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नेचुरल ग्लो का सीक्रेट है हल्दी! चेहरे की कई समस्याओं में ऐसे करती है असर

नई दिल्ली। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी अब स्किनकेयर का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। सदियों से आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। आज भी कई ब्यूटी एक्सपर्ट्स और स्किन केयर रूटीन में Turmeric यानी हल्दी को खास महत्व दिया जाता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व त्वचा को हेल्दी रखने और कई स्किन समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है। मुंहासों से दिला सकती है राहतहल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स और एक्ने की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और सूजन घटाने में असरदार मानी जाती है। त्वचा में लाती है नेचुरल ग्लोहल्दी का नियमित उपयोग स्किन को चमकदार बनाने में मदद कर सकता है। कई लोग फेस पैक में हल्दी मिलाकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। शादी-ब्याह में होने वाली हल्दी रस्म भी इसी वजह से खास मानी जाती है। दाग-धब्बे कम करने में मददगारहल्दी त्वचा के दाग-धब्बों और टैनिंग को कम करने में भी उपयोगी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को रिपेयर करने और रंगत सुधारने में मदद कर सकते हैं। बढ़ती उम्र के असर को कर सकती है कमविशेषज्ञों के मुताबिक हल्दी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। इससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसी एजिंग समस्याओं का असर कुछ हद तक कम हो सकता है। ऐसे करें इस्तेमालहल्दी को दही, बेसन, शहद या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा फ्रेश महसूस हो सकती है। हालांकि ज्यादा मात्रा में हल्दी लगाने से स्किन पीली दिख सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। सावधानी भी जरूरीअगर आपकी स्किन बेहद संवेदनशील है या किसी चीज से एलर्जी होती है, तो हल्दी का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षा कवच बन सकती है रसोई की हल्दी..

नई दिल्ली। भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली हल्दी अब केवल स्वाद और रंग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक विज्ञान भी इसकी औषधीय क्षमताओं को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है। हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने हल्दी के मुख्य सक्रिय तत्व, करक्यूमिन को लेकर नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो टाइप 1 डायबिटीज जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं, यह शोध एक आशा की किरण बनकर उभरा है। करक्यूमिन, जो हल्दी को उसका विशिष्ट पीला रंग प्रदान करता है, अपनी सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहा है, लेकिन अब इसके हृदय संबंधी लाभों ने शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। डायबिटीज की स्थिति में शरीर के भीतर बढ़ी हुई शुगर का स्तर धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं और धमनियों को नुकसान पहुँचाने लगता है, जिससे मरीजों में दिल की बीमारियों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है। टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन लेने के बावजूद कई बार नसों की मजबूती और लचीलापन कम होने लगता है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष अध्ययन किया, जिसके प्रारंभिक नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं। इस शोध के दौरान यह देखा गया कि करक्यूमिन का नियमित और नियंत्रित सेवन रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और उन्हें डायबिटीज के दुष्प्रभावों से बचा सकता है। प्रयोगशाला में किए गए इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ‘हीट शॉक प्रोटीन 70’ नामक एक विशेष प्रोटीन की भूमिका का भी विश्लेषण किया। यह प्रोटीन कोशिकाओं को बाहरी तनाव और नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययन में पाया गया कि करक्यूमिन के प्रभाव से इस प्रोटीन का संतुलन बेहतर होता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं तनाव को झेलने में अधिक सक्षम हो जाती हैं। इसके साथ ही, दिल से शरीर के अन्य अंगों तक शुद्ध खून ले जाने वाली मुख्य धमनी, जिसे महाधमनी कहा जाता है, उसकी स्थिति में भी करक्यूमिन के सेवन के बाद सुधार दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि हल्दी का यह तत्व न केवल नसों को सुरक्षा देता है बल्कि हृदय प्रणाली की कार्यक्षमता को भी बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इन नतीजों के बावजूद विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह महत्वपूर्ण है कि वर्तमान शोध अभी शुरुआती चरणों में है और इसके अधिकांश प्रयोग जानवरों पर किए गए हैं। मानव शरीर पर इसके सटीक प्रभाव और आवश्यक मात्रा को निर्धारित करने के लिए अभी और बड़े स्तर पर नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है। केवल भोजन में हल्दी की मात्रा बढ़ा देने या बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट का उपयोग करने से समान लाभ मिलेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। भविष्य में होने वाले शोध ही यह तय करेंगे कि करक्यूमिन को डायबिटीज के उपचार में एक सहयोगी विकल्प के रूप में कैसे शामिल किया जा सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुशासित जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित खानपान ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।