उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

नई दिल्ली। जबलपुर के कटंगी क्षेत्र के कैमोरी गांव निवासी नवविवाहिता पूजा साहू की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। पूजा की शादी 6 फरवरी 2026 को गढ़ा फाटक निवासी निखिल साहू से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद पूजा अपने पति और परिवार के साथ उज्जैन दर्शन के लिए गई थी। परिजनों के अनुसार, 20 फरवरी को जब वे वापस लौट रहे थे, तब पूजा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पति निखिल ने परिवार को एक वीडियो भेजकर बताया कि पूजा की हालत खराब है। लेकिन रास्ते में तेंदूखेड़ा, दमोह के पास पूजा की मौत हो गई। मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि पूजा के साथ लगातार दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, शादी के समय 10 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केवल 4 लाख रुपए दिए गए। पूजा ने अपनी मौत से पहले अपने मोबाइल के जरिए परिजनों को वीडियो भेजे थे, जिनमें उन्होंने ससुराल वालों के बर्ताव और अपनी व्यथा बताई। ये वीडियो अब पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपे जा रहे हैं। पूजा की मौत के बाद पूरे साहू समाज में आक्रोश फैल गया। समाज के सैकड़ों लोग और मृतका के रिश्तेदार जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह हत्या बीमारी का रूप देने की कोशिश है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीरो में मामला दर्ज कर जांच के लिए डायरी दमोह भेज दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पूजा की मौत ने परिवार और समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों और वीडियो की जांच कर रही है ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।
BUDDHESHWAR MAHADEV TEMPLE: 1.31 करोड़ के नोटों से भगवान महादेव का विशेष श्रृंगार, उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

BUDDHESHWAR MAHADEV TEMPLE: उज्जैन जिले के बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर इस साल भगवान शिव का विशेष श्रृंगार 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से किया गया। मंदिर में भगवान का मुकुट, माला और मंदिर परिसर की लड़ी-लड़ियों तक नोटों से सजाई गई हैं। इस अनोखे सजावट को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के बाद मेला आयोजित किया जाता है। इस बार यह मेला 14 फरवरी से शुरू हुआ और 28 फरवरी तक चलेगा। नोटों से किए गए विशेष श्रृंगार की सजावट 26 फरवरी तक भक्तों के दर्शन के लिए उपलब्ध रहेगी। मंदिर के पुजारी के अनुसार इस भव्य श्रृंगार को तैयार करने में सात कलाकारों की टीम को तीन दिन का समय लगा। कलाकारों ने नोटों से मुकुट, माला और मंदिर की लड़ी-लड़ियों को अत्यंत आकर्षक और भव्य रूप में सजाया। यह परंपरा मंदिर में पिछले चार सालों से चल रही है। 2021 में 7 लाख रुपए, 2022 में 11 लाख रुपए, 2023 में 21 लाख रुपए और 2024 में 51 लाख रुपए के नोटों से भगवान का श्रृंगार किया गया। 2025 में यह राशि बढ़कर 1 करोड़ 21 लाख रुपए हो गई और इस साल 1 करोड़ 31 लाख रुपए के नोटों से भगवान महादेव को सजाया गया है। भक्तों के अनुसार नोटों की माला और मुकुट से सजा भगवान का यह स्वरूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य दिखाई देता है। मंदिर परिसर में नोटों की लड़ी-लड़ियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा और दर्शन को और भी खास बना दिया। इस विशेष श्रृंगार ने भक्तों को अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव और महाशिवरात्रि का आनंद प्रदान किया। श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में इस सजावट के कारण उमड़ रही है और यह दृश्य देखने के लिए दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं।
उज्जैन महाकालेश्वर में वसुंधरा राजे सिंधिया का दिव्य दर्शन, भक्तों के लिए प्रेरणा का अवसर

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह 10 बजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का भव्य आगमन हुआ। मंदिर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले नंदी हाल का दौरा किया और नंदी जी के दर्शन कर भगवान महाकाल का जल अर्पित किया। इस दौरान मंदिर में दर्शन व्यवस्था की भी उन्होंने तारीफ की और कहा कि मंदिर में भक्तों को सुलभ और व्यवस्थित दर्शन मिल रहे हैं। वसुंधरा राजे ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद भगवान श्री वीरभद्र जी का पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में होने वाले ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का भी विधिवत पूजन किया। उनके इस दिव्य दर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी और श्रद्धा का भाव भर दिया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल एवं सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने वसुंधरा राजे का स्वागत किया और उन्हें सत्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान से आने वाले श्रद्धालु भी महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं और भगवान महाकाल का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहता है। इस दौरान वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि सुख-दुख में हम सभी भगवान शिव के पास जाते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मंदिर की साफ-सफाई, व्यवस्था और भक्तों के लिए सुविधाओं को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। भक्तों और पर्यटकों के लिए यह अवसर बेहद खास रहा क्योंकि एक बड़े नेता का भव्य दर्शन होने से मंदिर का वातावरण और भी श्रद्धालु भाव से भर गया। वसुंधरा राजे के दर्शन ने उपस्थित लोगों के दिलों में महाकाल के प्रति श्रद्धा और विश्वास को और मजबूत किया।इस दिव्य अवसर ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में एक अलग ही उत्सव का माहौल बना दिया और श्रद्धालु बाबा महाकाल के आशीर्वाद का अनुभव कर खुश नजर आए।
बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और पुजारियों ने आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला। इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर भगवान महाकाल का श्रृंगार किया गया। पंचामृत से पूजन और कर्पूर आरती के पश्चात भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से सजाया गया। इस दिव्य श्रृंगार से महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और अलौकिक दिखाई दिया। नंदी हाल में नंदी जी का विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जल से अभिषेक और पंचामृत से विशेष पूजा हुई, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग अर्पित कर भस्म अर्पित किया गया। भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के दिव्य आशीर्वाद का अनुभव किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस आरती को इसलिए अत्यंत विशेष और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भस्म आरती का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।