TRUMP’S NEW TARRIF : ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच फोड़ा टैरिफ बम… दवाओं पर 100, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50 शुल्क का ऐलान

TRUMP’S NEW TARRIF : वॉशिंगटन। ईरान युद्ध (Iran War) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गुरुवार को अपनी “अमेरिका फर्स्ट” वाली आर्थिक नीति को और अधिक कड़ा करते हुए स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और विदेशी दवाओं पर नए आयात शुल्क नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का उद्देश्य न केवल आयात प्रक्रिया को सरल बनाना है, बल्कि विदेशी दवा कंपनियों और धातु निर्यातकों पर दबाव डालना है ताकि वे अपनी निर्माण यूनिट अमेरिका में स्थापित करें। ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर 50% का आयात शुल्क बरकरार रखा है। हालांकि, अब इसे गणना करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह शुल्क आयातित वस्तु के उस मूल्य पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक भुगतान करते हैं, न कि केवल धातु की मात्रा पर। एमपी में बिगड़ा मौसम का मिजाज, 42 जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, 6 अप्रैल तक रहेगा असर ट्रंप ने क्यों लगाए नए टैरिफ? इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ को रोकना है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक शुल्क कम करने के लिए कृत्रिम रूप से आयात मूल्य को कम दिखाते थे। नया नियम इस विसंगति को दूर करेगा। यदि किसी उत्पाद में धातु का वजन 15% से कम है, तो उस पर से 50% का पिछला शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। 15% से अधिक धातु सामग्री वाले भारी मशीनों, वाशिंग मशीन या गैस स्टोव जैसे उत्पादों पर अब धातु की मात्रा के बजाय पूरे उत्पाद के मूल्य पर 25% फ्लैट शुल्क लगेगा। विदेश में बने लेकिन पूरी तरह से अमेरिकी स्टील या तांबे से निर्मित उत्पादों पर रियायती दर से केवल 10% शुल्क लगेगा। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है, ताकि अमेरिका में बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई जा सके। विदेशी दवाओं पर 100% तक शुल्क ट्रंप ने दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से एक बड़ा दांव खेला है। कुछ खास आयातित दवाओं पर अब 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह नया नियम उन पेटेंट दवाओं पर लागू होगा जो उन देशों में बनती हैं जिनका अमेरिका के साथ कोई टैरिफ समझौता नहीं है। बड़ी दवा कंपनियों के लिए ये नियम 120 दिनों में लागू होंगे, जबकि छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की मोहलत दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर उन कंपनियों को टारगेट करता है जिन्होंने अमेरिका के साथ ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ मूल्य निर्धारण समझौता नहीं किया है। 37,740 Indian workers death : पांच साल में विदेशी धरती पर 37,740 भारतीय मजदूरों की मौत… सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में राजस्व में होगा इजाफा वाइट हाउस का मानना है कि पहले का टैरिफ ढांचा अत्यंत जटिल था, जिससे आयातकों को हर पुर्जे में धातु की मात्रा निर्धारित करने में सिरदर्द होता था। प्रशासन के अधिकारी ने कहा, “अब यह आसान, सरल और सीधा है। कई उत्पादों के लिए दरें कम होंगी, कुछ के लिए थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन कुल मिलाकर यह उद्योग के लिए अनुकूल है।” प्रशासन को उम्मीद है कि इस नए ढांचे से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी क्योंकि अब शुल्क पूरे बिक्री मूल्य पर वसूला जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहा है। रक्षा सचिव द्वारा हाल ही में किए गए सैन्य फेरबदल और अब इन कड़े व्यापारिक नियमों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर एक आक्रामक और आत्मनिर्भर अमेरिका की छवि पेश करना चाहता है।
US President Donald Trump : ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?

