पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत

नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK ने अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। लंबे समय से जिस फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई थी, उसका परिणाम अब सामने आ चुका है और TVK ने 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत हासिल कर लिया है। यह पूरा घटनाक्रम राज्य की सत्ता समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी पर रह गई थी। इसके बाद गठबंधन की राजनीति ने अहम भूमिका निभाई और कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन की स्थिति बनी। फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने अपने समर्थन को मजबूत करते हुए सदन में संख्या बल साबित करने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अहम मोड़ देखने को मिले, जहां कुछ विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए और TVK को स्पष्ट बढ़त मिल गई। वोटिंग के अंत में TVK को कुल 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक था। इस समर्थन में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने सरकार की स्थिति को मजबूत किया। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प बन गई। मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सदन में अपने संबोधन में सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखना है। इस परिणाम के साथ थलापति विजय ने राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। फिल्मी पर्दे पर सफलता के बाद अब राजनीतिक मंच पर उनकी यह जीत उनके करियर का एक नया अध्याय मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार इस समर्थन को कितनी मजबूती से बनाए रखती है और राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालती है।
मुलाकात में मुस्कान, बातचीत में हल्कापन: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की वाइको से भेंट ने राजनीति का बदला अंदाज

नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक अलग ही नजारा उस समय देखने को मिला जब राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई स्थित एमडीएमके प्रमुख वाइको के आवास पर शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात औपचारिक थी, लेकिन इसके दौरान कई ऐसे पल सामने आए जिन्होंने इसे चर्चा का विषय बना दिया। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज और सौहार्दपूर्ण नजर आया। बातचीत के बीच वाइको ने एक दिलचस्प बात साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके घर में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने भी हाल ही में हुए राजनीतिक चुनाव में टीवीके को समर्थन दिया था। यह सुनते ही वहां मौजूद लोग मुस्कुरा उठे और बातचीत का माहौल हल्का हो गया। इस मुलाकात का सबसे भावुक हिस्सा तब देखने को मिला जब वाइको के घर में मौजूद घरेलू सहायिकाएं मुख्यमंत्री विजय को सामने देखकर भावुक हो गईं। उनके लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था। उत्साह और सम्मान के भाव में एक कर्मचारी ने मुख्यमंत्री के पैर छू लिए और परंपरागत तरीके से उनका स्वागत किया। वहीं कुछ कर्मचारियों ने नजर उतारकर अपनी खुशी व्यक्त की। मुख्यमंत्री विजय ने भी इस पूरे माहौल को सहजता से स्वीकार किया और सभी से गर्मजोशी के साथ मिले। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं, जिससे यह मुलाकात और अधिक यादगार बन गई। इस दौरान उन्होंने वाइको की राजनीतिक समझ और उनके लंबे अनुभव की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक सफर में वाइको के विचारों और भाषणों से काफी कुछ सीखा है। वाइको ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक राजनीतिक संकेत बताया और कहा कि राज्य में नई नेतृत्व शैली उभर रही है, जो संवाद और सहयोग पर आधारित है। उनके अनुसार यह राजनीतिक परिपक्वता का संकेत है, जहां मतभेदों के बावजूद सम्मान और संवाद की संस्कृति बनी रहती है। मुख्यमंत्री विजय के सत्ता संभालने के बाद से यह देखा जा रहा है कि वह लगातार वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राजनीतिक हस्तियों से मुलाकात कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कई प्रमुख नेताओं से शिष्टाचार भेंट की थी, जिसे राजनीतिक हलकों में सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत देती हैं, जहां कटुता के बजाय संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां लोग इसे राजनीति के बदलते स्वरूप के रूप में देख रहे हैं।
100 करोड़ की FD से करोड़ों कमा रहे Vijay, हर महीने मिल रहा लाखों का ब्याज

