WEST BENGAL ELECTION CELEBRATION: BJP की बढ़त पर वाराणसी में जश्न, गंगा घाट पर BJP महिलाओं ने बंटी झालमुड़ी

HIGHLIGHTS: बंगाल रुझानों का असर वाराणसी तक गंगा घाट पर बंगाली महिलाओं का जश्न झालमुड़ी खाकर मनाई खुशी पीएम मोदी के संदेश को किया दोहराया BJP समर्थकों में बढ़ता उत्साह WEST BENGAL ELECTION CELEBRATION: वाराणसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में BJP की बढ़त का असर अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक देखने को मिल रहा है। जैसे-जैसे चुनावी तस्वीर साफ होती जा रही है, पार्टी समर्थकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी इसका जश्न साफ नजर आया। Meta पर बड़ा विवाद: स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड हुए प्राइवेट वीडियो, केन्या की कंपनी से तोड़ा करार गंगा घाट पर खास जश्न वाराणसी के गंगा घाटों पर बंगाली समाज की महिलाओं ने खास अंदाज में जश्न मनाया। सुबह-सुबह घाटों पर पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और उत्साह जताया। यह जश्न केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी खास नजर आया। पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सियासी दावा, ममता बनर्जी बोलीं-शाम तक पलट जाएगा पूरा रिजल्ट झालमुड़ी से मनाया जश्न जहां आमतौर पर बनारस की सुबह कचौड़ी-जलेबी के लिए जानी जाती है, वहीं इस मौके पर महिलाओं ने झालमुड़ी खाकर उत्साह मनाया। उनका कहना था कि जिस तरह नरेंद्र मोदी ने बंगाल में प्रचार के दौरान झालमुड़ी खाकर एक संदेश दिया था, उसी परंपरा को उन्होंने भी दोहराया। साथ ही वाराणसी में रहने वाले बंगाली समाज के लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। केरल में सत्ता वापसी के बाद कांग्रेस के लिए असली परीक्षा-नेतृत्व चयन बना सबसे बड़ा सवाल जीत की ओर बढ़ती BJP जैसे-जैसे रुझान सामने आ रहे हैं, BJP की स्थिति मजबूत होती जा रही है। समर्थकों को भरोसा है कि ये रुझान नतीजों में भी बदलेंगे। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जश्न का माहौल अभी से शुरू हो गया है।
वाराणसी चोरी केस में अजब मोड़: चोरों ने मालिक से ही पूछा, 7 कमरों में ताले क्यों नहीं लगाए?

वाराणसी। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र में हुई 40 लाख रुपये के गहनों की चोरी का मामला अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सभी गहने बरामद कर लिए हैं, लेकिन थाने में हुई एक बातचीत ने सभी को चौंका दिया। गिरफ्तारी और बरामदगी पुलिस के मुताबिक, बजरडीहा इलाके के रहने वाले मो. शारिक जमाल अंसारी और रेयाज अंसारी को सीर गोवर्धन क्षेत्र से गहनों से भरे बैग के साथ पकड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई की जानकारी एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने दी। फेरी लगाकर करते थे रेकी पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे साड़ी बेचने के बहाने कॉलोनियों में फेरी लगाते थे और इसी दौरान घरों की रेकी भी करते थे। गायत्री नगर कॉलोनी में उन्हें एक मकान कई दिनों से बंद मिला, जिसके गेट पर सिर्फ एक छोटा ताला लगा था। इससे उन्हें शक हुआ कि घर खाली है और उन्होंने चोरी की योजना बना ली। मंकी कैप पहनकर दिया वारदात को अंजाम आरोपियों ने मंकी कैप पहनकर घर में घुसकर सात कमरों से कीमती गहने चुरा लिए। चोरी के बाद उन्हें अंदाजा हुआ कि माल की कीमत बहुत ज्यादा है, जिससे वे घबरा गए। गहने बेचने में फंसे चोर चोरी के बाद दोनों आरोपी गहने बेचने के लिए भटकते रहे। वे अलग-अलग जिलों में रिश्तेदारों और परिचितों के यहां छिपते रहे, लेकिन गहनों की बिक्री नहीं कर पाए। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया। थाने में चोरों का ‘शिकायती सवाल’ मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू तब सामने आया जब थाने में चोरों का सामना मकान मालिक से हुआ। आरोपियों ने उल्टा मालिक से ही सवाल कर दिया—“इतने बड़े घर के गेट पर छोटा ताला क्यों लगाया था? सात कमरों में सिर्फ कुंडी बंद थी, ताले क्यों नहीं लगाए?” पुलिस की अपील पुलिस का कहना है कि यह मामला लोगों के लिए सबक भी है कि घर खाली छोड़ते समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम जरूर करें। कुल मिलाकर, यह घटना न सिर्फ पुलिस की सफलता की कहानी है, बल्कि लापरवाही और अपराधियों की चालाकी का अनोखा उदाहरण भी बन गई है।
वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