US President Donald Trump : वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी (Attorney General Pam Bondi) की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है। टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’ विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी। पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं। ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’
ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) नाटो (NATO) समूह के अन्य साथी देशों पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। ईरान युद्ध (Iran War) के बीच नाटो देशों ने अमेरिका को एक के बाद एक झटके दिए हैं जिससे ट्रंप खिसियाए हुए हैं और यह धमकी भी दी है कि अमेरिका खुद को नाटो से अलग कर लेगा। इस बीच अब खबर है कि इन सब का खामियाजा एक छोटे से देश को भुगतना पड़ सकता है। यह देश है यूक्रेन। बीते 4 सालों से खुद रूस के साथ जंग लड़ रहा यूक्रेन अब ईरान युद्ध में बलि का बकरा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन के लिए हथियारों की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की इस धमकी का मकसद पश्चिमी देशों पर दबाव डालना है ताकि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के अमेरिका की मदद करें। विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच नाटो सहयोगियों के लिए ट्रंप का यह बयान बेहद चिंता का विषय है। कई देशों ने दिया झटकाट्रंप की यह धमकी नाटो देशों से मिले झटके के बाद आई है। फ्रांस, स्पेन, इटली समेत कई देशों ने ट्रंप को करारा झटका देते हुए ट्रंप को अपने बेस इस्तेमाल करने देने से इनकार कर दिया है। वहीं कई पश्चिमी देशों ने ट्रंप के उस प्लान का हिस्सा बनने से भी इनकार दिया, जिसके तहत ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए एक गठबंधन बनाने का ऐलान किया था। यूरोपीय देशों ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह उनकी लड़ाई नहीं है। बता दें कि ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बाद अब ट्रंप इस रास्ते को खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। नाटो को बताया ‘कागजी शेर’इसके बाद से ट्रंप नाटो देशों पर लगातार हमलवार हैं। ट्रंप ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वह उस नाटो सदस्यता को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने नाटो से संभावित अलगाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हां, यह अब इस पर विचार किया जा रहा है। कभी भी नाटो से प्रभावित नहीं रहा। मुझे हमेशा पता था कि यह एक ‘पेपर टाइगर’ है, और (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन भी यह जानते हैं।” लंबे समय से की है आलोचनागौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं और इसे अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर बताते हुए कई बार इससे बाहर निकलने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत नाटो से बाहर निकलने या सदस्यता निलंबित करने के लिए वाइट हाउस को सीनेट की “सलाह और सहमति” प्राप्त करनी होती है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।
ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America-Iran War) के बीच जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President J.D. Vance) ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं है और जल्द ही अपने अभियान को समाप्त कर वहां से निकलना चाहता है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में अपना काम पूरा करना है, न कि एक या दो साल तक वहां मौजूद रहना। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम एक साल या दो साल आगे की योजना नहीं बना रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं और जल्द ही वहां से बाहर आ जाएंगे।” उनके इस बयान को अमेरिकी रणनीति में सीमित और त्वरित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन कुछ समय तक अपना अभियान जारी रखेगा, ताकि भविष्य में फिर से ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से बचना है। इस बीच, उन्होंने यह भी दावा किया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे ईंधन की कीमतों में भी गिरावट आएगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह समयसीमा अब 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत काफी अच्छी चल रही है। दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध संचालन के लिए न होने दें। इसे उन देशों के लिए संदेश माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। पेजेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह के पूर्व-आक्रमण में विश्वास नहीं करता, लेकिन अगर उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों पर हमला हुआ तो कड़ा जवाब देगा। गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। यह टकराव 28 फरवरी को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी।
ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू की चेतावनी, बोले- हमले जारी रहेंगे; दो वैज्ञानिक मारने का दावा

