Anil Kochar: पंजाब से अमेरिका पहुंचे परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, 176 छात्रों का पूरा एजुकेशन लोन चुकाकर बने मिसाल

Anil Kochar: नई दिल्ली। अमेरिका में भारतीय मूल के समाजसेवी अनिल कोचर इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स के 176 छात्रों का अंतिम वर्ष का पूरा एजुकेशन लोन चुकाने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। यह ऐलान ग्रेजुएशन समारोह के दौरान किया गया, जहां छात्र अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ उसी मंच से खत्म होने वाला है। साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा रिपोर्ट के मुताबिक, यह घोषणा यूनिवर्सिटी के रेनॉल्ड्स कोलिजियम में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान हुई। समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे अनिल कोचर ने कहा कि यह फैसला उनके दिवंगत पिता प्रकाश चंद कोचर को सम्मान देने के लिए लिया गया है। उनके पिता कई दशक पहले पंजाब से अमेरिका आए थे और कठिन संघर्ष के बाद परिवार को नई पहचान दिलाई थी। अनिल कोचर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी युवा के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होती है, लेकिन बढ़ते एजुकेशन लोन कई छात्रों के सपनों पर भारी पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि छात्र अपने करियर की शुरुआत कर्ज के दबाव से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आजादी के साथ करें। विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत.. समारोह में मौजूद छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक बन गया। कई छात्र खुशी से रो पड़े, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी पढ़ाई का बड़ा कर्ज अचानक खत्म हो जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए अनिल कोचर की जमकर सराहना की। बताया जा रहा है कि अनिल कोचर लंबे समय से शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। वे मानते हैं कि समाज को वापस लौटाना हर सफल व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उनकी यह पहल अब अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय में भी प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
चीन की टेंशन बढ़ाएगा अमेरिका का ‘लिथियम खजाना’, पहाड़ों के नीचे मिला इतना बड़ा भंडार कि 300 साल नहीं पड़ेगी आयात की जरूरत

नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका में वैज्ञानिकों ने लिथियम का एक विशाल भंडार खोजा है, जिसे ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भंडार इतना बड़ा है कि अमेरिका करीब 300 साल तक लिथियम आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इस खोज को चीन के रेयर अर्थ और बैटरी मटेरियल बाजार में दबदबे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह विशाल लिथियम भंडार अपलाचियन पर्वत के नीचे मौजूद है। यह मुख्य रूप से North Carolina, South Carolina, Maine और New Hampshire में फैला हुआ है। वैज्ञानिकों ने इलाके में लिथियम से समृद्ध 18 अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान की है। 65 अरब डॉलर का ‘सफेद सोना’रिपोर्ट के मुताबिक इस भंडार में करीब 2.5 करोड़ मीट्रिक टन लिथियम मौजूद हो सकता है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 अरब डॉलर आंकी गई है। माना जा रहा है कि यह खोज अमेरिका को बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में फिर से मजबूत बना सकती है। क्यों इतना अहम है लिथियम?लिथियम को आधुनिक दौर का “सफेद सोना” कहा जाता है। इसका इस्तेमाल: इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में स्मार्टफोन और लैपटॉप में ऊर्जा भंडारण सिस्टम में एयरोस्पेस और डिफेंस उपकरणों में सबसे ज्यादा होता है। दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने के साथ लिथियम की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। चीन का दबदबा पड़ सकता है कमजोरफिलहाल China रेयर अर्थ और लिथियम रिफाइनिंग सेक्टर में सबसे ताकतवर देश माना जाता है। वहीं Australia दुनिया में सबसे ज्यादा लिथियम सप्लाई करता है। ऐसे में अमेरिका की यह खोज वैश्विक सप्लाई चेन का समीकरण बदल सकती है। जापान ने भी खोजा समुद्र के नीचे खजानाइधर Japan ने भी समुद्र की गहराई में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का विशाल भंडार खोजने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि यह भंडार टोक्यो से करीब 2000 किलोमीटर दूर समुद्री इलाके में मौजूद है। अनुमान है कि वहां 160 लाख टन से ज्यादा रेयर अर्थ संसाधन हो सकते हैं, जो चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।