बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी की रिकवरी की कोशिश तेज, मेटल शेयरों में जोरदार खरीदारी से रफ्तार बढ़ी

नई दिल्ली । शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरे माहौल के साथ हुई, जहां शुरुआती गिरावट के बाद निफ्टी ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली के दबाव ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 120 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी हल्की कमजोरी के साथ खुलकर दिन के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आया। बाजार खुलते ही निफ्टी ने 23500 के स्तर को छूने की कोशिश की, लेकिन इस स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस के कारण इंडेक्स बार-बार नीचे खिसकता दिखा और 23400 के नीचे भी फिसल गया। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान निफ्टी ने कई बार रिकवरी की कोशिश की और 23500 के स्तर को दोबारा टेस्ट किया, लेकिन हर बार ऊपरी स्तरों पर बिकवाली हावी रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 23500 का स्तर फिलहाल एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है, जिसे पार करने के लिए मजबूत वॉल्यूम और किसी सकारात्मक ट्रिगर की जरूरत होगी। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो शॉर्ट कवरिंग के चलते निफ्टी में तेजी तेज हो सकती है और यह 23800 के स्तर तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल बाजार 23300 के सपोर्ट के ऊपर टिके रहने की कोशिश कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि अल्पकालिक कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है। इस पूरे उतार-चढ़ाव के बीच सबसे मजबूत प्रदर्शन मेटल सेक्टर में देखने को मिला, जहां निवेशकों की भारी खरीदारी ने इंडेक्स को मजबूती दी। निफ्टी मेटल इंडेक्स में करीब 1.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसके सभी प्रमुख घटक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। खासतौर पर Hindustan Zinc Limited में लगभग 5 प्रतिशत की तेज उछाल देखने को मिली, जिसने सेक्टर को लीड किया। इसके अलावा Hindustan Copper Limited में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जबकि Vedanta Limited, National Aluminium Company Limited और Hindalco Industries Limited जैसे शेयरों में भी 2 से 4 प्रतिशत तक की मजबूती देखने को मिली। मेटल शेयरों में इस तेजी के पीछे वैश्विक कमोडिटी कीमतों में सुधार और बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात शुल्क में बदलाव के बाद मेटल सेक्टर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जिससे इस सेगमेंट में खरीदारी का दबाव बढ़ा है। इसी बीच कुछ अन्य सेक्टर्स में भी अलग-अलग मूवमेंट देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स में रिकवरी दिखी तो कुछ में दबाव बना रहा। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा की तलाश में है और निफ्टी 23300 से 23500 के बीच एक सीमित दायरे में झूलता नजर आ रहा है। आने वाले सत्रों में यह देखना अहम होगा कि क्या निफ्टी रेजिस्टेंस तोड़कर नई तेजी की शुरुआत कर पाता है या फिर बाजार कंसोलिडेशन के चरण में ही बना रहता है।
जेपी एसोसिएट्स विवाद में वेदांता की हार, अदाणी के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ..

नई दिल्ली।भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक बड़े और जटिल दिवाला मामले में महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहां जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में वेदांता लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। इस फैसले के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता लगभग साफ हो गया है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया अध्याय शुरू हो गया है। मामले में वेदांता लिमिटेड ने उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें कर्जदाताओं की समिति ने अदाणी एंटरप्राइजेज के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। वेदांता का दावा था कि उसकी वित्तीय पेशकश अधिक आकर्षक थी और उसने बेहतर मूल्य की बोली लगाई थी। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में उसे उचित महत्व नहीं दिया गया। हालांकि, अपीलेट ट्रिब्यूनल ने वेदांता की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कर्जदाताओं की समिति द्वारा लिया गया निर्णय उनके व्यावसायिक विवेक पर आधारित था, जिसमें केवल बोली की राशि ही नहीं बल्कि अन्य कई कारकों को भी ध्यान में रखा गया था। अदालत ने यह भी पाया कि पूरी दिवाला प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता नहीं हुई है। इस मामले में पहले निचली अदालत ने भी अदाणी एंटरप्राइजेज के 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके बाद वेदांता ने लगातार कानूनी चुनौती दी। लेकिन विभिन्न स्तरों पर राहत न मिलने के बाद अब स्थिति लगभग स्पष्ट हो गई है। कर्जदाताओं की समिति ने इस पूरे मामले में केवल वित्तीय आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि नकद भुगतान क्षमता, योजना को लागू करने की क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे कई पहलुओं पर विचार किया। इसी आधार पर अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को प्राथमिकता दी गई, जिसे सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ था। जयप्रकाश एसोसिएट्स पर भारी कर्ज का बोझ लंबे समय से बना हुआ है, जिससे कंपनी दिवाला प्रक्रिया में शामिल हो गई थी। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई बड़े क्षेत्र की संपत्तियां मौजूद हैं, जिनका मूल्य काफी अधिक माना जाता है। इसी कारण इस मामले में कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। वेदांता का कहना था कि उसकी पेशकश कुल मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दिवाला प्रक्रिया में केवल उच्च बोली ही निर्णायक कारक नहीं होती। इसके साथ ही यह भी माना गया कि समिति ने पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना मजबूत हो गई है। यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में दिवाला समाधान प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानूनी और आर्थिक दोनों पहलुओं का गहरा असर देखने को मिला है। कुल मिलाकर यह निर्णय न केवल एक बड़े कॉर्पोरेट विवाद का अंत करीब लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दिवाला मामलों में केवल वित्तीय आंकड़े ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक रणनीति और कार्यान्वयन क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है।