तेल अवीव। । इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के बाद कहा कि इजरायल अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान और लेबनान में हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक इजरायल के सुरक्षा हित पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए नेतन्याहू ने लिखा: आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात की। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी सेना के साथ मिलकर हमने जो शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं, उनका लाभ उठाकर एक समझौते के माध्यम से युद्ध के लक्ष्यों को पूरा करने का अवसर है। इसी बीच, हम ईरान और लेबनान दोनों जगह हमले जारी रखे हुए हैं। हम उनके मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट कर रहे हैं और हिजबुल्लाह को लगातार करारे झटके दे रहे हैं। कुछ ही दिन पहले, हमने दो और परमाणु वैज्ञानिकों को ढेर किया है और हमारे अभियान अभी भी सक्रिय हैं। हम हर परिस्थिति में अपने महत्वपूर्ण हितों की रक्षा करेंगे। ट्रंप का बड़ा फैसला: ईरान पर सैन्य हमले 5 दिन के लिए टले एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने ‘युद्ध विभाग’ को ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर होने वाले सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह स्थगन वर्तमान में चल रही चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में शत्रुता को पूरी तरह से समाप्त करने के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष में 2,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरा पैदा हो गया है। ईरान ने कहा था कि वह पूरे पश्चिम एशिया में बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। वहीं ट्रंप ने कहा था कि महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोले जाने पर अमेरिका, ईरान में ऊर्जा संयंत्रों पर हमले करेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बहरीन का नया मसौदा प्रस्ताव अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन द्वारा पेश किए गए एक नए मसौदा प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। यह प्रस्ताव सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए “सभी आवश्यक कदम” उठाने का अधिकार देने की वकालत करता है। मसौदे में मांग की गई है कि ईरान तुरंत वाणिज्यिक जहाजों पर अपने सभी हमले बंद करे और जलडमरूमध्य के आसपास कानूनी मार्ग या नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालने के किसी भी प्रयास को रोके। सैन्य कार्रवाई की अनुमति प्रस्ताव के तहत सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन को बाधित करने के प्रयासों को विफल करने और रोकने के लिए सीमावर्ती देशों के ‘क्षेत्रीय जल’ के भीतर भी कार्रवाई करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। जो कोई भी नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, उसके खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई है।
समलैंगिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा? सुनकर हंस पड़े ट्रंप

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक नए विवाद ने चर्चा छेड़ दी है। एक रिपोर्ट में मोजतबा खामेनेई की निजी जिंदगी को लेकर सनसनीखेज दावे किए गए हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। New York Post की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक खुफिया ब्रीफिंग में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस इनपुट पर ट्रंप ने हैरानी जताई, लेकिन इस पर उनकी कथित प्रतिक्रिया को लेकर भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ज़्यादा जानें Indore समाचार पत्र इंदौर यह भी पढ़ें | ईरान के साथ चल रहे युद्ध की वजह से ट्रंप ने टाला चीन का प्रस्तावित दौरा… खुफिया दावों पर भरोसे को लेकर सवालरिपोर्ट में कुछ अनाम सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों तक पहुंची और इसे “कुछ हद तक विश्वसनीय” माना गया। हालांकि, किसी भी एजेंसी या सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि खुफिया इनपुट अक्सर अपुष्ट या प्रारंभिक स्तर के होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर सत्य मान लेना उचित नहीं होता। कोई ठोस प्रमाण सामने नहींरिपोर्ट में किए गए दावों-जैसे व्यक्तिगत संबंध या विदेश में इलाज-के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं कराई गई है। ईरान के कानून और संवेदनशीलताईरान में समलैंगिकता कानूनन अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे में इस तरह के आरोप न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। मौजूदा हालात में यह मामला अधिकतर अपुष्ट रिपोर्ट्स और अनाम सूत्रों पर आधारित नजर आता है। ऐसे में इसे तथ्य की तरह नहीं, बल्कि एक विवादित दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।
व्हाइट हाउस के बाहर ईरान विरोधी रैली, अमेरिकी कार्रवाई पर इरानियों ने जताया उत्साह

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की हालिया कार्रवाई को लेकर कई लोग खुलेआम समर्थन जता रहे हैं। इस समर्थन और ईरानी खामेनेई शासन का विरोध करने के लिए प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर एक बड़ी रैली में जुटे। रैली में शामिल अधिकांश लोग कभी ईरान में रहते थे और उन्होंने अमेरिकी मीडिया को बताया कि वे ट्रंप के हमलों को 1979 से देश पर राज कर रहे इस्लामिक शासन को गिराने का अवसर मानते हैं। प्रदर्शनकारी साइरस कियान ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली 25 साल की जिंदगी ईरान में बिताई। उन्होंने जोर देकर कहा अगर ट्रंप आसमान से दबाव डालना जारी रखते हैं तो ईरानी लोग इस राज को खत्म कर देंगे। रैली में शामिल लोगों ने अमेरिकी कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाल रंग की हैट पहनी थी जिस पर मेक ईरान ग्रेट अगेन लिखा था। इस रैली को आयोजित करने वाले संगठन डीसी प्रोटेस्ट्स फॉर ईरान के वॉलंटियर रेजा मौसवी ने कहा राष्ट्रपति ने कहा था कि मदद आ रही है। उन्होंने वादा किया और उस पर कायम रहे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मौजूदा ईरानी शासन को खत्म करना और देश के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी को अगला नेता बनाने के लिए समर्थन देना था। प्रदर्शन में शामिल वॉलंटियर मरजीह मिर्जासलेही ने कहा हम चाहते हैं कि हमारे शाह ईरान वापस आएं क्योंकि वे अकेले ही ईरान को फिर से महान बना सकते हैं। मरजीह ने 2007 में ईरान छोड़ दिया था। कई प्रदर्शनकारी अमेरिकी और ईरानी झंडे और पोस्टर लेकर आए थे जिनमें पहलवी को ट्रंप के साथ खड़ा दिखाया गया था। