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US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष (US-Iran conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती से समर्थन दे रहा है, ताकि यह संघर्ष और व्यापक न हो सके। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर अपनी साझा चिंताओं और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा की। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए घनिष्ठ रूप से जुड़े रहेंगे और प्रयासों का समन्वय करेंगे। दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का संघर्ष तेजी से फैल रहा है और अब यह भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। जहाज में कुल 180 लोग सवार थे। बता दें कि यह ईरानी फ्रिगेट कुछ दिन पहले ही भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था। बता दें कि ईरान इजरायल और अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने श्रीलंका तट पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अत्याचार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मिसाल पर गहरा अफसोस होगा।

Pakistan Saudi Arabia agreement: सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया

Pakistan Saudi Arabia agreement: नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी बीच आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकता है। इसकी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ सुरक्षा समझौता है, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि हालिया हालात में पाकिस्तान इस समझौते के अनुरूप कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। ईरान पहले ही सऊदी अरब के कई इलाकों पर हमले कर चुका है। क्या है समझौते की शर्तें सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) हुआ था, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया। समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे। रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी तीसरे देश द्वारा पाकिस्तान पर हमला होता है, तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को भी जवाब देने का अधिकार होगा। ईरान के हमले, लेकिन पाकिस्तान की चुप्पी हाल के समय में ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से समझौते के तहत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई या जवाबी कदम सामने नहीं आए हैं। अपने ही समझौते में उलझा पाकिस्तान? पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि उन्होंने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने या ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की। इससे यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल इस समझौते को पूरी तरह लागू करने से बच रहा है। विदेश मंत्री ने क्या कहा पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने इस्लामाबाद में मीडिया को बताया कि उस समय वह इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे और उन्होंने सऊदी अरब तथा ईरान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। डार के मुताबिक उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता है। इस पर ईरानी पक्ष ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो। उन्होंने दावा किया कि इस बातचीत के बाद सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विदेश मंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने तुर्की, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, ईरान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के अलावा यूरोपीय संघ के उपाध्यक्ष और संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री से भी फोन पर बातचीत की है।