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संघर्ष से सफलता तक: प्रफुल हिंगे की कहानी और हार्दिक पांड्या का खास मैसेज

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के 21वें मैच में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के युवा तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने अपने डेब्यू से ही क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी। अपने पहले ही मैच में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 34 रन देकर 4 विकेट हासिल किए, जिसमें पहले ही ओवर में 3 विकेट लेकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। पिता का वादा बना करियर की नींवप्रफुल्ल हिंगे की कहानी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि संघर्ष और परिवार के सपोर्ट की मिसाल है। उन्होंने बताया कि जब वह छठी क्लास में थे, तब उन्होंने अपने पिता से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई थी। उस समय उनके पिता ने उन्हें तुरंत मैदान में उतारने के बजाय एक साल रुकने को कहा, लेकिन साथ ही उन्हें टेनिस बॉल से खेलने के लिए एक बैट दिलाया। यही छोटा सा कदम आगे चलकर उनके बड़े क्रिकेटर बनने की नींव बन गया। समर कैंप से शुरू हुआ असली सफरएक साल बाद उनके पिता ने उनका एडमिशन एक समर कैंप में कराया, जहां से उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। प्रफुल्ल ने बताया कि शुरुआत में उन्हें सीजन बॉल क्रिकेट की समझ नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने खुद को धीरे-धीरे तैयार किया।पिता ने साफ कहा था कि पढ़ाई, स्कूल और क्रिकेट—तीनों को साथ संभालना होगा, और प्रफुल्ल ने यह चुनौती स्वीकार की। चोट और MRF अकादमी का कठिन दौरप्रफुल्ल के करियर में मुश्किल समय भी आया, जब MRF पेस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उनकी पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आई। करीब 7–8 महीने का समय उनके लिए बेहद कठिन रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने अंडर-23 क्रिकेट में 25 से ज्यादा विकेट लेकर जोरदार वापसी की। ऑस्ट्रेलिया ट्रेनिंग और बड़े गेंदबाजों से सीखMRF अकादमी के जरिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया में ट्रेनिंग का मौका मिला, जहां उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड और झाय रिचर्डसन से मुलाकात की। वहां उन्होंने फिटनेस, डाइट और मैच मैनेजमेंट को लेकर कई अहम बातें सीखीं। हार्दिक पांड्या से खास पलविजय हजारे ट्रॉफी के दौरान हार्दिक पांड्या के खिलाफ गेंदबाजी करते समय प्रफुल्ल शुरुआत में घबराए हुए थे, लेकिन पहली गेंद के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। हार्दिक ने भी उनकी गेंदबाजी की तारीफ करते हुए कहा था “बहुत बढ़िया गेंदबाजी।”यह बात उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।  IPL में बड़ा सपनाप्रफुल्ल हिंगे का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ आईपीएल खेलना नहीं बल्कि अपनी टीम को चैंपियन बनाना है। इसके अलावा वह बेस्ट फील्डर बनने और सबसे शानदार कैच लेने का सपना भी देखते हैं।

भारत को पहली टेस्ट जीत दिलाने वाले कप्तान, जिनके नाम पर खेली जाती है विजय हजारे ट्रॉफी

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे दिग्गज खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया। उन्हीं महान खिलाड़ियों में से एक थे Vijay Hazare। विजय सैमुअल हजारे को भारत के शुरुआती दौर के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में गिना जाता है। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को मजबूती दी। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्रतिष्ठित वनडे टूर्नामेंट का नाम उनके नाम पर रखा गया है, जिसे आज Vijay Hazare Trophy के नाम से जाना जाता है। सांगली में जन्म, बचपन से ही क्रिकेट का जुनूनविजय हजारे का जन्म 11 मार्च 1915 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का बेहद शौक था। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिन गेंदबाज Clarrie Grimmett से भी कोचिंग लेने का मौका मिला था। उस दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को निखारा और जल्द ही घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली। फर्स्ट क्लास क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआतविजय हजारे ने 1934-35 में अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर की शुरुआत की। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 1946 में इंग्लैंड के खिलाफ लंदन के ऐतिहासिक मैदान Lord’s Cricket Ground पर अपना अंतरराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू किया। उस समय उनकी उम्र 31 साल थी। अपने पहले टेस्ट मैच में उन्होंने दोनों पारियों में 31 और 34 रन बनाकर अपने करियर की ठोस शुरुआत की। कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड किए अपने नामविजय हजारे भारतीय क्रिकेट के शुरुआती रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे। वह भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने। इतना ही नहीं, उन्होंने जनवरी 1948 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए टेस्ट मैच में दोनों पारियों में शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उस मैच में उन्होंने 116 और 145 रन की शानदार पारियां खेलीं। इसके अलावा वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी बने। यह उपलब्धि उन्होंने जनवरी 1940 में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए बड़ौदा के खिलाफ हासिल की थी। 🇮🇳 आजाद भारत को दिलाई पहली टेस्ट जीतविजय हजारे सिर्फ एक महान बल्लेबाज ही नहीं बल्कि सफल कप्तान भी थे। उनकी कप्तानी में भारत ने आजाद होने के बाद पहली बार टेस्ट क्रिकेट में जीत हासिल की थी। यह ऐतिहासिक मुकाबला 1952 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया था, जिसमें भारत ने पारी और 8 रन से शानदार जीत दर्ज की थी। यह जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। शानदार रहा क्रिकेट करियरविजय हजारे का अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत की ओर से 30 टेस्ट मैच खेले, जिनकी 52 पारियों में 47.65 की औसत से 2,192 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 7 शतक और 9 अर्धशतक निकले। वहीं प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने कुल 238 मैच खेले और 58.38 की शानदार औसत से 18,740 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 60 शतक और 73 अर्धशतक भी जड़े। उस दौर में इतनी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद खास माना जाता था। पद्म श्री से हुए सम्मानितभारतीय क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें 1960 में Padma Shri से सम्मानित किया। इसके अलावा साल 1996 में उन्हें भारतीय क्रिकेट का सर्वोच्च सम्मान C. K. Nayudu Lifetime Achievement Award भी दिया गया।  उनके नाम पर खेली जाती है विजय हजारे ट्रॉफीभारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को अमर बनाने के लिए 2002-03 में घरेलू वनडे टूर्नामेंट की शुरुआत की गई, जिसका नाम Vijay Hazare Trophy रखा गया। इस टूर्नामेंट में रणजी ट्रॉफी की सभी टीमें हिस्सा लेती हैं और यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण घरेलू वनडे टूर्नामेंटों में से एक माना जाता है।