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने अमेरिका से कहा कि अमेरिकी इंडस्ट्रियल प्लांट्स को इलाके से हटाया जाए। IRGC ने आम लोगों से भी अपील की कि वे उन जगहों को खाली करें जहां अमेरिकी शेयरहोल्डर मौजूद हैं ताकि किसी भी खतरे या नुकसान से बचा जा सके। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दिनों में ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि इन हमलों में गैर-सैन्य फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया और कई आम लोग मारे गए। इससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अस्थिर हो गई है और अमेरिकी-ईरानी तनाव चरम पर है। इस रैली और ईरानी प्रतिक्रिया से साफ है कि अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। प्रदर्शनकारी अमेरिकी हस्तक्षेप को ईरानी शासन को बदलने का अवसर मान रहे हैं जबकि ईरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिकों को जोखिम से बचाने के लिए सतर्क है।
ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द (Iran War) ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। यह गिरावट सोमवार को हुए उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद आई है, जब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दायरा महामारी के दौरान कीमतों के नकारात्मक होने के बाद सबसे ज्यादा था। बता दें मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल एनर्जी माार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और मुद्रास्फीति संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक फ्लोरिडा में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह तेल से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज स्ट्रेट्स से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने सोमवार देर रात पत्रकारों से कहा, “हम तेल की कीमतों को कम रखना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “इस संकट की वजह से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इस सप्ताह के अंत तक खत्म होगा। तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थींसोमवार को तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जब फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों को होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह संकरे जलमार्ग आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल के प्रवाह का पांचवां हिस्सा संभालता है। हालांकि, बाद में सत्र में कीमतों में गिरावट आई क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आपातकालीन भंडार जारी करने के प्रयास पर विचार किया। ट्रंप पर अतिरिक्त दबावयह संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में है और इसमें एक दर्जन से अधिक देश शामिल हो गए हैं, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और गैसोइल जैसे उत्पादों सहित ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका में खुदरा पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या तेल संबंधी प्रतिबंधों में छूट देने की योजना पर अतिरिक्त जानकारी नहीं दी, सिवाय इसके कि उन्होंने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर इस विषय पर चर्चा की थी। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद में अस्थायी रूप से वृद्धि करने का रास्ता साफ कर दिया, जो इस व्यापार पर महीनों से चल रहे दबाव से उलट था। बाजार की नजरें होर्मुज परबाजार की नजरें होर्मुज से टैंकरों के आवागमन को फिर से शुरू होते देखने पर टिकी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले के कारण अधिकांश जहाजों ने इस जलमार्ग से बचना शुरू कर दिया है। फिर भी, हाल के दिनों में सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाला एक टैंकर वहां से गुजरा, जबकि ईरान ने इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा है। होर्मुज के बंद होने के कारणभंडारण तेजी से भर जाने के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने उत्पादन कम कर दिया है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल और तेल उत्पादों के प्रवाह पर पड़े इस संकट के कारण रिफाइनरियों ने कुछ कार्यों और आपूर्ति को रोक दिया है, और एशियाई ऊर्जा खरीदारों ने मूल रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए जाने वाले ईंधन शिपमेंट को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धियों से आगे बढ़कर बोली लगाई है।
युद्ध के बीच ईरान के तेल भंडार पर अमेरिका की नजर…. ट्रंप के बयान से हलचल

