अमेरिका पर बढ़ रहा कर्ज, जीडीपी से ज्यादा हुआ राष्ट्रीय ऋण, डोनाल्ड ट्रंप के लिए बनी बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। अमेरिका में आर्थिक संकट की चिंता गहराती जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय से जुड़ी चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा मुद्दा देश पर बढ़ता कर्ज है, जो अब देश की जीडीपी से भी अधिक हो चुका है। यह स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार देखने को मिली है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कमेटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका पर कुल कर्ज लगभग 31.27 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में देश की जीडीपी करीब 31.22 ट्रिलियन डॉलर रही। यानी कर्ज ने आर्थिक उत्पादन को पीछे छोड़ दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 2026 में बढ़कर लगभग 39.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति 1940 के दशक के बाद पहली बार बनी है, जब युद्धकालीन खर्चों के कारण कर्ज जीडीपी से अधिक हो गया था। कर्ज बढ़ने की वजह क्या है?अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा कर्ज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं टैक्स कटौती, बढ़ता ब्याज भुगतान, और सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य योजनाओं जैसे मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी पर बढ़ता खर्च। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जितना खर्च करती है, उससे अधिक पैसा सिर्फ कर्ज के ब्याज भुगतान में जा रहा है। अनुमान है कि नेट ब्याज भुगतान ही सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। तेजी से बढ़ता कर्जआंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में अमेरिकी कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। 2017 में यह करीब 20.2 ट्रिलियन डॉलर था, जो अब 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। 1990 की तुलना में यह वृद्धि कई गुना अधिक है। कांग्रेस बजट कार्यालय के अनुमान के अनुसार, अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2036 तक अमेरिका का कुल कर्ज 53 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। https://twhttps://x.com/stats_feed/status/2051669630037418391?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2051669630037418391%7Ctwgr%5Ea6977655b8a7d43e5fe0892f94827f6498cbd36d%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.aajtak.in%2Fbusiness%2Fnews%2Fstory%2Fdonald-trump-tension-us-debt-more-than-gdp-first-time-after-world-war-ii-see-latest-data-tutc-dskc-2544347-2026-05-06itter.com/stats_feed/status/2051669630037418391 आर्थिक खतरे की आशंकाविशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता कर्ज अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इससे ब्याज दरों में वृद्धि, निवेशकों का भरोसा कमजोर होना और देश की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, सरकार पर बढ़ते कर्ज का दबाव आम नागरिकों की जीवन-लागत को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू

नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आयातित वस्तुओं के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है यह आदेश 24 फरवरी से प्रभावी होगा और 150 दिनों तक लागू रहेगा इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित करना है धारा 122 क्या है और इसे क्यों लागू किया गयाट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को अधिकार देती है कि वे सरचार्ज और विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकटों का समाधान कर सकें इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति औपचारिक जांच की आवश्यकता के बिना त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं कौन-कौन सी वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगीव्हाइट हाउस की फैक्टशीट के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी इनमें खनिज, मुद्रा और बुलियन धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और उनका कच्चा माल, इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को दिए गए निर्देशराष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत निर्देश दिया है कि वे उन देशों की जांच करें जिनकी नीतियां और कानून अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं या भेदभाव कर रहे हैं इस कदम का मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं का विरोध करना और अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षित रखना है अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँराष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अमेरिका को व्यापार घाटे और घरेलू उत्पादन में कमी के कारण अपनी अधिकांश वस्तुएं आयात करनी पड़ती हैं जिससे अमेरिकी डॉलर विदेशों में चले जाते हैं टैरिफ 150 दिनों के बाद अपने आप समाप्त हो जाएगा लेकिन यदि आवश्यक हुआ तो राष्ट्रपति नई भुगतान संतुलन आपातकाल की घोषणा कर इसे फिर से लागू कर सकते हैं विशेषज्ञों की रायव्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 122 के तहत टैरिफ लगाना अन्य व्यापार कानूनों की तुलना में तेज और अधिक प्रभावी है क्योंकि इसके लिए लंबी औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं होती यह अमेरिकी व्यापार हितों की रक्षा के लिए तात्कालिक कदम उठाने की अनुमति देता हैट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है हालांकि इसके प्रभाव और प्रतिक्रिया दुनिया भर में निगरानी के दायरे में रहेंगे