भोपाल। उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) की पावन धरती पर शुक्रवार शाम को महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन हुआ। महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया। महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया। महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित ‘विक्रम संवत’ की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है। तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही “जय महाकाल” और “सम्राट विक्रमादित्य” के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया। इस अवसर पर मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मंत्रीगण अनिल, राजेश सचान, रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ. विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर रात तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा। वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षणसमारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है। महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी। महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है। महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है। महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में आयोजित “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों की प्रमुख ताकतें एक साथ सामने आएंगी और उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे, जहां व्यावहारिक सहयोग, बाजार विस्तार और साझा पहल पर चर्चा का स्पष्ट स्वरूप दिखाई देगा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमणमुख्यमंत्री डॉ. यादव की वाराणसी यात्रा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां तीर्थ क्षेत्र में विकसित क्राउड फ्लो मैनेजमेंट, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह अनुभव धार्मिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित विकास और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझने का आधार बनेगा। इसके बाद एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन संभावनाएं प्रदर्शित होंगी। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर प्रस्तुत करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का कार्य करेगी। सम्मेलन के मुख्य सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी, जहां मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसी सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। ओडीओपी उत्पादों का आदान-प्रदान स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आएगा। दोपहर पश्चात नेटवर्किंग सत्र में उद्योग जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित होगा, जिससे संभावित निवेश और साझेदारियों को गति मिलेगी और यह सम्मेलन वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जुड़ता हुआ दिखाई देगा। समानांतर सत्रों में सहयोग के व्यावहारिक आयामों को विस्तार दिया जाएगा। संयुक्त शिल्प कार्यशाला में मध्यप्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार उत्तरप्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा पर कार्य करेंगे, जिससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल होगी। टूरिज्म राउंड टेबल मीटिंगटूरिज्म राउंड टेबल में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक संयुक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन सहित प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से पर्यटन को संगठित और विस्तारित स्वरूप देने की दिशा में सहमति बनेगी। विक्रमोत्सव महानाट्य मंचन के स्थल का अवलोकनमुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले महानाट्य विक्रमोत्सव के कार्यक्रम स्थल का मुआयना भी करेंगे।
राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. एस. राजामौली इन दिनों अपनी मेगा बजट फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये के बजट में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल रिलीज के लिए तैयार बताई जा रही है। फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही यह प्रोजेक्ट देश-विदेश में जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है। हैदराबाद स्थित अन्नपूर्णा स्टूडियो में हाल ही में शुरू हुई अत्याधुनिक मोशन कैप्चर फैसिलिटी में फिल्म के कई अहम सीक्वेंस शूट किए गए हैं। राजामौली का कहना है कि यह भारत की सबसे उन्नत मो-कैप लैब में से एक है, जहां हाई-प्रिसिजन टेक्नोलॉजी के जरिए बड़े और जटिल दृश्यों को पहले से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से फिल्माया जा सकता है। इसी दौरान राजामौली ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली: द बिगिनिंग का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय भारत में इतनी एडवांस मोशन कैप्चर तकनीक उपलब्ध होती, तो वे ‘बाहुबली’ और ‘ईगा’ जैसी फिल्मों को और भी बेहतर बना सकते थे। उनके मुताबिक भारत