तेहरान। युद्ध के बीच अमेरिका (America) अब ईरान के तेल पर भी कब्जे (Controls Iran oil ) के संकेत दे रहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा है कि इसे लेकर बातचीत जरूर हुई थी। उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी नहीं दी। खास बात है कि ईरान पहले ही आरोप लगा चुका है कि अमेरिका दुनिया के तेल संसाधनों पर अवैध नियंत्रण हासिल करना चाहता है। जबकि, अमेरिका दावा करता है कि इजरायल के हित में वह युद्ध लड़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं की थी कि अमेरिका ईरानी तेल पर कब्जा करना चाहता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ लोगों ने बात जरूर की है। इस दौरान उन्होंने वेनेजुएला का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, ‘आपने वेनेजुएला को देखा।’ उन्होंने कहा, ‘लोगों ने इसके बारे में सोचा है, लेकिन अभी इस पर बात करना जल्दबाजी होगी।’ खास बात है कि ट्रंप ने बीते महीने कहा था कि अमेरिका को अपने नए दोस्त से 80 मिलियन बैरल तेल मिला है। अमेरिकी की बड़ी साजिश, ईरान के आरोपईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान तेल संसाधनों पर अवैध नियंत्रण हासिल करना है। अगर वे ईरान और वेनेजुएला दोनों के तेल पर नियंत्रण कर लेता है तो दुनिया के लगभग 31 प्रतिशत तेल संसाधनों पर उनका नियंत्रण हो जाएगा। अमेरिका ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि वह यह युद्ध इजरायल के हित में लड़ रहा। अमेरिका बेनकाब हो चुका है। तेल मोर्चे पर है अमेरिका की नजरव्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि वर्तमान में तेल कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, वो कुछ समय की ही है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी ऊर्जा टीम ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने से काफी पहले ही ऊर्जा बाजारों को स्थिर रखने के लिए एक मजबूत योजना तैयार कर ली थी, और वे सभी विश्वसनीय विकल्पों की समीक्षा जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रशासन ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठा सकता है। कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया थाईरान युद्ध के तेज होने से पश्चिम एशिया में उत्पादन और पोत परिवहन पर मंडराते खतरे के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं थीं। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ नरमी देखी गई, लेकिन इस उथल-पुथल से दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह उछलकर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में यह 101 डॉलर के करीब आ गई। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 119.48 डॉलर तक पहुंचने के बाद घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। क्या थी वजहकीमतों में आई ताजा नरमी का कारण उन खबरों को माना जा रहा था जिनमें कहा गया था कि जी-7 देश रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, बाद में सोमवार को ही जी-7 समूह ने फिलहाल इन सुरक्षित भंडारों का उपयोग न करने का फैसला किया है। फ्रांस के वित्त मंत्री ने कहा कि समूह बाजार को स्थिर करने के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल हम भंडार से तेल निकालने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। इससे पहले शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सामरिक भंडार के इस्तेमाल की संभावना को कमतर बताया था।
AMERICA IRAN WAR: तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला…. ट्रंप का दावा- पूरी तरह हुई तबाह ईरानी सेना

AMERICA IRAN WAR: तेहरान। अमेरिकी (American) और इजरायली (Israeli) ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को ईरान की राजधानी तेहरान (Tehran) पर अब तक का सबसे भीषण हमला करते हुए 20 से अधिक भारी धमाके किए. शहर के पश्चिमी हिस्सों में हुए इन हमलों के दौरान करीब आधे घंटे तक बमवर्षक विमानों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे कई इलाकों की बिजली गुल हो गई. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि ईरानी सेना पूरी तरह तबाह हो चुकी है और वॉर का अंत करीब है, जबकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने युद्ध का अंत खुद तय करने की हुंकार भरी है। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीबीएस न्यूज से बात करते हुए सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना उनके द्वारा तय किए गए 4-5 हफ्तों के समय से काफी आगे चल रही है। ‘मिटा देंगे ईरान का नामोनिशान’ ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब न तो नौसेना बची है और न ही एयरफोर्स, उनके मिसाइल भंडार और ड्रोन बनाने की फैक्ट्रियां भी तबाह कर दी गई हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अब कोई ‘चालाकी’ की तो उस देश का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा और दुनिया फिर कभी ईरान का नाम नहीं सुनेगी। ट्रंप ने आगे कहा कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण लेने के बारे में सोच रहे हैं और चेतावनी दी कि अगर ईरान तेल शिपमेंट रोकने की कोशिश करता है तो ये ईरान के लिए अंत होगा। हम तय करेंगे युद्ध का अंत ट्रंप के इसी बयान पर पलटवार करते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जोरदार हमला किया है. आईआरजीसी के प्रवक्ता ने कहा, ‘युद्ध का अंत हम ही तय करेंगे, अगर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे तो तेहरान इस क्षेत्र से ‘एक लीटर तेल’ का निर्यात भी नहीं होने देगा। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को बेतुका बताते हुए चेतावनी दी कि इस इलाके में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए नहीं होगी। ईरान में 20 बड़े धमाके वहीं, इसी बयानबाजी के बीच अमेरिकी और इजरायली सेना ने बड़े हमले किए. बताया जा रहा है कि इजरायली सेना ने तेहरान के आसपास के इलाके में एयर स्ट्राइक कर 20 से ज्यादा इलाकों में बम बरसाए. ये हमले युद्ध की शुरुआत के बाद तेहरान पर अब तक के सबसे भीषण हमला है। एक रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि पश्चिमी इलाकों में विस्फोट हुए हैं, जहां लगभग आधे घंटे तक बमवर्षक विमानों और लड़ाकू विमानों की आवाजें लगातार सुनाई दीं. कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए।