POCSO केस का साया, इंदौर में वेदांत तिवारी पर नया विवाद, पुलिस जांच में जुटी

इंदौर में राऊ थाना क्षेत्र के एक विवादित मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। जानकारी के अनुसार, वेदांत तिवारी और उनके दो साथियों पर रविवार की अलसुबह प्रखर और नयन नामक युवकों के साथ मारपीट का आरोप लगा। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर शिकायत दर्ज कराई और मामला अब पुलिस की जांच के दायरे में है। सूत्रों का कहना है कि यह कोई नया मामला नहीं है। वेदांत तिवारी पहले भी विवादों में रह चुके हैं। अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में उन्होंने पहले एक नाबालिग लड़की के खिलाफ POCSO एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण का सामना किया था। उस समय आरोप था कि कोचिंग से लौट रही 13 वर्षीय बच्ची के साथ वेदांत द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया, लेकिन आगे की कार्रवाई की जानकारी स्पष्ट नहीं है। परिवार का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई। हालिया विवाद में दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। प्रखर और नयन के परिवार का कहना है कि उनके बच्चों को चोटें आई हैं और वेदांत द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। दूसरी ओर, वेदांत ने भी आरोप लगाया कि उनके वाहन पर पथराव किया गया और उनके साथ मारपीट की गई। इस पर उन्होंने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पूर्व मामलों का प्रभाव मौजूदा विवादों पर भी पड़ सकता है। वेदांत तिवारी का नाम पहले से ही POCSO केस में दर्ज होने के कारण समाज और मीडिया में संवेदनशील माना जाता है। इस कारण से हालिया मारपीट का मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाद के बढ़ने से इलाके में तनाव की स्थिति बन सकती है। इसलिए पुलिस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी लगातार मामले की निगरानी कर रहे हैं और सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि कैसे पूर्व विवादों का असर नए मामलों पर पड़ता है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या राजनीतिक प्रभाव या सामाजिक दबाव मामलों की जांच और निष्पक्षता को प्रभावित करता है या नहीं। वर्तमान में मामला जांच के दायरे में है और जैसे ही पुलिस जांच पूरी होती है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। तब तक दोनों पक्षों की आपसी शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह विवाद सुर्खियों में बना रहेगा।
इंदौर में भाजपा नेता की गुंडागर्दी: युवकों पर जानलेवा हमला, स्कॉर्पियो में तोड़फोड़; 20 दिन पुराने समझौते के बाद फिर भड़का विवाद

इंदौर । इंदौर के राऊ इलाके में रविवार सुबह सत्ताधारी दल से जुड़े एक नेता की दबंगई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। भाजपा युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी पर अपने साथियों के साथ मिलकर दो युवकों पर जानलेवा हमला करने और उनकी कार में जमकर तोड़फोड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस हमले में दोनों युवक बुरी तरह घायल हो गए जिन्हें गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान भाजपा युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष वेदांत तिवारी के रूप में हुई है। पीड़ित युवकों के नाम प्रखर शर्मा और नयन बाफना बताए गए हैं जो सुदामा नगर के निवासी हैं। रविवार सुबह दोनों युवक कैट रोड स्थित एक कैफे से चाय पीकर अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से लौट रहे थे। इसी दौरान वेदांत तिवारी अपने साथी समीर शर्मा और आदित्य के साथ उनका पीछा करने लगा। बताया जा रहा है कि रास्ते में आरोपियों ने स्कॉर्पियो को जबरन रोका और युवकों पर हमला बोल दिया। लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से की गई इस मारपीट में दोनों युवकों के सिर में गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं आरोपियों ने स्कॉर्पियो के शीशे भी तोड़ दिए जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से वर्चस्व को लेकर रंजिश चली आ रही है। यह पहला मौका नहीं है जब इस विवाद ने हिंसक रूप लिया हो। करीब 20 दिन पहले महूनाका चौराहे पर भी वेदांत तिवारी और उसके साथियों ने इन युवकों को घेरने की कोशिश की थी। उस समय युवक किसी तरह अपनी कार भगा कर मौके से निकलने में सफल रहे थे। मामला छत्रीपुरा थाने तक पहुंचा था जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसी समझौते के बाद आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए जिसके चलते उन्होंने दोबारा हमला करने से भी परहेज नहीं किया। रविवार की घटना के बाद जब घायल युवक राऊ थाने पहुंचे तो वहां भी हंगामे की स्थिति बन गई। आरोप है कि सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं के दबाव के चलते पुलिस शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने से बचती रही। हालांकि जब थाने पर भीड़ जुट गई और मामला तूल पकड़ने लगा तब पुलिस को मजबूरन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। पुलिस ने तोड़फोड़ मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल घायलों का इलाज निजी अस्पताल में जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर इंदौर में राजनीतिक रसूख और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो शायद यह हमला टल सकता था।