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में तबाही की तस्वीरेंअमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सीजफायर का क्रेडिट लेते हुए कहा है कि यह अनुरोध सीधे मेरी ओर से किया गया था. उन्होंने अपना सीजफायर का अनुरोध स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की की तारीफ भी की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में यह उम्मीद भी जताई है कि यह सीजफायर लंबे, घातक और कठिन लड़ाई के अंत की शुरुआत साबित होगा. उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है और हम हर रोज समाधान के और करीब पहुंच रहे हैं. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे की पुष्टि कर दी है. आईएफक्स के मुताबिक क्रेमलिन ने कहा है कि रूस ने ट्रंप की ओर से प्रस्तावित सीजफायर पर सहमति जताई है. क्रेमलिन की ओर से यह भी कहा गया है कि रूस ने इस बात के लिए भी सहमति दे दी है कि युद्धबंदियों की अदला-बदली की जाएगी. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप के ऐलान की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस के साथ एक हजार कैदियों की अदला-बदली की जाएगी.

अमेरिकी अदालत से ट्रंप को फिर बड़ा झटका…. कोर्ट ने 10% टैरिफ को बताया अवैध

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत (American Trade Court) ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था। राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। क्या है धारा 122?यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था। इन क्षेत्रों पर असर नहींध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं। सरकार की दलील?ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था। आगे क्या होगा?अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।

बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई

वॉशिंगटन। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP)) की ऐतिहासिक जीत के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत की बधाई दी है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बातचीत में बताया कि हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसका नेतृत्व आप जैसे नेता के हाथों में है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस हालिया ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत के लिए बधाई दी है। बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलावभाजपा की इस जीत के साथ पहली बार पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। यह राज्य लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य में बनर्जी का करीब 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। इसे पीएम मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है। ‘यह नए युग की शुरुआत’जीत की घोषणा के बाद नई दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए नए युग की शुरुआत बताया था। उन्होंने कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकासशील और विश्वास से भरे बंगाल की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा “अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का प्रभावइस ऐतिहासिक जीत और ट्रंप की बधाई को भारत की बढ़ती वैश्विक साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभावशाली होगी।

US: ट्रंप ने फिर फोड़ा टैरिफ बम…. UN से आने वाले वाहनों पर लगाया 25% टैक्स

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर से टैरिफ बम (Tariff Bomb) फोड़ा है। इस बार उन्होंने कहा कि वह अगले हफ्ते से यूरोपीय यूनियन (European Union) से आने वाली कारों और ट्रकों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ा देंगे। वह इसे बढ़ाकर 25 फीसदी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गुट पहले हुए एक व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखा, “इस तथ्य के आधार पर कि यूरोपीय यूनियन हमारे पूरी तरह से सहमत व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है, अगले सप्ताह मैं अमेरिका में आने वाली कारों और ट्रकों पर यूरोपीय यूनियन से लिए जाने वाले टैरिफ को बढ़ा दूंगा। टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, ”हालांकि, यदि वे अमेरिका के प्लांट्स में कारों और ट्रकों का प्रोडक्शन करते हैं, तो कोई टैरिफ नहीं लगेगा। कई ऑटोमोबाइल और ट्रक प्लांट्स वर्तमान में निर्माणाधीन हैं, जिनमें 100 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया जा रहा है। जो कार और ट्रक निर्माण के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। ये प्लांट्स, जिनमें अमेरिकी कर्मचारी काम करेंगे, जल्द ही खुलने वाले हैं। आज अमेरिका में जो हो रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ! इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति को और आक्रामक रूप से लागू करते हुए भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाया है। इन टैरिफ का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ती विदेशी आयात से बचाना और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देना बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कई देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी तेज हो सकता है। भारत पर ट्रंप ने पहले 25 फीसदी का टैरिफ लगाया था, लेकिन फिर रूस से तेल खरीदने को लेकर इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया था। हालांकि, बाद में ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा, जिसकी वजह से 25 फीसदी टैरिफ हटा दिया गया।

ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार

बर्लिन। जर्मनी (Germany) ने अमेरिका (America) द्वारा अपने सैनिकों की संख्या घटाने की किसी भी संभावना के लिए खुद को पूरी तरह ‘तैयार’ बताया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल (German Foreign Minister Johann Wadephul) ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की धमकी के बावजूद नाटो और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि ट्रंप ने बुधवार को ईरान मुद्दे पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ विवाद के बीच जर्मनी में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों को कम करने का संकेत दिया था। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने मोरक्को की यात्रा के दौरान कहा कि हम इसके लिए तैयार हैं। हम नाटो के सभी निकायों में इस मुद्दे पर गहन और विश्वासपूर्ण चर्चा कर रहे हैं तथा अमेरिका से निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले पर सहयोगियों के साथ उचित परामर्श किया जाएगा। इससे पहले चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर जर्मनी का रुख एक मजबूत और एकीकृत नाटो तथा विश्वसनीय ट्रांसअटलांटिक साझेदारी पर केंद्रित है। मर्ज ने ट्रंप के बयान का सीधा जिक्र किए बिना कहा कि बर्लिन वाशिंगटन समेत अपने सभी सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है। जर्मनी का भरोसा: पुराना मुद्दा, कोई नई चिंता नहींविदेश मंत्री वाडेफुल ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने का विचार ईमानदारी से कहें तो बिल्कुल नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के समय भी यह मुद्दा उठ चुका है। वाडेफुल ने जर्मनी में बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किसी भी तरह की चर्चा से इनकार किया। उन्होंने रामस्टीन एयर बेस का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अमेरिका और जर्मनी दोनों के लिए अपूरणीय है। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस पूरे मामले पर पूरी तरह निश्चिंत है। ट्रंप का गुस्सा और सैनिकों की तैनाती पर सवालअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि ईरान संबंधी मुद्दे पर चांसलर मर्ज के साथ विवाद के चलते अमेरिका जर्मनी में तैनात हजारों सैनिकों में से कुछ को वापस बुलाने या फिर से तैनात करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने मर्ज पर आरोप लगाया था कि उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सही जानकारी नहीं है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए इस बात की पुष्टि की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि ईरान वाशिंगटन को अपमानित कर रहा है।

US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की लोकप्रियता (Popularity) में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप को लेकर जारी एक ताजा सर्वे में उनकी अप्रूवल रेटिंग (Approval rating) घटकर 34% पर पहुंच गई, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले सर्वे के 36% से भी कम है और जनवरी 2025 में पद संभालने के समय के मुकाबले काफी नीचे आ चुकी है। सर्वे के अनुसार, महंगाई और ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने जनता की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। इस संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल की कीमतों में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में इजाफे ने अमेरिकी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में केवल 22% लोगों ने ट्रंप के महंगाई से निपटने के तरीके को सही माना, जो यह दिखाता है कि आर्थिक मुद्दों पर सरकार के प्रति भरोसा कम हो रहा है। किस बात से नाराज है अमेरिका की जनताईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर भी अमेरिकी जनता में खासा विरोध देखा जा रहा है। सर्वे के अनुसार, केवल 34% लोग इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसके खिलाफ हैं। हालांकि, ट्रंप को रिपब्लिकन समर्थकों का मजबूत समर्थन अभी भी मिला हुआ है, जहां 78% लोग उनके साथ खड़े हैं। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर उनके अपने समर्थकों में भी असंतोष बढ़ रहा है। इस गिरती लोकप्रियता का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। सर्वे में यह संकेत मिला है कि स्वतंत्र मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स को बढ़त मिल रही है और कई मतदाताओं ने अभी भी कोई फैसला नहीं लिया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले की कोशिश का भी जनता की राय पर खास असर नहीं पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए आगामी मध्यावधि चुनावों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है तथा जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है। फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘द संडे ब्रीफिंग’ में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच हालात सामान्य करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बातचीत होती रही है, हालांकि आखिरी बातचीत कब हुई, इस पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। ‘नफरत से नहीं सुलझेगा विवाद’ ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए कहा कि आपसी नफरत किसी भी समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने इसे “हास्यास्पद और पागलपन” बताया तथा कहा कि शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे जरूरी रास्ता है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने का वादा ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान किया था। हालांकि उनके दूसरे कार्यकाल में भी संघर्ष जारी है। जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण इधर युद्ध क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन के निप्रो शहर पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले में एक मकान पूरी तरह नष्ट हो गया। वहीं रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक महिला की मौत और एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। यह घटनाएं हाल ही में युद्धबंदियों की अदला-बदली के बाद सामने आई हैं। रूस का दावा रूस के विशेष दूत रोदियोन मिरोशनिक ने दावा किया कि फरवरी 2022 से अब तक यूक्रेनी हमलों में 8 हजार से अधिक रूसी नागरिक मारे गए हैं और करीब 20 हजार घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

