डॉलर के मुकाबले रुपया चढ़ा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों का दिखा असर

नई दिल्ली। वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ अस्थायी सीजफायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक संकेत देखने को मिले, जिसका असर सीधे रुपये पर पड़ा। बुधवार को भारतीय रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 40 पैसे की बढ़त के साथ 92.61 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 93 के आसपास बंद हुआ था। सीजफायर से घटा भू-राजनीतिक तनावअमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा ने बाजार में चल रही अनिश्चितता को काफी हद तक कम किया है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सैन्य गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की बात शामिल है। Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश भी दिए। इस कदम से निवेशकों के बीच भरोसा लौटा और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावटसीजफायर का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। Brent Crude करीब 16 प्रतिशत यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI Crude लगभग 20 प्रतिशत यानी 21.90 डॉलर टूटकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि सस्ता कच्चा तेल आयात बिल को कम करता है और मुद्रा को मजबूती देता है। आरबीआई की नीतिगत स्थिरता भी बनी सहायकइस बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, जिससे बाजार में स्थिरता का संदेश गया है। ब्याज दरों में बदलाव न होने से निवेशकों को स्पष्ट संकेत मिला कि फिलहाल मौद्रिक नीति संतुलित बनी रहेगी। सोना-चांदी में तेज उछालकमोडिटी बाजार में भी हलचल देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। सोने का वायदा भाव 3,688 रुपए (2.7%) उछलकर 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं चांदी का वायदा भाव 6 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। आगे क्या रहेगा रुख?विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की यह मजबूती फिलहाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर है। अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है। हालांकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को देखते हुए अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
forex market India : डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव

forex market India : नई दिल्ली।भारतीय रुपए ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार किया और 95.2 का नया निचला स्तर देखा। हालांकि दिन के अंत में रुपया 94.83 पर बंद हुआ, जो कि शुक्रवार के 94.81 के बंद से 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपए में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। अकेले मार्च महीने में भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत कमजोर होकर 22,331.40 पर बंद हुआ। मार्च 2026 में निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जो कि मार्च 2020 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है। आरबीआई की नई दिशा, ओवरनाइट नेट ओपन लिमिट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन लिमिट को 100 मिलियन डॉलर करने का निर्णय लिया। इसके बाद रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला, लेकिन सत्र के दौरान 160 पैसे गिरावट के साथ शुरुआती स्तर खो दिया। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत में उनकी नेट ओपन रुपया पोजिशन 100 मिलियन डॉलर से अधिक न हो। अनुमान है कि इन निवेशों का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक हो सकता है। तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 115 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा कमजोर होने के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ा है। निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हुई। मार्च 2026 का आखिरी कारोबारी सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रुपए ने पहली बार 95 का स्तर पार कर नई चुनौतियों का संकेत दिया, वहीं शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और आरबीआई की नई दिशा रुपए और शेयर बाजार दोनों पर असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस समय की आर्थिक नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।
RBI की पहल से मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले 1% की बढ़त के साथ खुला

नई दिल्ली।सोमवार को भारतीय मुद्रा में बढ़ोतरी देखने को मिली, जब भारतीय रिजर्व बैंक की नई पहल के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1.3 प्रतिशत बढ़कर 93.59 पर खुला। हाल के दिनों में लगातार दबाव झेल रहे रुपए के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है। सट्टेबाजी पर लगाम के लिए RBI का बड़ा कदमरुपए में बढ़ोतरी का मुख्य कारण RBI का वह निर्देश है, जिसमें बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी खुली स्थिति 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने को कहा गया है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि वे दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर स्थिति इसी सीमा के भीतर रखें। साथ ही, सभी चालू बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे बाजार में डॉलर की अटकलों पर रोक गिल और रुपए को स्थिरता मिलेगी। पहले गिरावट में था रुपयागौरतलब है कि मार्च के दौरान वैश्विक तनाव के कारण रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो गया था। पिछले हफ़्ते यह करीब 94.84 के स्तर तक गिर गया था, जिससे बाज़ार में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में RBI का यह कदम बाज़ार में भरोसा बहाल करने के लिए अहम माना जा रहा है। कच्चे तेल की महंगाई बना दबावहालांकि रुपए पर अभी भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश की चिंता बढ़ गई है। महंगाई तेल महंगाई को बढ़ती है और इससे रुपए पर नेगेटिव असर पड़ता है। वैश्विक तनाव और डॉलर की मांगपश्चिम एशिया में जारी तनाव, हूती विद्रोहियों की सक्रियता और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के चलते वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ता है। आगे क्या कह रहे हैं विशेषज्ञविश्लेषकों का दबाव है कि RBI का यह कदम अल्पकाल में रुपए को सहारा देगा। डॉलर की बड़ी स्थिति कम होने से बाजार में संतुलन आएगा और रुपए में बढ़ोतरी बनी रह सकती है। हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो रुपए पर फिर से दबाव आ सकता है।