UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में आए भीषण तूफान (Severe Storms) और खराब मौसम (Bad Weather) के कारण अब तक कम से कम 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 170 पशुओं की मौत और 227 घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। गुरुवार को राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 13 मई को हुए खराब मौसम के कारण राज्य के 26 जिलों से मौतों की सूचना मिली है. तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मकानों को नुकसान पहुंचा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के अंदर राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए. उन्होंने सभी मंडलायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों से घटनाओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क स्थापित कर हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है. राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य स्तर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय के जरिए राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं. प्रभावित जिलों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए। प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाहीप्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तूफान और बारिश के कारण 17 लोगों की मौत की सूचना थी. बाद में अन्य क्षेत्रों से भी जानकारी आने के बाद प्रशासन ने बुधवार की घटनाओं में कुल 24 लोगों की मौत की पुष्टि की. तेज हवाओं और बारिश के चलते कई ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है। भदोही में 16 लोगों की मौतभदोही जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि कई क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। फतेहपुर में दीवार गिरने और हादसों में गई जानफतेहपुर जिले में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 16 लोग घायल हो गए. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि खागा तहसील में पांच महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत हुई. वहीं सदर तहसील में एक घर की दीवार गिरने से एक महिला की जान चली गई. घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है। प्रतापगढ़ में शेड और दीवार गिरने से मौतेंप्रतापगढ़ जिले में तेज हवाओं और बारिश के बीच दीवार गिरने, सीमेंटेड शेड ढहने और बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र के ओझा का पुरवा गांव में एक सीमेंटेड शेड गिरने से भीम यादव (25) मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि बघराई थाना क्षेत्र के सरी स्वामी गांव में दीवार गिरने से भूषण पांडे (56) की मौत हुई. इसके अलावा नारंगपुर गांव की शांति देवी (46) और छत्रपुर शिवाला रघना गांव के लाल बहादुर (44) की भी तूफान से जुड़ी घटनाओं में जान चली गई। कानपुर देहात में बिजली गिरने से युवती की मौतकानपुर देहात जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रसूलाबाद क्षेत्र के भौथारी गांव में भारी बारिश के दौरान 19 वर्षीय रुचि बकरियों के साथ नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस घटना में कई बकरियों की भी मौत हो गई. पास में खड़ा एक 60 वर्षीय व्यक्ति भी घायल हो गया. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मानव और पशुधन नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी। देवरिया और सोनभद्र में भी हादसेदेवरिया जिले के भीमपुर गौरा गांव निवासी कोमल यादव (62) की बिजली गिरने से मौत हो गई. इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं. एक अन्य घटना में नेरुअरी गांव निवासी रामनाथ प्रसाद (65) की भी बिजली गिरने से मौत हो गई. वहीं सोनभद्र जिले में माधव सिंह (38) की तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई. CM योगी ने दिए सख्त निर्देशमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है. साथ ही राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण कर सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से जारी हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
UPPCL का बड़ा बदलाव: प्रीपेड मीटर से पोस्टपेड सिस्टम की ओर, जून 2026 से डिजिटल तरीके से मिलेगा बिजली बिल

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव करते हुए प्रीपेड मीटर सिस्टम को पोस्टपेड मॉडल में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बदलाव के बाद उपभोक्ताओं को अब बिजली रिचार्ज की टेंशन से राहत मिलेगी और हर महीने खपत के आधार पर बिल जारी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मई 2026 का बिजली बिल जून 2026 में 1 से 10 तारीख के बीच उपभोक्ताओं तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाया जाएगा। UPPCL ने साफ किया है कि अब बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के मोबाइल पर भेजे जाएंगे, जिससे पेपर बिल की प्रक्रिया धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। उपभोक्ताओं को बिजली बिल प्राप्त करने के चार प्रमुख तरीके दिए गए हैंपहला तरीका SMS अलर्ट है, जिसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बिल की जानकारी भेजी जाएगी। दूसरा तरीका WhatsApp है, जहां डिस्कॉम के आधिकारिक नंबर पर मैसेज भेजकर बिल प्राप्त किया जा सकता है। तीसरा विकल्प Google Pay और PhonePe जैसे पेमेंट ऐप्स हैं, जहां कस्टमर ID डालकर बिल देखा और भुगतान किया जा सकता है। चौथा तरीका टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 है, जहां कॉल करके बिल की पूरी जानकारी ली जा सकती है। यूपीपीसीएल के अनुसार, यह बदलाव स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शी और आसान बिलिंग सुविधा मिल सके। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को समय पर बिल की जानकारी और भुगतान की सुविधा मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी।
