यूपी को मिलेगा विकास का नया रफ्तार-पथ, 37 हजार करोड़ की गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना तैयार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने वाली गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में किया जाएगा। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे देश के सबसे बड़े सड़क मार्गों में से एक माना जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। करीब 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना लंबे समय से निर्माणाधीन थी, जिसे तेजी से पूरा करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में बांटकर काम कराया गया। पूरे एक्सप्रेस-वे को चार बड़े पैकेज में विभाजित किया गया, जिससे निर्माण कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ सका और समय पर पूरा किया जा सका। इस पूरी परियोजना में आधुनिक तकनीक और कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया है। निर्माण प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी गई, ताकि काम की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित की जा सकें। चारों हिस्सों में अलग-अलग लंबाई और लागत के पैकेज शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक भाग अपने आप में एक बड़ा निर्माण कार्य रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। इसके किनारे औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों की योजना बनाई गई है, जिससे रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगा। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी घटेगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश को एक मजबूत औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने का अवसर मिलेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क और तेज कनेक्टिविटी से राज्य में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास का एक बड़ा आधार साबित हो सकती है।
योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है। सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है
गाजियाबाद में नकली Liv-52 टैबलेट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, सरगना समेत 5 गिरफ्तार

गाजियाबाद । मुरादनगर पुलिस ने एक बड़े पैमाने पर नकली दवा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर Liv-52 टैबलेट नकली बनाकर बेचने का काम किया। पुलिस ने गिरोह के सरगना मयंक अग्रवाल सहित कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से लगभग 50,000 टैबलेट, डेढ़ हजार खाली डिब्बियां और रैपर बरामद किए गए हैं। पकड़े गए आरोपी और उनकी पहचान डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं:मयंक अग्रवाल (मोदीनगर, तिबड़ा रोड) – सरगनाअनूप गर्ग (दिल्ली, उत्तम नगर)तुषार ठाकुर (नंदग्राम, सुभाषनगर)आकाश ठाकुर (नंदग्राम, हिंडन विहार)नितिन त्यागी (निवाड़ी) पुलिस अब अन्य छह साथियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तार करने वाली टीम को 20,000 रुपये का इनाम भी मिला। गिरोह का काम करने का तरीका जांच में पता चला कि गिरोह ने लगभग चार महीने पहले ही यह नेटवर्क तैयार किया। आरोपियों ने सफेद डिब्बी और ढक्कन मेरठ के एक प्लास्टिक उद्योग से बनवाए, रैपर की प्रिंटिंग प्रेस खैरनगर चौपला में करवाई। टैबलेट सोनीपत की सुबको लेबोरेट्रीज़ से बनवाई जाती थी। सभी सामग्री इकट्ठा कर मुरादनगर निवासी जोनी और फरमान के साथ मिलकर पैक की जाती थी। फर्म में मुकेश कुमार को मालिक बनाया गया था और फरमान जीएसटी की फर्जी बिलिंग तैयार करता था।जिम्मेदारी बांटी गई थी मयंक – सोनीपत की लेबोरेट्री से दवा बनवातातुषार – मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ दवा की सप्लाई और कुरियरिंगनितिन – नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, प्रशासनिक मदद50,000 से अधिक गोलियां सप्लाई जांच में पता चला कि गिरोह ने पिछले चार महीनों में अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली और अन्य जिलों में 50,000 से अधिक नकली टैबलेट सप्लाई की। दवा को बाजार भाव से 20% कम पर मेडिकल स्टोर संचालकों को दिया गया। डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया, “पुलिस ने नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर Liv-52 बनाने वाले गिरोह के पांच आरोपी गिरफ्तार किए। दवाइयों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।”