भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से

नई दिल्ली: भीम ऐप में एक नया और अहम फीचर जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल पेमेंट और भी आसान और तेज हो जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सहायक कंपनी एनबीएसएल ने यह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है इस फीचर के जरिए अब यूजर्स 5,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन को अपने फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन से कन्फर्म कर सकेंगे। इसका मतलब है कि छोटे पेमेंट के लिए हर बार UPI PIN डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस बदलाव से पेमेंट प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी बल्कि यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा। अक्सर लोग पिन भूल जाते हैं या गलत पिन डाल देते हैं, जिससे ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। नया फीचर इस समस्या को काफी हद तक कम कर देगा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके यूजर्स अपने दोस्तों और परिवार को पैसे भेज सकते हैं, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी आसानी से कर सकते हैं कंपनी के अनुसार, यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है क्योंकि फिंगरप्रिंट और फेस डेटा सीधे यूजर के डिवाइस में सुरक्षित रहता है। इससे पिन शेयर होने या उसके गलत इस्तेमाल का खतरा कम हो जाता है हालांकि, 5,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए अभी भी UPI PIN की जरूरत होगी, जिससे बड़े पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बनी रहेगी फिलहाल यह सुविधा उन स्मार्टफोन्स पर उपलब्ध है जिनमें बायोमेट्रिक सपोर्ट यानी फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन की सुविधा मौजूद है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iOS डिवाइस
Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

नई दिल्ली । देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा। फास्टैग का बढ़ता प्रयोग एनएचएआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। इससे टोल वसूली के तरीके में व्यापक बदलाव आया है और अधिकांश टोल लेनदेन अब RFID-सक्षम फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो रहे हैं। इससे संपर्क रहित और तेज आवागमन संभव हो गया है। इसके अलावा, देशभर के टोल प्लाजा पर UPI भुगतान सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जो त्वरित और सुलभ विकल्प प्रदान करती है। नकद भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के मुताबिक, वैध और सक्रिय फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करने वाले वाहनों से नकद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI के माध्यम से भुगतान करने पर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का 1.25 गुना शुल्क देना होता है। एनएचएआई ने बताया कि नकद भुगतान के कारण व्यस्त समय में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा अवधि बढ़ती है और लेनदेन विवाद भी उत्पन्न होते हैं। डिजिटल टोलिंग से बेहतर संचालन देशभर के 1150 से अधिक टोल केंद्रों पर पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से परिचालन दक्षता, यातायात प्रबंधन और समय की बचत में सुधार की उम्मीद है। यह पहल एनएचएआई के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी आधारित, उच्च दक्षता वाला और उपयोगकर्ता-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि देशभर में आवागमन और अधिक सुगम और निर्बाध बनाया जा सके।
डिजिटल भुगतान में नया इतिहास: जनवरी में UPI से रोजाना ₹91,403 करोड़ का लेनदेन

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने जनवरी 2026 में इतिहास रच दिया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी महीने में UPI के जरिए कुल ₹28.33 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ, जबकि ट्रांजैक्शन की संख्या 21.7 अरब तक पहुंच गई। यह आंकड़ा मासिक और औसत दैनिक दोनों ही स्तर पर अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में रोजाना औसतन 70 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजैक्शन किए गए, जिनका औसत दैनिक मूल्य ₹91,403 करोड़ रहा। इसकी तुलना में दिसंबर 2025 में औसत दैनिक लेनदेन ₹90,217 करोड़ और ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 69.8 करोड़ थी। यानी नए साल की शुरुआत के साथ ही डिजिटल भुगतान की रफ्तार में और तेजी देखने को मिली है। NPCI के अनुसार दिसंबर 2025 में UPI लेनदेन का कुल मूल्य ₹27.97 लाख करोड़ था, जबकि जनवरी में इसमें करीब 21 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सालाना आधार पर ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 28 से 29 प्रतिशत और कुल लेनदेन राशि में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह साफ संकेत देता है कि UPI अब केवल शहरी भुगतान का साधन नहीं रहा, बल्कि देशभर में रोजमर्रा की जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुका है। डिजिटल भुगतान के विस्तार में UPI QR कोड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अब 70.9 करोड़ से ज्यादा एक्टिव UPI QR कोड मौजूद हैं, जो जुलाई 2024 की तुलना में करीब 21 प्रतिशत अधिक हैं। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, ट्रांसपोर्ट हब और ग्रामीण बाजारों तक QR कोड की पहुंच ने स्कैन और पे को आम जनता के लिए सबसे आसान और भरोसेमंद भुगतान विकल्प बना दिया है। UPI के साथ-साथ अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों में भी मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में IMPS के जरिए ₹6.62 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ, जो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत लगातार कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में UPI लेनदेन में और तेजी देखने को मिल सकती है। सरकारी प्रोत्साहन, छोटे व्यापारियों की बढ़ती भागीदारी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ने से UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत आधार प्रदान करेगा।