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Gold Rate: ट्रंप के सख्त रुख से सोने पर दबाव, चांदी अब तक 1.87 लाख रुपये तक टूटी

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद सोने की कीमतों में एक बार फिर नरमी देखने को मिली है। वहीं चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.87 लाख रुपये तक सस्ती हो चुकी है। दरअसल, मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते बाजार लगातार प्रभावित हो रहा है। अमेरिका और Iran के बीच टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान के साथ समझौता नहीं होता, तब तक ब्लॉकेड हटाने का सवाल ही नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने भी संकेत दिया है कि यदि ब्लॉकेड जारी रहा, तो वह Strait of Hormuz को नहीं खोलेगा। इस तनातनी ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसी माहौल का असर सोने पर दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 21 अप्रैल, मंगलवार को कॉमैक्स गोल्ड करीब 4 डॉलर टूटकर 4,816.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर भी कमजोरी देखने को मिली। 5 जून डिलीवरी वाला सोना 41 रुपये फिसलकर 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही। MCX पर चांदी 4,568 रुपये टूटकर 2,52,574 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। सोमवार को बाजार खुलते ही चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर इसके ऑल टाइम हाई से तुलना करें, तो कीमत करीब 1,87,552 रुपये तक नीचे आ चुकी है। उल्लेखनीय है कि MCX पर चांदी इससे पहले 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव और अमेरिकी नीति संकेतों के चलते आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में इसी तरह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

फिर चर्चा में ट्रंप का ‘नोबेल कनेक्शन’: मचाडो बोलीं—वह ऐसे नेता…

वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार वजह बनी हैं कोरिना मचाडो, जिन्होंने ट्रंप की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें ऐसा नेता बताया है, जिसने वेनेजुएला की आज़ादी के लिए जोखिम उठाया। मचाडो ने क्या कहा? मैड्रिड में आयोजित एक कार्यक्रम में मचाडो ने कहा कि दुनिया ट्रंप को ऐसे नेता के रूप में देखती है, जिन्होंने वेनेजुएला को तानाशाही से मुक्त कराने के प्रयास में अपने देश के नागरिकों की जान तक खतरे में डाली। उन्होंने यह भी साफ किया कि अपने फैसलों को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है। ‘नोबेल पदक’ को लेकर क्यों मचा विवाद? रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना पदक ट्रंप को सौंप दिया। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी। हालांकि, नोबेल समिति ने स्पष्ट किया कि पुरस्कार किसी एक व्यक्ति को ही दिया जाता है इसे न ट्रांसफर किया जा सकता है, न साझा यानी पदक भले किसी के पास हो, लेकिन सम्मान का अधिकार मूल विजेता के पास ही रहता है। ट्रंप और नोबेल—पुराना रिश्ता ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने का दावा करते हुए खुद को इस पुरस्कार का दावेदार बताया था। लेकिन समिति ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए उनके नाम पर विचार नहीं किया। वेनेजुएला की राजनीति भी बनी वजह इस पूरे मामले के पीछे निकोलस मादुरो सरकार के खिलाफ अमेरिकी रुख भी एक अहम कारण रहा। मचाडो ने इसे वेनेजुएला के लिए ऐतिहासिक बताया, जबकि कई विशेषज्ञ इसे राजनीतिक रणनीति मानते हैं। ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन मचाडो के ताजा बयान ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह मामला सिर्फ एक पदक का नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, छवि और प्रभाव की जंग का हिस्सा बन चुका है।

होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की रणनीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “पागलपन” करार दिया है। मर्फी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था, लेकिन अब अमेरिका उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहा है जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष पर अमेरिका प्रतिदिन करीब दो अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ी राशि है। सांसद ने यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और देश में कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो ऐसी संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल का भी जिक्र किया। होर्मुज पर बढ़ा तनाव अमेरिका और Israel के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान कुछ मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और अन्य टैंकरों पर हमले या शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहा है। इस बीच ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी टाली जाएगी। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम वार्ता अभी भी गतिरोध में बताई जा रही है। ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उसने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया। गार्ड्स के अनुसार यह मार्ग “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों के लिए बंद है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए और सैनिक भेजे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।