Priyanshi Prajapat: अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

Priyanshi Prajapat: नई दिल्ली। अर्मेनिया में आयोजित कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई उज्जैन की प्रियांशी प्रजापत पिछले चार दिनों से युद्ध के कारण फंसी थीं। अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते उनका दुबई के रास्ते भारत लौटना असंभव हो गया। इस मुश्किल समय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहलवान से लाइव बातचीत कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाए। सीएम के निर्देश और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से भारत लाया गया। गुरुवार सुबह प्रियांशी देश लौट आईं और उनके परिवार व खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी थीं जो इस विश्व चैम्पियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उनकी सुरक्षित वापसी ने राज्य सरकार के त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अहमियत को भी दर्शाया। इन हालात में उनके पिता ने मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव से संपर्क किया और मदद के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सूचित किया। मुख्यमंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रियांशी से ऑनलाइन बातचीत कर उन्हें युद्ध के खतरनाक हालात में सुरक्षित मार्ग से लौटने का भरोसा दिया। सीएम के निर्देशों और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से सुरक्षित भारत लाया गया। गुरुवार सुबह वे देश लौट आईं, और उनके परिवार, प्रशिक्षक और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी की वापसी ने राज्य सरकार की तत्परता और संकट प्रबंधन क्षमता को उजागर किया। प्रियांशी इस चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रतिनिधि खिलाड़ी थीं। उनके साथियों और प्रशिक्षकों ने बताया कि यह उनका सपना था कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करें, लेकिन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने उन्हें अचानक कठिनाई में डाल दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय भूमिका और त्वरित निर्णय ने उनकी जान को सुरक्षित रखने में अहम योगदान दिया। प्रियांशी के सुरक्षित लौटने के बाद प्रदेश की खेल प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। युवा खिलाड़ी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ को धन्यवाद दिया। इसके अलावा, इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संकट में राज्य सरकार और खेल संस्थाएं मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। प्रियांशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चार दिन उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि दुबई और अर्मेनिया में युद्ध के कारण भय का माहौल था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी उनकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने मुझे व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया और सही मार्ग से भारत लौटने में मदद की। यह अनुभव यादगार तो है, लेकिन काफी डराने वाला भी रहा।” इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि खेल और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक तत्परता बेहद जरूरी है। प्रियांशी अब सुरक्षित हैं और अपने परिवार के साथ हैं, जबकि मध्यप्रदेश सरकार की इस सक्रिय भूमिका को खेल जगत में सराहा जा रहा है।
तुर्किए ने तोड़ा पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो सपना, द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित रह गया रक्षा समझौता

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के करीबी साथी तुर्किए ने इस्लामाबाद की महत्वाकांक्षा,मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने की योजना, को झटका दे दिया है। अंकारा ने स्पष्ट किया है कि वह सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ किसी बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन में शामिल नहीं होगा। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया था, और उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इसमें जल्द ही तुर्किए और अजरबैजान जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन तुर्किए ने साफ कर दिया कि फिलहाल सभी चर्चाएँ केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग तक ही सीमित हैं। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए के रक्षा अधिकारी स्पष्ट हैं कि राष्ट्रपति एर्दोगान की सरकार न तो बहुपक्षीय समझौते में शामिल है और न ही इस पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ संबंध केवल रणनीतिक उद्देश्यों तक ही सीमित हैं। सऊदी अरब भी किसी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे के पक्ष में नहीं है और केवल द्विपक्षीय समझौतों को ही प्राथमिकता देती है। पाकिस्तानी सेना की चुनौतियां तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान की सेना की सीमित संसाधन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान पहले से ही तीन सीमाओं, भारत, अफगानिस्तान और ईरान—पर सक्रिय है और आंतरिक स्तर पर भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। तुर्किए के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में सऊदी अरब के साथ समझौता पाकिस्तानी सेना को और भी अधिक बंटवारा कर रहा है, जिससे बहुपक्षीय रक्षा जिम्मेदारियों को निभाना कठिन हो जाएगा। तकनीकी निर्भरता और आर्थिक सीमाएं पाकिस्तान की अधिकांश सैन्य तकनीक चीन पर निर्भर है, विशेष रूप से एयर डिफेंस और एयरफोर्स क्षेत्र में। तुर्किए के अनुसार, पाकिस्तान की एकमात्र प्रमुख रणनीतिक ताकत उसकी परमाणु क्षमता है। इसके अलावा आर्थिक दबाव और सीमित वित्तीय संसाधन भी बहुपक्षीय गठबंधन की संभावना को चुनौती देते हैं। तुर्किए ने जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत है। अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य उपकरण, ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली उपलब्ध करा रहा है। दोनों देश साझा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं, लेकिन कोई बहुपक्षीय समझौता नहीं हुआ। इस्लामिक नाटो का सपना अधर में पाकिस्तान के पीएम और सेना प्रमुख मुनीर ने मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने का प्रयास किया था, जिसमें सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौते ने संभावनाओं को बढ़ाया। 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान यह प्रचार हुआ कि जल्द ही बहुपक्षीय समझौते की घोषणा होगी। लेकिन यात्रा के बाद केवल द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग पर सहमति बनी, कोई बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन नहीं बनाया गया।