Chambalkichugli.com

यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में एक नई तकनीकी रणनीति अपना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन 2026 तक लगभग 25,000 अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल (UGV) यानी बिना चालक वाले जमीनी रोबोट तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है। यह कदम आधुनिक युद्ध में मानव सैनिकों की सुरक्षा और तकनीकी बढ़त को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इन रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, बारूदी सुरंगें लगाने और कुछ मामलों में सीमित हमले करने के लिए किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि युद्ध में मानव नुकसान को कम करने के लिए ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई जा रही है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन की कुछ विशेष सैन्य इकाइयाँ, जैसे K-2 ब्रिगेड, पहले से ही इन UGV सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन और भारी गोलाबारी के कारण कई इलाकों को ‘नो-गो ज़ोन’ माना जा रहा है, जहां रोबोटिक सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में UGV मैदान में उतारे जाते हैं, तो यह युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी भी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

रूस के दिल में यूक्रेन का बड़ा वार: 1700 किमी अंदर घुसकर Su-57 ठिकाने पर ड्रोन अटैक

नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने रूस के भीतर करीब 1700 किलोमीटर तक घुसकर एक बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसमें आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट Sukhoi Su-57 के ठिकानों को निशाना बनाया गया। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अब तक का सबसे गहरा और रणनीतिक हमला माना जाएगा, जिसने सीधे तौर पर व्लादिमीर पुतिन को झटका दिया है। यूक्रेन के मुताबिक, यह हमला चेल्याबिंस्क क्षेत्र के शागोल एयरबेस पर किया गया, जहां Sukhoi Su-34 जैसे बमवर्षक विमान भी तैनात थे। ड्रोन हमले के बाद इलाके में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और सैन्य ठिकानों के पास मौजूद ट्रेनिंग सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा गया कि एक अहम एविएशन ट्रेनिंग स्कूल के हैंगर प्रभावित हुए हैं। हालांकि, रूस की ओर से इस दावे को पूरी तरह खारिज किया गया है। चेल्याबिंस्क के गवर्नर एलेक्सी टेक्सलर ने कहा कि यह केवल एक “नाकाम ड्रोन हमला” था, जिसे समय रहते रोक दिया गया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। मॉस्को की चुप्पी और यूक्रेन के दावे—दोनों के बीच सच्चाई अब भी साफ नहीं हो पाई है। इस हमले ने एक बार फिर यूक्रेन की बदलती युद्ध रणनीति को उजागर किया है। कीव अब सिर्फ फ्रंटलाइन पर ही नहीं, बल्कि रूस के अंदर गहराई तक जाकर हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बना रहा है। इससे पहले भी यूक्रेन ने “स्पाइडर वेब” जैसे ऑपरेशन के जरिए रूसी एयरबेस और बमवर्षक विमानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था, जिसकी निगरानी खुद वोलोदिमिर जेलेंस्की कर रहे थे। सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स ने पहले भी ऐसे हमलों की पुष्टि की झलक दी है, जहां रूसी एयरबेस पर जले हुए निशान और तबाह ढांचे दिखाई दिए थे। अब इस नए हमले ने यह साफ कर दिया है कि ड्रोन युद्ध इस संघर्ष का सबसे निर्णायक हथियार बनता जा रहा है। कुल मिलाकर, रूस के अंदर इतनी गहराई में किया गया यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी है—जो यह दिखाता है कि युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुश्मन के “दिल” तक पहुंच चुका है।