में टैलेंट की कभी कमी नहीं रही, लेकिन विश्वस्तरीय तकनीकी ढांचे की कमी के कारण कई बार विज़न को पूरी क्षमता के साथ पर्दे पर उतारना संभव नहीं हो पाता था। राजामौली ने बताया कि अब हालात बदल रहे हैं। नई तकनीक की बदौलत भारतीय फिल्मकारों को बड़े विजुअल सीक्वेंस के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ‘वाराणसी’ के कुछ जटिल एक्शन और फैंटेसी दृश्यों में इसी मोशन कैप्चर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके परिणाम से टीम बेहद संतुष्ट है। फिल्म की पहली झलक पेरिस के प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल Le Grand Rex में आयोजित एक ट्रेलर फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि ‘वाराणसी’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ चुकी है। पोस्टर्स में महेश बाबू का ‘रुद्र’, पृथ्वीराज का ‘कुंभ’ और प्रियंका का ‘मंदाकिनी’ अवतार पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। राजामौली का मानना है कि नई तकनीक और बड़े विज़न का यह संगम भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर ले जाएगा—और शायद यही वजह है कि वे आज भी मानते हैं, “बाहुबली को मैं और बेहतर बना सकता था।”
ENTERTAINMENT NEWS: निक जोनस ने पहना मंगलसूत्र, प्रियंका चोपड़ा की फिल्म ‘द ब्लफ’ का किया स्टाइलिश प्रमोशन, फैंस बोले जीजू अव्वल नंबर

ENTERTAINMENT NEWS: नई दिल्ली । प्रियंका चोपड़ा के पति और पॉप सिंगर Nick Jonas भारत में हमेशा ही फैंस के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। लेकिन अब उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिसने भारतीय फैंस का दिल जीत लिया। निक का हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें उनके हाथ में मंगलसूत्र ब्रेसलेट नजर आ रहा है। भारतीय ट्रेडिशन फॉलो करने वाले निक ने इसे पहनकर फैंस को अपने देसी अंदाज से दीवाना बना दिया है। निक ने किया प्रियंका का प्रमोशन वीडियो में निक अपनी पत्नी Priyanka Chopra Jonas की फिल्म द ब्लफ का प्रमोशन कर रहे हैं। वीडियो में वह कहते हैं दोस्तों प्रियंका की फिल्म द ब्लफ का प्रीमियर अमेज़न प्राइम पर है। यह शानदार है। मैंने इसे दो बार देखा है। उनके किरदार का नाम ब्लडी एम है इसलिए मैं ब्लडी मैरी बनाऊंगा। इसके बाद निक कॉकटेल बनाते हैं और प्रियंका को सर्व करते हैं। प्रियंका भी इसका स्वाद चखकर कहते हैं आपकी बेस्ट रेसिपी है।” फैंस के रिएक्शन निक का मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहनना फैंस की नजर से नहीं बचा। सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। एक फैन ने लिखा निक ने मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहना है यार। किसी ने लिखा निक जीजू बेस्ट हैं। वहीं एक ने मज़ाकिया अंदाज में लिखा अगर आपने नोटिस किया कि निक ने मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहना है तो देखें निक ग्रीन फॉरेस्ट हैं।” प्रियंका की फिल्म द ब्लफ द ब्लफ एक एक्शन-एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है। फिल्म में प्रियंका के अलावा कार्ल इसमैल क्रूज और साफिया जैसे कलाकार भी अहम किरदार निभा रहे हैं। इसे Frank E Flowers ने डायरेक्ट किया है। फिल्म का प्रीमियर 25 फरवरी 2026 को Amazon Prime Video पर होगा। प्रियंका की भारतीय फिल्म वापसी प्रियंका चोपड़ा लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। वह एसएस राजामौली की फिल्म वाराणसी में नजर आएंगी जिसमें Mahesh Babu उनके साथ लीड रोल में हैं। यह दोनों की पहली फिल्म है और एसएस राजामौली के साथ भी प्रियंका की यह पहली मूवी है। फैंस को इस बड़ी फिल्म का बेसब्री से इंतजार है। लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में प्रियंका का पिछला बॉलीवुड प्रोजेक्ट द स्काई इज़ पिंक (2019) था। वहीं 2020 में उन्होंने Netflix की फिल्म द व्हाइट टाइगर में नजर आई थीं। अब वाराणसी के जरिए वह फिर से भारतीय सिनेमा में अपनी धमाकेदार वापसी करने जा रही हैं।
Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत

