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COLLECTOR HEARING : अशोकनगर कलेक्टर बोले- तमाशा नहीं चलेगा, स्कूलों की मनमानी फीस और टीकाकरण लापरवाही पर अधिकारियों को फटकारा

COLLECTOR HEARING

HIGHLIGHTS: अशोकनगर में 212 आवेदकों ने उठाए अपने मुद्दे निजी स्कूलों की मनमानी फीस और घटिया गुणवत्ता वाली ड्रेस पर सवाल HPV टीकाकरण में लापरवाही पर अधिकारियों को कलेक्टर की फटकार कलेक्टर ने अधिकारियों को समय पर काम करने के निर्देश दिए जनसुनवाई सामान्य से डेढ़ घंटे लंबी चली   COLLECTOR HEARING : अशोकनगर। कलेक्टर साकेत मालवीय ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई आयोजित की। बता दें कि इस दौरान कुल 212 आवेदक अपनी समस्याओं के साथ पहुंचे और अधिकारियों से समाधान की मांग की। मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी स्कूलों की मनमानी फीस पर सवाल समाजसेवियों ने निजी स्कूलों पर किताबें, कॉपियां और ड्रेस अत्यधिक कीमत पर बेचने का आरोप लगाया। स्कूलों की अपनी बुक स्टोर से खरीदारी करने की मजबूरी और घटिया गुणवत्ता वाली ड्रेस के लिए अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आईं। टीकाकरण में लापरवाही पर फटकार जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने HPV टीकाकरण में लापरवाही बरतने पर जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिसोदिया और टीकाकरण अधिकारी डॉ. रजनी छारी को फटकार लगाई। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा, “आप लोग काम करोगे या तमाशा देखोगे? हम तमाशा देखने नहीं देंगे। राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव: बाला बच्चन ने जताई भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका समस्या समाधान के लिए निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए और स्कूलों में उचित मूल्य पर किताबें व ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। सुबह 11 बजे शुरू हुई यह जनसुनवाई डेढ़ घंटे बढ़कर दोपहर ढाई बजे समाप्त हुई। इस दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों और विभागों की कार्यप्रणाली पर सख्त निर्देश दिए।

Covid vaccine compensation: सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

 Covid vaccine compensation: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि वैक्सीनेशन से किसी भी व्यक्ति को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। इसके लिए सरकार नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी बनाए। नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब इस नीति के तहत अगर किसी व्यक्ति को वैक्सीन या दवा से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, चाहे इसमें किसी की गलती साबित हो या न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम ही जारी रहेगा, अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें साइड इफेक्ट्स के आंकड़े सार्वजनिक होंगे – वैक्सीन से जुड़े मामलों का डेटा समय-समय पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की गलती साबित नहीं होती – मुआवजा नीति लागू होने का मतलब यह नहीं कि सरकार या कोई अन्य अथॉरिटी अपनी गलती मान रही है। याचिकाएं और पृष्ठभूमि यह आदेश रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी। करुण्या गोविंदन मामला: जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लगने के महीने भर बाद करुण्या की मौत हुई। राष्ट्रीय समिति ने मामले की जांच की, लेकिन पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण वैक्सीन को सीधे मौत का कारण नहीं माना गया। 8 साल की रितिका मामला: मई 2021 में पहली डोज के 7 दिन बाद तेज बुखार और ब्रेन ब्लड क्लोटिंग के कारण मौत। परिवार ने RTI के जरिए पता लगाया कि मौत का कारण थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम था। ICMR और NCDC की स्टडी जुलाई 2025 में ICMR और NCDC ने स्टडी जारी की, जिसमें बताया गया कि 18-45 साल के लोगों में अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्टडी में यह भी कहा गया कि गंभीर साइड इफेक्ट के मामले बहुत दुर्लभ (rare) हैं। अन्य संभावित कारणों में जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं। भारत में विकसित कोविड वैक्सीन कोवैक्सिन – भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से विकसित की। कोवीशील्ड – सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से बनाई। सुप्रीम कोर्ट का संदेश सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वैक्सीनेशन सुरक्षित और जरूरी है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि साइड इफेक्ट्स के लिए उचित मुआवजा नीति लागू करे। जनता को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नो-फॉल्ट नीति से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।