नई दिल्ली। तमिल सुपरस्टार और राजनीतिज्ञ Vijay इन दिनों सिर्फ फिल्मों और राजनीति ही नहीं, बल्कि अपनी स्मार्ट निवेश रणनीति को लेकर भी सुर्खियों में हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, Vijay ने करीब 100 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश किए हुए हैं, जिससे उन्हें हर महीने भारी ब्याज आय हो रही है। सोशल मीडिया पर भी उनके इस निवेश मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। Vijay ने हाल ही में अपनी राजनीतिक पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK के जरिए राजनीति में एंट्री की है। चुनावी हलफनामों और निवेश से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद लोग उनकी संपत्ति और कमाई के तरीकों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vijay की कुल नेटवर्थ करीब 624 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें लगभग 220 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 404 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फिल्मों, प्रॉपर्टी, किराया, ब्याज और अन्य निवेश स्रोतों से आता है। सबसे ज्यादा चर्चा उनके 100 करोड़ रुपये के FD निवेश को लेकर हो रही है। जानकारी के अनुसार, इस FD पर उन्हें करीब 6.25 प्रतिशत से 7.50 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। यदि औसतन 6.5 प्रतिशत ब्याज दर मानी जाए, तो उन्हें हर महीने लगभग 54 लाख रुपये तक ब्याज आय हो सकती है। यानी सिर्फ FD से उनकी सालाना कमाई करीब 6.5 करोड़ रुपये तक पहुंच रही है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, फिक्स्ड डिपॉजिट को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है। निवेशकों को पहले से तय ब्याज दर के आधार पर निश्चित रिटर्न मिलता है। यही वजह है कि बड़े निवेशक और हाई नेटवर्थ व्यक्ति अपनी पूंजी का एक हिस्सा FD जैसे सुरक्षित साधनों में रखते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल FD पर निर्भर रहना हमेशा सबसे बेहतर रणनीति नहीं होती। लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए कई निवेशक म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और इक्विटी जैसे विकल्पों में भी निवेश करते हैं। इसके बावजूद FD उन लोगों के लिए आकर्षक बनी रहती है जो कम जोखिम और स्थिर आय चाहते हैं। सोशल मीडिया पर Vijay की इस निवेश रणनीति को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कई लोग इसे सुरक्षित और समझदारी भरा निवेश बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे बड़े निवेशकों के लिए आदर्श वित्तीय प्लानिंग का उदाहरण मान रहे हैं। एक तरफ Vijay तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से उभरते चेहरों में शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी वित्तीय रणनीति भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है।
थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज

नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शुमार थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखकर सबको चौंका दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में पार्टी बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है, लेकिन विपक्षी और सत्ता दोनों खेमों में इस नतीजे ने हलचल मचा दी है। दो सीटों पर जीत, अब एक छोड़ना तयविजय ने इस चुनाव में दो सीटों चेन्नई की पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत हासिल की है। लेकिन नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार एक ही सीट रख सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि विजय पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे, जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से इस्तीफा दिया जा सकता है। इसी सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। क्या तृषा कृष्णन राजनीति में आएंगी?इसी राजनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है अभिनेत्री तृषा कृष्णन का। चर्चा है कि TVK उन्हें उपचुनाव में तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता वोट बैंक को मजबूत कर सकती है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक तृषा अभी राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हैं और इस प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। उनका अब तक किसी राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है। गठबंधन की तलाश में TVKसरकार बनाने के लिए TVK को किसी बड़ी पार्टी का समर्थन चाहिए। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का झुकाव या तो DMK या AIADMK की ओर हो सकता है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का अवसर देने की मांग की है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़थलापति विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। एक तरफ गठबंधन की सियासत, दूसरी तरफ उपचुनाव की तैयारी और तीसरी तरफ तृषा कृष्णन की संभावित एंट्री—इन सबने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विजय किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या वाकई सिनेमा की एक और बड़ी स्टार राजनीति में उतरती हैं।
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…