जबलपुर। रंगों के महापर्व होली पर घर लौटने और धार्मिक स्थलों पर रंगोत्सव मनाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर से दो प्रमुख दिशाओंअयोध्या और दिल्लीके लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। ये दोनों स्पेशल ट्रेनें 2 से 11 मार्च के बीच सप्ताह में एक दिन संचालित होंगी और दो-दो फेरे लगाएंगी। इनके लिए आरक्षण भी शुरू कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ गई है। पहली स्पेशल ट्रेन जबलपुर-अयोध्या धाम के बीच चलेगी। ट्रेन क्रमांक 01705 तीन और 10 मार्च को शाम 7.40 बजे जबलपुर जंक्शन से रवाना होगी। यह सिहोरा रोड, कटनी जंक्शन, मैहर, सतना, मानिकपुर, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहरते हुए मध्यरात्रि 2.15 बजे प्रयागराज छिवकी, सुबह 7.05 बजे वाराणसी और सुबह 11.25 बजे अयोध्या धाम पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01706 चार और 11 मार्च को दोपहर 1.30 बजे अयोध्या धाम से चलकर अगले दिन सुबह 6.45 बजे जबलपुर पहुंचेगी। इस ट्रेन में दो सेकेंड एसी, पांच थर्ड एसी, आठ स्लीपर और दो एसएलआरडी कोच रहेंगे। दूसरी स्पेशल ट्रेन जबलपुर से हजरत निजामुद्दीन दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। ट्रेन क्रमांक 01701 दो और नौ मार्च को रात 8.20 बजे जबलपुर से रवाना होगी। यह कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और कोशी कला होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01702 तीन और 10 मार्च को अपराह्न 3.45 बजे निजामुद्दीन से चलकर अगले दिन सुबह 9.30 बजे जबलपुर पहुंचेगी। 24 कोच वाली इस ट्रेन में चार जनरल, नौ स्लीपर, छह थर्ड एसी, दो सेकेंड एसी और एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा। होली के दौरान मथुरा और काशी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह ट्रेनें बड़ी सुविधा साबित होंगी। नियमित ट्रेनों में सीटों की कमी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है, ऐसे में इन स्पेशल ट्रेनों से भीड़ का दबाव कम होगा। अयोध्या स्पेशल ट्रेन के मिर्जापुर ठहराव से विंध्याचल धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा रीवा-भोपाल-दानापुर रूट पर भी विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रानी कमलापति से रीवा और दानापुर के लिए सुपरफास्ट एवं स्पेशल ट्रेनों की तिथियां घोषित कर दी गई हैं, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश-बिहार के बीच यात्रा करने वालों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। रेल प्रशासन का मानना है कि इन स्पेशल ट्रेनों से न केवल त्योहार के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। होली के रंगों के बीच सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। यात्रियों से समय पर आरक्षण कराने और निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।
महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी

नई दिल्ली । देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव महाशिवरात्रि पर इस साल 12 दुर्लभ योग बनेंगे। तीन सौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब दस से अधिक योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है, इसलिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक खुला रहेगा। 15 फरवरी को भोर सवा दो बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात आरती के बाद बंद होंगे। 14 से 17 फरवरी तक स्पर्श और सुगम दर्शन पर रोक रहेगी। इस बार के 12 योगप्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव। इससे पहले 2024 में शिवरात्रि पर 11 योग बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर सृष्टि में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आदियोगी ने पार्वती के साथ गृहस्थ लीला रची थी। ज्योतिषीय लाभज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, तीन सौ वर्षों में दूसरी बार बनने वाले ये योग मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी होंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी शाम 05:35 बजे समाप्त होगी। योगों का क्रम:-सुबह 05:45 से शिवयोग06:43–09:37 सर्वार्थसिद्धि योग11:19–11:23 प्रीति योग12:17–13:54 आयुष्मान योग17:07–17:53 सौभाग्य योग19:47–20:34 शोभन योग20:54–22:02 साध्य योग22:42–23:58 शुक्ल योग00:54–02:54 राज योग02:57–05:53 ध्रुव योग प्रहरवार अभिषेक और मंत्र जप:-प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक, ऊँ ह्रीं ईशान्य नमःद्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, ऊँ ह्रीं अघोराय नमःतृतीय प्रहर: देशी घी से अभिषेक, ऊँ ह्रीं वामदेवाय नमःचतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक, ऊँ ह्रीं सध्योजाताय नमः तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ:-मेष: वित्तीय लाभ, पदोन्नति, नेतृत्व क्षमता में विकासमिथुन: पेशेवर जीवन में ऊँचाई, बड़े व्यापारिक अवसरसिंह: धनागमन, अचल संपत्ति में वृद्धि काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती का क्रम:-मंगला आरती: 02:15–03:15; 03:30 से दर्शनमध्याह्न भोग आरती: 11:40–12:20 चारों प्रहर की आरती:-प्रथम प्रहर: 21:00–00:30द्वितीय प्रहर: 01:30–02:30तृतीय प्रहर: 03:30–04:30चतुर्थ प्रहर: 05:00–06:15 इस बार की महाशिवरात्रि अपने दुर्लभ 12 योगों और विशेष प्रहरवार आरती के कारण श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।