MIDDLE EAST WAR: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज

MIDDLE EAST WAR: वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के डिनर कार्यक्रम (Dinner program) में हुए हमले को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। हमलावर ने गोलीबारी करने के कुछ मिनट पहले अपने परिवार को एक संदेश भेजा था। इसमें उसने हमला करने की वजह को भी लिखा था। इस संदेश के मुताबिक काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन की पूरी टीम उसके निशाने पर थी। न्यूयॉर्क पोस्ट ने हमलावर एलन के द्वारा परिवार को भेजे गए इस मैसेज को प्रकाशित किया है। इस मैसेज में वह साफ तौर पर कहता हुआ नजर आता है कि काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी मेरे निशाने पर हैं। उसने लिखा, “मैं अब यह और स्वीकार करने को तैयार नहीं हूं कि एक पीडोफाइल, बलात्कारी और गद्दार मेरे हाथों को उसके अपराधों से रंगे।” कथित तौर पर इस मैसेज में एलन ने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया। लेकिन ट्रंप का नाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ लगातार जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में संभव है कि वह ट्रंप की ही बात कर रहा हो। न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा देखे गए इस मैसेज में कोल ने लिखा, “ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी, पटेल को छोड़कर मेरे निशाने पर हैं। और उन्हें इसमें उनके पद के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उसने यह भी लिखा कि संयुक्त राज्य सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स को केवल जरूरत पड़ने पर ही निशाना बनाया जाएगा। अगर वह नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करते हैं, तो उन्होंने गैर घातक तरीके से रास्ते से हटाया जाएगा। US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज होटल की सुरक्षा पर भी बात हमले के ठीक पहले परिवार को भेजे गए इस मैसेज में एलन ने होटल में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बारे में भी लिखा। उसने लिखा कि यहां कि सुरक्षा व्यवस्था केवल प्रदर्शनकारियों को रोकने तक ही सीमित थी। उसने लिखा, “मैं कई हथियारों के साथ अंदर चला जाता हूँ और वहाँ कोई भी यह नहीं सोचता कि मैं खतरा हो सकता हूं।” एलन ने अंत में संभावित तौर पर ट्रंप को निशाना बनाते हुए लिखा, “इस स्तर पर ऐसी अक्षमता पागलपन हैं। मैं ईमानदारी के साथ उम्मीद करता हूं कि जब इस देश को वास्तव में सक्षम नेतृत्व मिलेगा, तब तक इसे सुधार लिया जाएगा।” इससे पहले, रविवार को एक वाइट हाउस की तरफ से होटल में आयोजित इस डिनर में लगभग अमेरिकी प्रशासन के सभी बड़े लोग मौजूद थे। उसी वक्त वहां पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। हमला होने का संकेत मिलते हैं वहां पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सभी राजनेताओं और उनके साथियों को वहां से बाहर निकाल दिया। हमलावर कोल एलन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि हमलावर में ईसाइयों को लेकर नफरत भरी हुई है। बता दें, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई हो। 2024 में चुनावी रैली के दौरान भी ट्रंप के ऊपर हमला हुआ था। इस हमले में गोली ट्रंप के कान को घायल करती हुई निकल गई थी। इसके कुछ समय बाद ट्रंप के घर के बाहर भी हमला हुआ था। और अब यह तीसरी बार उनके ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई है।