Tamil Nadu Politics: नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला है, जहां कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को सरकार गठन के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इस निर्णय के साथ राज्य की राजनीति में गठबंधन समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गठजोड़ों में दरार की स्थिति भी बन गई है। कांग्रेस द्वारा लिए गए इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ दिया गया है, जिसमें सबसे अहम शर्त यह है कि सरकार में किसी भी तरह की सांप्रदायिक ताकतों की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं। TVK ने हालिया राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में उल्लेखनीय सीटें हासिल की हैं। पार्टी को 100 से अधिक सीटों पर सफलता मिली है, जिससे वह सरकार गठन की स्थिति में पहुंच गई है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। CHC Infection Risk: मरीजों की जान से खिलवाड़! भांडेर स्वास्थ्य केंद्र में बढ़ा संक्रमण का खतरा इस नए राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा असर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के पुराने गठबंधन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। दोनों दल पिछले कई वर्षों से एक साथ राजनीति करते रहे हैं, लेकिन इस नए घटनाक्रम के बाद उनके रिश्तों में दूरी की स्थिति बनती नजर आ रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि औपचारिक तौर पर बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जनता ने इस बार एक ऐसी सरकार के पक्ष में मतदान किया है जो धर्मनिरपेक्ष और विकासोन्मुख हो। इसी आधार पर TVK को समर्थन देने का निर्णय लिया गया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका समर्थन तमिलनाडु में एक स्थिर और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सरकार के गठन के लिए है। TVK की ओर से कांग्रेस से समर्थन की औपचारिक अपील की गई थी, जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर विचार किया और तमिलनाडु इकाई को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। राज्य इकाई और विधायक दल की बैठक के बाद इस समर्थन पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस नए गठबंधन को केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भविष्य की राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा और राज्यसभा चुनावों तक इस गठबंधन का असर देखने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है, जहां पारंपरिक गठबंधन समीकरण बदलते दिखाई देंगे। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित हो सकती है।
करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां फिल्म स्टार थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं। सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी का यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में ‘विजय युग’ की शुरुआत माना जा रहा है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, और TVK इससे सिर्फ 10 सीट पीछे रहकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इससे विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही है। इस ऐतिहासिक जीत के बीच मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा (RGV) ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर कर सियासी हलचल बढ़ा दी। तस्वीर में एम करुणानिधि फीता काटते नजर आ रहे हैं, और उनके पीछे एक युवा लड़का खड़ा है—जो कोई और नहीं बल्कि खुद विजय हैं। इस फोटो को शेयर करते हुए RGV ने तंज कसते हुए लिखा कि करुणानिधि ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके पीछे खड़ा यह लड़का एक दिन उनकी पार्टी को इतनी बड़ी चुनौती देगा। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और यूजर्स भी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘किस्मत का खेल’ बता रहे हैं, तो कुछ विजय को नया करुणानिधि तक कह रहे हैं। विजय की इस जीत ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को बड़ा झटका दिया है। पिछले चुनाव में 133 सीटें जीतने वाली DMK इस बार सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई है। यानी करीब 74 सीटों का नुकसान, जो पार्टी के लिए करारी हार साबित हुआ है। करीब 60 साल तक तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही, लेकिन विजय ने महज दो साल में इस राजनीतिक चक्र को तोड़ दिया। कुल मिलाकर, एक पुरानी तस्वीर ने आज की राजनीति की तस्वीर बदल दी है—जहां कभी करुणानिधि के पीछे खड़ा एक लड़का आज तमिलनाडु की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।
थलपति से ‘जन नायक’ तक: तमिलनाडु की राजनीति में छाए विजय

नई दिल्ली। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय अब राजनीति में भी ‘जन नायक’ बनकर उभर रहे हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को कड़ी टक्कर मिली। विजय ने खुद पेरंबुर और तिरुचिरापल्ली सीटों से जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। राजनीति में आने का फैसला: कब और क्यों?विजय ने 2 फरवरी 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा की थी। कोविड-19 के बाद से ही वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में सक्रिय हो गए थे। सही समय देखकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2026 चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसी के साथ उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बनाने का ऐलान भी कर दिया। घोषणापत्र में बड़े वादे: जनता को सीधे साधने की कोशिशअप्रैल 2026 में जारी घोषणापत्र में विजय ने कई बड़े और लोकलुभावन वादे किए। इनमें हर परिवार की महिला मुखिया को 2,500 रुपये मासिक सहायता, साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर, गरीब बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी देने का वादा शामिल है। इसके अलावा बेरोजगार युवाओं के लिए स्नातकों को 4,000 रुपये और डिप्लोमा धारकों को 2,500 रुपये का भत्ता देने की बात कही गई। छोटे किसानों के कर्ज माफ करने, बिना गारंटी लोन और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादों ने जनता को आकर्षित किया। फिल्मी करियर: बाल कलाकार से सुपरस्टार तक का सफरविजय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1984 में बाल कलाकार के रूप में की थी। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित फिल्म से उन्होंने शुरुआत की। 1992 में ‘नालैया थीरपु’ से लीड एक्टर बने और 1996 की फिल्म ‘पूवे उनाक्कागा’ ने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित कर दिया।इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं और ‘थलपति’ के नाम से लोकप्रिय हो गए। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ भी जल्द रिलीज होने वाली है। निजी जीवन में उतार-चढ़ावराजनीतिक सफर के बीच विजय का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम के साथ रिश्तों में खटास और तलाक की खबरों ने लोगों को चौंका दिया। 1999 में शादी करने वाले इस कपल के दो बच्चे हैं। संपत्ति और लाइफस्टाइलचुनावी हलफनामे के अनुसार विजय के पास करीब 404.58 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनके पास 10 मकान और कई लग्जरी गाड़ियां हैं, जो उनके सफल करियर को दर्शाती हैं। थलपति’ अब जनता के नेतासिनेमा में सुपरस्टार बनने के बाद अब विजय राजनीति में भी मजबूत पकड़ बनाते नजर आ रहे हैं। उनका यह सफर बताता है कि लोकप्रियता और जनसमर्थन के दम पर वे तमिलनाडु की राजनीति में लंबी पारी खेल सकते हैं।
फिल्मी सितारों के ग्लैमर और राजनीति के चाणक्यों के बीच सीधी जंग, क्या थलपति विजय बनेंगे सियासत के नए 'थलापति'?

