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गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा विकास की नई लाइफलाइन, कई तीर्थ स्थलों को मिलेगा सीधा लाभ

नई दिल्ली । गंगा एक्सप्रेसवे (करीब 594 किमी) मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला एक बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट है, जो उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ्तार देगा। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक पहुंचने में 10–12 घंटे लगते थे, अब यह सफर लगभग 5–6 घंटे में पूरा हो सकेगा। इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा धार्मिक पर्यटन को होगा, क्योंकि यह कई प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी मंदिर और त्रिवेणी संगम को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इससे श्रद्धालुओं के लिए एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करना आसान हो जाएगा। इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज को वाराणसी, विंध्याचल, अयोध्या, गोरखनाथ मंदिर, नैमिषारण्य, चित्रकूट, मथुरा और वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से भी बेहतर रूप से जोड़ने में मदद करेगा। इससे पूरे राज्य में तीर्थ यात्राओं और टूरिज्म में तेजी आने की संभावना है। हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी इस विकास से लाभान्वित होंगे, जिससे जैन और महाभारत काल से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही संभल, बदायूं, शाहजहांपुर और रायबरेली जैसे छोटे शहरों में होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार में भी तेजी आएगी। कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली एक बड़ी विकास कड़ी साबित हो सकता है।

मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट

नई दिल्ली। अगर आप हर बार गोवा या मनाली घूमने का सपना देखते हैं, लेकिन समय और बजट की कमी आड़े आ जाती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे अब लोग प्यार से “यूपी का मिनी गोवा” कहने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनती जा रही है। यहां पहुंचते ही गंगा किनारे फैली रेत और शांत बहता पानी लोगों को किसी बीच का एहसास कराता है।  रेत, पानी और सुकून – बीच जैसा अनुभवगढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे फैली सफेद रेत और ठंडी हवा पर्यटकों को आकर्षित करती है। खासकर शाम के समय यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। लोग घंटों बैठकर पानी को निहारते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और नाव की सवारी का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं।  दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए परफेक्ट वीकेंड स्पॉटदिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से यहां आना बेहद आसान है। कम दूरी और कम खर्च की वजह से यह जगह युवाओं और फैमिली ट्रैवलर्स दोनों की पसंद बनती जा रही है। लोग सुबह निकलकर शाम तक वापस लौट आते हैं, जिससे यह एक “क्विक गेटवे” के रूप में मशहूर हो रहा है।  धार्मिक महत्व भी है खासगढ़मुक्तेश्वर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी गहरा है। यहां स्थित गंगा घाट और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं।शाम की गंगा आरती यहां का सबसे आकर्षक दृश्य होता है, जहां दीपों की रोशनी और घंटियों की आवाज माहौल को दिव्य बना देती है। सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियताइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रहे वीडियो ने गढ़मुक्तेश्वर को नई पहचान दी है। ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “Hidden Beach” और “Mini Goa” जैसे नामों से प्रमोट कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है।  मेले और त्योहारों में लगता है विशाल मेलाकार्तिक पूर्णिमा और गंगा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा इलाका रोशनी, भीड़ और आस्था से भर जाता है। घाटों पर अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।  कम बजट में बेहतरीन अनुभवआज के समय में जहां ट्रिप्स महंगे होते जा रहे हैं, वहीं गढ़मुक्तेश्वर कम बजट में शानदार अनुभव देता है। शांति, प्रकृति और धार्मिकता का यह मिश्रण इसे उत्तर भारत का उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट बना रहा है। अगर आप भी गोवा जैसी बीच वाली फीलिंग चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिल्ली के पास ही मौजूद यह जगह अब धीरे-धीरे एक पॉपुलर वीकेंड डेस्टिनेशन बन चुकी है।