यूपी : मुरादाबाद में चेतावनी वाले पोस्टरों से बढ़ा विवाद: ‘हिंदू सोसाइटी’ की अपील ने छेड़ी नई बहस

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के लाजपत नगर स्थित श्रीराम सोसाइटी में घरों के बाहर लगाए गए ‘हिंदू सनातनी सोसाइटी’ लिखे पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्टरों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। साथ ही, दो साल पहले शिव मंदिर वाली गली में लगे पलायन संबंधी पोस्टरों की घटना भी एक बार फिर लोगों को याद आ रही है। इस पूरे विवाद की वजह सोसाइटी में कुछ मकानों की खरीद-फरोख्त बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग अपने घर बेचना चाहते हैं और इन मकानों को खरीदने के लिए एक विशेष समुदाय के खरीदारों ने अधिक कीमत की पेशकश की है, जबकि अन्य खरीदार कम दाम दे रहे हैं। इसी स्थिति को लेकर सोसाइटी के कुछ निवासियों में यह आशंका पैदा हुई है कि नए समुदाय के आने से इलाके की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना बदल सकती है। विरोध का यह तरीका शनिवार को कुछ घरों से शुरू हुआ, जो रविवार तक बढ़कर 25 से ज्यादा घरों तक पहुंच गया। भगवान राम की तस्वीर वाले इन पोस्टरों में लिखा है कि यह क्षेत्र “पूर्णतः हिंदू सनातनी सोसाइटी” है और अन्य पक्ष के लोग यहां मकान न लें। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने कटघर थाना पुलिस को मौके पर भेजकर लोगों से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्टरों में सीधे किसी धर्म का नाम नहीं लिया गया है और ‘दूसरे पक्ष’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह मामला कानूनी दृष्टि से जटिल हो जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में माहौल संवेदनशील जरूर है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है। बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।
Jewar International Airport: जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस

Jewar International Airport: नई दिल्ली/नोएडा । उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है। जेवर एयरपोर्ट को इसका लंबे समय से इंतजार था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को एयरोड्रोम लाइसेंस दे दिया है। इससे पहले जेवर एयरपोर्ट को सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है। मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी वाईआईएपीएल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया है। इसका कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर, 2021 को 40 साल के लिए शुरू हुआ। मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को हर मौसम में ऑपरेशन के लिए पब्लिक यूज़ कैटेगरी के तहत लाइसेंस मिला है। इसमें 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है। इसका डाइमेंशन 3,900 m×45 m है, जिसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सपोर्ट मिलता है, जिससे इसका 24×7 ऑपरेशन हो सकता हैं। एयरोड्रम में 24 कोड C और 02 कोड D/F एयरक्राफ्ट के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह एआरएफएफ कैटेगरी 9 सुविधाओं से पूरी तरह लैस है, जो बोइंग 777-300ER जैसे वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) को जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य इसको देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। इस एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ 4 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल डेवलप होगा। इससे एयरपोर्ट की कैपेसिटी हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की होगी। इसके सभी फेज पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट पर हर साल 7 करोड़ यात्री आ सकेंगे, जो दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़ा एविएशन हब बन जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जल्द ही एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके उद्घाटन करने का अनुरोध कर उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यहां से एयर इंडिया, आकाशा और इंडिगो ने अपने विमानों को उड़ान भरने के लिए समझौता किया है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद इन एयरलाइंस कंपनियां यहां पर अपना स्टाफ की नियुक्तियां और अन्य तकनीकी सुविधाओं को लगाना शुरू कर देंगे। एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए पहले से ही सीआईएसएफ और यूपी पुलिस तैनात है। एयरपोर्ट से अच्छी कनेक्टिविटी देने के लिए विभिन्न मार्गों और साधनों पर कार्य हो रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
