उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बेलगावी में श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर के राजगोपुरम और महाकुंभाभिषेकम समारोह का उद्घाटन किया

नई दिल्ली :कर्नाटक के बेलगावी जिले के यदुर स्थित श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेकम समारोह का उद्घाटन उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर में एकत्रित श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए हिंदू चेतना, भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू चेतना केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन और भारत की उस आध्यात्मिक दृष्टि पर बल दिया जो प्रकृति और प्रत्येक मनुष्य में दिव्यता के दर्शन करती है। उन्होंने वीर-शैव लिंगायत परंपरा के आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया और बताया कि मठों और मंदिरों ने सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता के मूल्यों को पोषित करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कदासिद्धेश्वर स्वामीजी की प्रेरणा और आध्यात्मिक दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय के साथ ओझल हो चुके इस पवित्र स्थल का पुनरुद्धार किया। उन्होंने अटूट विश्वास के साथ कहा कि सनातन धर्म समय द्वारा परीक्षा ली जा सकती है, लेकिन इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने श्री कदासिद्धेश्वर मठ के उत्तराधिकारियों के अथक प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने दैनिक पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और जीर्णोद्धार कार्यों को लगातार बनाए रखा। उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित “विकास भी, विरासत भी” के विजन को उद्धृत करते हुए कहा कि भारत का विकास और उसकी विरासत साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने बताया कि आज का भारत तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जबकि अपनी सभ्यतागत मूल्यों और लोकाचार में उसकी जड़ें उतनी ही गहरी हैं। राजगोपुरम के उद्घाटन को उपराष्ट्रपति ने आस्था के पुनर्मूल्यांकन और परंपरा की निरंतरता के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार केवल वास्तुकला का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता को पुनर्स्थापित करने का माध्यम है। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, कर्नाटक सरकार के भारी एवं मध्यम उद्योग और अवसंरचना मंत्री श्री एम. बी. पाटिल, श्री श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी, राज्यसभा सांसद श्री ईरन्ना कडाडी, धर्मगुरु और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी समारोह में शामिल हुए, जिन्होंने उद्घाटन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पवित्र स्थल के महत्व को महसूस किया। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की सनातन परंपरा, आध्यात्मिक दृष्टि और सांस्कृतिक समृद्धि का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थलों और धार्मिक संस्थाओं का पुनरुद्धार समाज में आत्मविश्वास और चेतना को मजबूत करता है। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं और पीठाधीश्वरों को अपने अनुभव और मार्गदर्शन साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। समारोह के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण में डूब गया, जिसमें राजगोपुरम का उद्घाटन और महाकुंभाभिषेकम विशेष आकर्षण रहे।
उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है। स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।
भारतीय जनता पार्टी एससी मोर्चा की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित, मध्यप्रदेश में कई नए चेहरे

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा (मध्यप्रदेश) की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से पदाधिकारियों की सूची जारी की। संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। 8 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री नियुक्तजारी सूची के अनुसार सत्यप्रकाश सखवार, मोहिनी शाक्यवार, गगन खटीक, धर्मेंद्र आर्य, सत्यनारायण खोईवाल, भगवती प्रसाद शिंदे, प्रवीण मेश्राम और अमित कछवाह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा गणपत डाबी, रामस्वरूप शुक्रवारे और कृष्णा चौधरी को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बसपा से विधायक रहे सत्यप्रकाश सखवार को जिम्मेदारीभाजपा ने सत्यप्रकाश सखवार को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। वे 2013 में मुरैना जिले की अंबाह सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के दौरान वे कांग्रेस में शामिल हुए और 2020 के उपचुनाव में मैदान में उतरे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। अब उन्हें एससी मोर्चा में अहम जिम्मेदारी दी गई है। कोषाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री भी नियुक्तअंकित थेप्ते को कोषाध्यक्ष और मुकेश कुमार को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुखलाल पवार, नितेश नरवले, कन्हैया लाल चौहान, संजय दायमा, डॉ. जगदीश चौहान, महेंद्र कुमार अहिरवार, सौरभ बावरिया और सीताराम साकेत को प्रदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। मीडिया, सोशल मीडिया और आईटी टीम गठितसंगठन को डिजिटल और मीडिया स्तर पर मजबूत करने के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। संतोष बराड़ा को प्रशिक्षण प्रभारी, गोपाल जाटव को सह-प्रशिक्षण प्रभारी और अमर ऊंटवाल को प्रदेश कार्यालय मंत्री बनाया गया है। सुंदरलाल वर्मा को मीडिया प्रभारी तथा कमल अहिरवार और महेश बसवाल को सह मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। डॉ. नितिन डेहरिया को सोशल मीडिया प्रभारी और गिरिजा जाटव व हिमांशु मालवीय को सह सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। नीति एवं शोध प्रकोष्ठ में प्रवीण चावला को प्रभारी तथा किरण सिंह सूर्यवंशी और लक्ष्मीदास चौधरी को सह प्रभारी बनाया गया है। आईटी विभाग में कपिल अंजने संयोजक, जबकि राजेश सिंह और दीपमाला सोलंकर सह संयोजक नियुक्त हुए हैं। नई कार्यकारिणी के जरिए भाजपा एससी मोर्चा ने संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया है।