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति का सिनेमा के साथ अटूट और दशकों पुराना रिश्ता रहा है, लेकिन साल 2026 का विधानसभा चुनाव इस रिश्ते को एक नए और निर्णायक मोड़ पर ले जाता दिख रहा है। इस बार चुनावी मैदान में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि फिल्मी पर्दे के वे महानायक भी उतरे हैं जिनकी एक झलक पाने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस बार ग्लैमर और जनसेवा का ऐसा मेल देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुपरस्टार विजय थलपति से लेकर खुशबू सुंदर और उदयनिधि स्टालिन जैसे चर्चित चेहरों ने इस चुनावी जंग को न केवल रोचक बना दिया है, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह से उलझा दिया है। इस पूरे चुनावी परिदृश्य में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे हैं जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया ‘विजय थलपति’ के नाम से जानती है। अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपनी पार्टी को अकेले चुनाव लड़ाने के फैसले के साथ विजय ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल एक विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता के मुख्य दावेदार के रूप में उभरे हैं। उनके विशाल फैन बेस और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और विपक्षी AIADMK के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है। विजय की सभाओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि तमिलनाडु की जनता अब नए चेहरों और नई सोच की ओर आकर्षित हो रही है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुशबू सुंदर एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। बीजेपी की उपाध्यक्ष और मशहूर अभिनेत्री खुशबू ने राजनीति के साथ-साथ अपने अभिनय करियर को भी बखूबी संभाला है, लेकिन इस चुनाव में उनकी पूरी ताकत पार्टी के विस्तार और एनडीए की सीटों को बढ़ाने में लगी है। वहीं, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन सत्ता को बचाए रखने के लिए फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं। उदयनिधि ने भले ही सिनेमा को अलविदा कह दिया हो, लेकिन युवाओं के बीच उनकी पकड़ और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उनका नियंत्रण उन्हें इस चुनाव का सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है। इस चुनावी बिसात पर केवल ये तीन नाम ही नहीं, बल्कि गौतमी ताड़ीमाल्ला और आर. सरथकुमार जैसे दिग्गज भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौतमी जहां AIADMK के टिकट पर चुनावी समर में कूदी हैं, वहीं सरथकुमार अपनी पार्टी के बीजेपी में विलय के बाद एनडीए के लिए जोरदार प्रचार कर रहे हैं। इनके साथ ही नाम तमिलर काची (NTK) के प्रमुख सीमैन अपनी क्षेत्रीय पहचान की राजनीति के साथ मजबूती से डटे हुए हैं। कुल मिलाकर, 2026 का यह चुनाव केवल वोट और जीत का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस विरासत की परीक्षा है जहां सिनेमाई नायक अक्सर राजनीतिक भाग्य विधाता बनते रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता इस बार पर्दे के किस नायक को असल जिंदगी का जननायक चुनती है।
Tamil Nadu Election 2026 : दिल्ली में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल, मौन अवधि उल्लंघन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

Tamil Nadu Election 2026 : नई दिल्ली। में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम को लेकर उठे आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मतदान से पहले लागू मौन अवधि के दौरान कथित तौर पर प्रचार गतिविधियों की योजना को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिससे चुनावी नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान से 48 घंटे पहले मौन अवधि लागू की जाती है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी बाहरी प्रभाव के स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अवसर देना होता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का प्रचार, चाहे वह सार्वजनिक रूप से हो या डिजिटल माध्यमों के जरिए, प्रतिबंधित रहता है। इसी संदर्भ में आरोप सामने आए हैं कि संबंधित पार्टी इस अवधि के दौरान ऑनलाइन प्रचार अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, जो नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। इस मामले में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि चुनावी कानूनों के तहत इस तरह की गतिविधियों पर स्पष्ट रोक है। आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की बात भी सामने आई है, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए संभावित प्रचार सामग्री को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता जताई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यह राजनीतिक दल पहली बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहा है। राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही इस पार्टी के लिए यह विवाद एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी पार्टी पर आचार संहिता से जुड़े कुछ मामलों को लेकर चर्चा हो चुकी है, जिससे उसकी छवि पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस प्रकार के आरोप किसी भी पार्टी के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है और चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के लिए नियमों का पालन करना और जिम्मेदार आचरण बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है। तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के प्रचार पर रोक को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि आधुनिक चुनावों में डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते चुनावी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना और तकनीकी स्तर पर सतर्कता बढ़ाना समय की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।