AYODHYA RAM MANDIR: UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर

AYODHYA RAM MANDIR: लखनऊ। अयोध्या (Ayodhya) में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर (Lord Shri Ram Magnificent Temple ) के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद न केवल धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा है, बल्कि इस पावन नगरी की आर्थिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ (Indian Institute of Management (IIM) Lucknow) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा पावरहाउस (Uttar Pradesh’s Economy Major Powerhouse) बनकर उभरा है। मंदिर उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन, विदेशी निवेश, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों में ऐसी वृद्धि हुई है जिसकी कल्पना कुछ वर्षों पहले तक असंभव थी। श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की स्थिति बेहद अलग थी। तब सालाना करीब 1.7 लाख श्रद्धालु ही अयोध्या पहुंचते थे और स्थानीय बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। लेकिन जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद तस्वीर जादुई रूप से बदली है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले छह महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब अनुमान है कि हर साल पांच से छह करोड़ आगंतुक स्थायी रूप से अयोध्या आएंगे। पर्यटकों की इस भारी संख्या से प्रदेश सरकार को मिलने वाले कर राजस्व में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की भारी बढ़त होने की संभावना जताई गई है। आतिथ्य क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) का विस्तार प्रतिदिन औसतन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य (Hospitality) और सेवा क्षेत्र को नई संजीवनी दी है। रिपोर्ट बताती है कि अयोध्या में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए हैं। दुनिया भर के दिग्गज होटल समूहों जैसे ताज और मैरियट ने अयोध्या में अपनी विस्तार योजनाएं धरातल पर उतार दी हैं। इसके साथ ही, लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) स्थापित हुए हैं। अध्ययन का अनुमान है कि अगले चार-पांच वर्षों में अयोध्या में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो स्थानीय युवाओं के लिए वरदान साबित होंगे। स्थानीय दुकानदारों और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल इस आर्थिक क्रांति का सबसे सीधा लाभ अयोध्या के छोटे व्यापारियों को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन दुकानदारों की औसत कमाई पहले मात्र 400 से 500 रुपये प्रतिदिन थी, वह अब बढ़कर 2,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास की संपत्तियों (Real Estate) की कीमतों में 5 से 10 गुना तक का जबरदस्त उछाल आया है। कनेक्टिविटी बेहतर होने और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने से निवेश की गति और तेज हो गई है। आईआईएम की यह स्टडी स्पष्ट करती है कि अयोध्या का मॉडल अब देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए ‘इकॉनमिक ब्लूप्रिंट’ का काम करेगा।
पोरसा में सराफा व्यापारी के बैग से कटकर निकले डेढ़ लाख, सीसीटीवी में दो संदिग्ध, UP के पिनाहट में दबिश

मुरैना । मुरैना के पोरसा कस्बे में सराफा व्यापारी के बैग से डेढ़ लाख रुपए चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कलकत्ता के दासपुर निवासी 38 वर्षीय सराफा व्यापारी शेख शाहरुल, जो लंबे समय से मुरैना में रहकर गहने बनाने का काम कर रहे हैं, शनिवार को पोरसा कस्बे में एक सराफा दुकान से पेमेंट लेकर वापस मुरैना लौट रहे थे। बताया गया है कि वे पोरसा के संतोष वर्मा की दुकान से डेढ़ लाख रुपए लेकर यात्री बस में सवार होने ही लगे थे कि तभी पीछे से दो लोग भी बस में चढ़े। इसी दौरान बदमाशों ने व्यापारी के बैग की चैन काटकर उसमें रखे 1.5 लाख रुपए निकाल लिए और घटनास्थल से फरार हो गए। घटना की जानकारी होते ही व्यापारी ने तुरंत बस से उतरकर पोरसा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पोरसा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए। दोनों की पहचान व्यापारी ने भी की है। CCTV फुटेज में दिख रहा है कि आरोपी शातिराना ढंग से बैग की चैन काटते हैं और रुपए निकालकर मौके से भागते हैं। यह वारदात एक ऐसे समय में हुई जब व्यापारी बस में चढ़ रहे थे, इसलिए बदमाशों को पुलिस ने “फुर्तीला और योजनाबद्ध” बताया है। एसडीओपी रवि भदौरिया ने बताया कि पोरसा में सराफा व्यापारियों से वसूली के दौरान यह घटना हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोरसा से लगे उत्तर प्रदेश के पिनाहट इलाके में दबिश शुरू कर दी है। पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में विभिन्न जगहों के CCTV फुटेज भी खंगाल रही है और स्थानीय स्तर पर पूछताछ भी की जा रही है। मामला बढ़ता देख व्यापारी और भी सावधान दिखे। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से मुरैना में सराफा व्यापारियों के लिए गहने बनाने का काम कर रहे हैं। इसी काम के भुगतान के लिए वह शनिवार को पोरसा पहुंचे थे और शाम करीब 4 बजे पैसा लेकर बस में चढ़ रहे थे। लेकिन इसी दौरान यह घटना घटी, जिससे उनके लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी ने संदिग्धों को देखा हो या किसी भी तरह की जानकारी हो तो तुरंत थाने को सूचित करें। साथ ही यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि यात्रा के दौरान नकदी या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को सुरक्षित रखें और बैग की चैन तथा लॉक का विशेष ध्यान रखें। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पिनाहट क्षेत्र में दबिश जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने उत्तर प्रदेश में 1,750 युवाओं को फ्यूचर-टेक स्किल्स में सर्टिफ़िकेट दिया

