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अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल

तेहरान। ईरान (Iran) अपने तेल (Oil) को इकट्ठा करने के लिए नए तरीके खोजने में जुटा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (American naval blockade) ने उसके निर्यात (Export) को लगभग रोक दिया है। ईरान पूरी तरह उत्पादन बंद करना नहीं चाहता। ऐसे में वह पुराने और कबाड़ टैंकों में बिना बिके तेल को भरने में जुटा है। ईरान के भीतर तेल का भंडार बढ़ने के साथ ही वह अब जंक स्टोरेज (कबाड़ भंडारण) के रूप में जाने जाने वाले पुराने स्थलों को फिर से चालू कर रहा है। वह कामचलाऊ कंटेनरों का उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही रेल के जरिये चीन को कच्चा तेल भेजने की कोशिश भी कर रहा है। वह किसी टैंक, जहाज, कामचलाऊ जगह या फिर उसे जमीन के नीचे ही छोड़ने पर काम कर रहा है। ये असामान्य कदम बुनियादी ढांचे के संकट को टालने और हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध में वाशिंगटन के दबाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब इस बात की होड़ बन गया कि पहले कौन झुकता है। रेल से भेजने की कोशिश काफी महंगीईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी के अनुसार, ईरान अब रेल के जरिये चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। रेल मार्ग तेहरान को चीन के यीवू और शीआन शहरों से जोड़ता है। हालांकि, यह समुद्री मार्ग की तुलना में बहुत महंगा है। तेल न बिक पाना और उसे इकट्ठा करना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालता है। इससे वह देश बातचीत की मेज पर आने या युद्ध की स्थिति में झुकने को मजबूर हो सकता है। तेल रखने की जगह जल्द खत्म होगीरिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकाबंदी जारी रही तो मई के मध्य तक ईरान का उत्पादन मौजूदा स्तर से आधे से भी कम (12 से 13 लाख बैरल रोज) गिर सकता है। ईरान के पास तेल रखने की जगह दो हफ्ते से भी कम समय में खत्म हो सकती है। ईरान के पास जमीन पर मौजूद तेल का भंडार नाकाबंदी के दौरान 46 लाख बैरल बढ़कर अब लगभग 4.9 करोड़ बैरल हो गया। 1. सबसे पहले तेल को बड़े-बड़े जमीनी टैंकों में भरा जाता है। जब ये टैंक भर जाते हैं, तो वे पुराने या कबाड़ टैंकों का भी इस्तेमाल करते हैं। 2. जब जमीन पर जगह खत्म हो जाती है, तो तेल को समुद्री जहाजों में भरकर समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है। इसे फ्लोटिंग स्टोरेज कहते हैं। 3. अधिक तेल को निकालने के लिए देश भारी छूट पर तेल बेचने लगते हैं ताकि खरीदार आकर्षित हों। 4. अगर भंडारण की जगह बिल्कुल खत्म होने वाली हो, तो तेल के कुओं को बंद करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे आखिरी और जोखिम भरा रास्ता है। क्योंकि, कुओंको दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होता है।

होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार

तेहरान। ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval blockade) के चलते कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी। ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पारब्लूमबर्ग के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 120.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.74 प्रतिशत अधिक है। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (Nymex) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.55 प्रतिशत चढ़कर 107.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।” ईरान का प्रस्ताव भी खारिजइससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है। भारत पर क्या असर पड़ रहा है?भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं। इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबावरेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा। OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसानउनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है। क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।

अमेरिकी नाकाबंदी के बीच होर्मुज से गुजरा माल्टा का ध्वज लगा जहाज…

दुबई। माल्टा (Malta.) का ध्वज लगे एक जहाज (Ship) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz.) से पश्चिम की ओर यात्रा शुरू की। यह पहला कच्चा तेल (Crude oil.) ले जाने वाला टैंकर बताया जा रहा है, जब से अमेरिका (America.) ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगाई है। यह जानकारी दुनिया भर में जहाजों की निगरानी करने वाले शिपिंग ट्रैकिंग मॉनिटर के हवाले से दी गई है। माल्टा का ध्वज लगा तेल टैंकर अगियोस फैनोरियोस-I के गुरुवार को इराक के बसरा बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है, जहां अमेरिका की नाकेबंदी लागू नहीं है। मरीन ट्रैफिक के अनुसार, यह जहाज ओमान की खाड़ी में लगभग दो दिन तक रुका रहा और फिर उसने दोबारा मार्ग तय किया। इस बीच, अमेरिका की नौसेना ने कहा कि वह ईरान के आसपास व्यापारिक जहाजों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने क्षेत्र में मौजूद व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है कि वे जहाजों को रोक सकते हैं और नाकेबंदी लागू करने के लिए बल प्रयोग कर सकते हैं। नौसेना के रेडियो संदेश में कहा, ईरानी बंदरगाहों की ओर या वहां से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जा सकता है और जब्त किया जा सकता है। यह संदेश अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) की ओर से सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है। एक सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर पुष्टि की कि यह संदेश इस समय क्षेत्र के सभी जहाजों को प्रसारित किया जा रहा है। रेडियो संदेश में आगे कहा गया, अगर आप नाकेबंदी का पालन नहीं करेंगे, तो बल प्रयोग किया जाएगा।

अमेरिकी नाकेबादी की चीनी टैंकर ने ली परीक्षा… होर्मुज से गुजरने के बाद लिया यू-टर्न

तेहरान। अमेरिका (America) ने हाल ही में ईरान (Iran.) के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी (Naval blockade) लगा दी है। इसका मतलब है कि कोई भी जहाज ईरान के बंदरगाहों (Iranian Ports) पर नहीं जा सकता या वहां से नहीं आ सकता। यह ब्लॉकेड 13 अप्रैल को लागू हुआ। इसका मकसद ईरान के तेल व्यापार को रोकना है। खासतौर से उन जहाजों को रोका जा रहा है जो ईरानी बंदरगाहों (Iranian Ports) या तटीय क्षेत्रों में आते-जाते हैं। अब एक चीनी कंपनी से जुड़े टैंकर ने इस नाकेबंदी की परीक्षा ली है जिसका दुनिया भर में खूब चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस चीनी टैंकर का नाम रिच स्टारी है। यह चीन की शंघाई Xuanrun शिपिंग कंपनी का है। अमेरिका ने 2023 में इसे प्रतिबंधित कर दिया था क्योंकि यह ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहा था। टैंकर में लगभग 2.5 लाख बैरल मेथेनॉल (एक तरह का केमिकल) था। ब्लॉकेड शुरू होते ही यह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा और खाड़ी से बाहर निकल गया। स्ट्रेट से निकलने में कैसे सफल रहा चीनी टैंकरपहले टैंकर होर्मुज के पास पहुंचकर वापस मुड़ गया। कुछ घंटों बाद फिर आगे बढ़ा और सफलतापूर्वक बाहर निकल गया। बाहर निकलने के बाद उसने यू-टर्न कर लिया। इसका गंतव्य ओमान का बंदरगाह था, लेकिन बाद में बदल दिया गया। इस दौरान उसने अपनी चीनी मालिकाना जानकारी भी सार्वजनिक कर दी। कई अन्य जहाज भी इसी समय स्ट्रेट पार कर चुके हैं। सीजफायरइस घटना से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। चीन ने अमेरिका के इस ब्लॉकेड की कड़ी निंदा की है और इसे खतरनाक बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। शिपिंग कंपनियां अब सतर्क हो गई हैं क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यह घटना दिखाती है कि नाकेबंदी कितना प्रभावी है और आगे क्या हो सकता है।