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड सैमसंग ने राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर, अपने प्रमुख सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) प्रोग्राम के तहत उत्तर प्रदेश में 1,750 छात्रों को सर्टिफ़िकेट देने की घोषणा की, जो राज्य में कंपनी के युवा-कौशल प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सर्टिफ़िकेशन समारोह लखनऊ के सिटी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस में आयोजित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, साथ ही शैक्षणिक नेताओं और कार्यक्रम भागीदारों की उपस्थिति थी। इस बैच के साथ, उत्तर प्रदेश में सैमसंग इनोवेशन कैंपस के तहत प्रशिक्षित छात्रों की कुल संख्या 3,900 हो गई है, जिससे यह कार्यक्रम के तहत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले राज्यों में से एक बन गया है। सैमसंग ने उत्तर प्रदेश में 5,000 युवाओं को कुशल बनाने के अपने इरादे की घोषणा की, जो 20,000 छात्रों को अपस्किल करने के अपने व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है, जो पिछले साल की तुलना में छह गुना ज़्यादा है। यह कार्यक्रम वर्तमान में 10 राज्यों में चल रहा है। लखनऊ पहल के तहत, छात्रों को उभरती हुई टेक्नोलॉजी में इंडस्ट्री के हिसाब से ट्रेनिंग मिली, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (950 छात्र), कोडिंग और प्रोग्रामिंग (550 छात्र), बिग डेटा (150 छात्र), और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (100 छात्र) शामिल हैं। सैमसंग में, हमारा पक्का मानना है कि भारत का भविष्य उसके युवाओं द्वारा तय किया जाएगा। सैमसंग इनोवेशन कैंपस को AI, IoT, या बिग डेटा और कोडिंग जैसे फ्यूचर-टेक कोर्स में हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग देकर शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच के गैप को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लखनऊ में 1,750 छात्रों का सर्टिफिकेशन भारत सरकार के स्किलिंग विज़न को सपोर्ट करने और उत्तर प्रदेश के युवा स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री से जुड़ी क्षमताओं के साथ सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। सैमसंग इनोवेशन कैंपस हमारा फ्लैगशिप प्रोग्राम है जिसे अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने और उन्हें चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए जॉब-रेडी बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है”, सैमसंग साउथवेस्ट एशिया में CSR और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस के हेड शुभम मुखर्जी ने कहा। “जैसे-जैसे उच्च शिक्षा विकसित हो रही है, यह ज़रूरी है कि सीखने के परिणाम उभरती हुई आर्थिक और तकनीकी ज़रूरतों के साथ जुड़े रहें। सैमसंग इनोवेशन कैंपस स्टूडेंट्स को एडवांस्ड डिजिटल विषयों और अनुभवात्मक शिक्षा से परिचित कराकर महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ता है। इस तरह के सहयोग हमारे संस्थानों को मज़बूत करते हैं और उत्तर प्रदेश के लिए ज्ञान-आधारित, प्रतिस्पर्धी कार्यबल बनाने में मदद करते हैं। मैं हमारे युवाओं को सशक्त बनाने और भविष्य के लिए तैयार, कुशल कार्यबल बनाने के राज्य के विज़न को सपोर्ट करने के लिए सैमसंग की प्रतिबद्धता की सराहना करती हूँ। हमारे युवा उत्तर प्रदेश की प्रगति की नींव हैं और भारत की विकास गाथा के पीछे प्रेरक शक्ति हैं”, श्रीमती रजनी तिवारी, माननीय उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा। 2022 में भारत में लॉन्च किया गया, सैमसंग इनोवेशन कैंपस भविष्य की तकनीक की शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है, खासकर कम सेवा वाले और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ESSCI) के सहयोग से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण भागीदारों के माध्यम से लागू किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर, कार्यक्रम में 44% महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है, जो समावेशी और समान स्किलिंग पर सैमसंग के फोकस को दिखाता है। तकनीकी प्रशिक्षण के अलावा, स्टूडेंट्स को कार्यस्थल की तैयारी में सुधार के लिए सॉफ्ट-स्किल्स इनपुट और प्लेसमेंट सहायता मिलती है। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो और सैमसंग DOST जैसी पहलों के साथ, सैमसंग इनोवेशन कैंपस भारत के डिजिटल स्किलिंग लक्ष्यों को मज़बूत करने और विस्तार करने के लिए कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।