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थलपति विजय बने मुख्यमंत्री, 9 मंत्रियों के साथ ली शपथ, 29 वर्षीय कीर्तना बनी सबसे युवा मंत्री, राज्य की राजनीति में नए युग की शुरुआत

नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है, जहां लोकप्रिय अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में नई सरकार की शुरुआत कर दी है। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता और चुनावी परिणामों के बाद आखिरकार सत्ता का समीकरण साफ हुआ और नई सरकार का गठन औपचारिक रूप से पूरा हुआ। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां जनता के समर्थन से एक फिल्मी सितारे ने शासन की कमान संभाली है। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में सुबह 10 बजे आयोजित भव्य समारोह में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। पूरा वातावरण उत्साह और राजनीतिक बदलाव की भावना से भरा हुआ था। थलपति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उनके साथ उनकी पार्टी के 9 विधायकों ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। यह नई कैबिनेट अनुभव और युवा नेतृत्व के संतुलन के रूप में देखी जा रही है, जिसमें दोनों पीढ़ियों की भागीदारी स्पष्ट नजर आती है। इस सरकार में सबसे अधिक चर्चा 29 वर्षीय कीर्तना को लेकर हो रही है, जो इस कैबिनेट की सबसे युवा मंत्री बनी हैं। उनकी नियुक्ति को नई पीढ़ी के नेतृत्व को बढ़ावा देने और प्रशासन में युवा सोच को शामिल करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम यह दर्शाता है कि नई सरकार बदलाव और नए दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। शपथ ग्रहण समारोह में कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। विभिन्न दलों के नेताओं की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि यह सत्ता परिवर्तन केवल राज्य स्तर की घटना नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक प्रभाव रखने वाला बदलाव है। समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित रखा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। विजय के इस नए राजनीतिक सफर को उनके परिवार ने भी भावनात्मक रूप से देखा। उनके करीबी लोगों ने इसे उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ बताया, जहां उन्होंने मनोरंजन की दुनिया से आगे बढ़कर जनता की सेवा की जिम्मेदारी संभाली है। यह बदलाव उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन दोनों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वास मत हासिल करने और प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की होगी। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह सरकार अपने फैसलों और नीतियों के जरिए राज्य की दिशा को किस तरह आगे ले जाती है। तमिलनाडु की राजनीति में यह परिवर्तन केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि एक नई सोच, नए नेतृत्व और नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां जनता के समर्थन से एक नया अध्याय लिखा गया है।

तमिलनाडु पुलिस ने विजय को दी गई CM जैसी सिक्योरिटी रातोंरात ली वापस… जानें इसकी वजह?

चेन्नई। तमिलनाडु पुलिस (Tamil Nadu Police) ने बुधवार (6 मई, 2026) रात को तमिझगा वेत्री कड़गम (Tamizhaga Vetri Kazhagam-TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय (C.Joseph Vijay) को दी गई कड़ी सुरक्षा और उनका काफिला वापस ले लिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बराबर दी जा रही ‘जेड-प्लस’ स्तर की सुरक्षा प्रोटोकॉल को घटाकर अब न्यूनतम कर दिया गया है। क्यों बढ़ाई गई थी सुरक्षा?दरअसल, 4 मई को मतगणना के दौरान ही TVK की भारी जीत के शुरुआती संकेत मिलने लगे थे। इसके कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने विजय के आवास और पार्टी कार्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह सुरक्षा TVK नेता के आवास पर पहुंचने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, उनके रूट बंदोबस्त और अन्य सुरक्षा उपायों को देखकर यह साफ था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाकर सीधे मुख्यमंत्री के स्तर की कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन था तैनात?एक की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय की सुरक्षा की निगरानी के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया गया था। इसके साथ ही, राज्य पुलिस के सिक्योरिटी ब्रांच सीआईडी (CID) के एक दर्जन से अधिक सशस्त्र कमांडो ने सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक ‘एक्सेस कंट्रोल सिस्टम’ भी लगाया गया था। इसके अलावा, पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के दो अन्य अधिकारियों को सीधे खुफिया विभाग के महानिरीक्षक (IG) को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। इन अधिकारियों को अगले आदेश तक चुनाव से जुड़े जरूरी कामों के लिए विशेष ड्यूटी पर रखा गया था। अचानक क्यों वापस ली गई ‘Z-Plus’ सिक्योरिटी?एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा व्यवस्था TVK के वरिष्ठ नेताओं के अनुरोध के बाद ही वापस ली गई है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया, “वे (पार्टी नेता) नहीं चाहते थे कि विजय को ऐसा काफिला या वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल दिया जाए।” इसके बाद विशेष ड्यूटी पर लगाए गए तीनों बड़े अधिकारियों को भी वापस बुला लिया गया है और उन्हें उनकी पुरानी पोस्टिंग पर भेज दिया गया है। ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा रहेगी बरकरारराज्य पुलिस की विशेष सुरक्षा हटने के बाद भी विजय की सुरक्षा में कोई बड़ी चूक नहीं होगी, क्योंकि उनके पास केंद्र सरकार द्वारा दी गई ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा बरकरार रहेगी। जब भी वह कहीं सफर करते हैं या ठहरते हैं, तो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सशस्त्र गार्ड उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अभिनेता से राजनेता बने विजय की सुरक्षा के लिए पार्टी द्वारा रखे गए निजी गार्ड भी तैनात रहते हैं। यात्रा और सार्वजनिक सभाओं के दौरान स्थानीय पुलिस भी जरूरत के हिसाब से जवानों की तैनाती करती है। सरकार बनने पर अभी भी संशयइससे पहले विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव और नए गठजोड़ के तहत अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की और चुनाव पूर्व सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) से संबंध तोड़ लिए। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने द्विध्रुवीय वर्चस्व को तोड़ते हुए टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के दो दिन बाद राज्यपाल कार्यालय से निमंत्रण मिलने पर टीवीके प्रमुख ने लोक भवन में अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें समर्थन देने वाले कांग्रेस विधायकों की सूची सौंपी। हालांकि, लोक भवन के सूत्रों ने संकेत दिया कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय के पास समर्थन होने के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में से 108 सीटें जीतीं, को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। कांग्रेस की पांच सीटों के साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, कुल संख्या 112 हो जाती है। पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ रहे टीवीके प्रमुख को एक सीट से इस्तीफा देना होगा। इससे बहुमत का आंकड़ा घटकर 117 हो जाएगा और टीवीके की सीटों की संख्या 107 रह जाएगी। एक नए राजनीतिक गठजोड़ में, कांग्रेस ने यहां अपनी विधायक दल की बैठक के बाद विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही उसने द्रमुक से अलग होने की भी घोषणा की।

तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला। कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत

नई दिल्ली।  देशभर में चुनावी रुझानों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और अलग-अलग राज्यों से बड़े बदलाव के संकेत सामने आ रहे हैं। इसी बीच Priyanka Chaturvedi ने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा बताया है। उनके मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सियासी दिशा बदलने वाले साबित हो सकते हैं। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन की बढ़त ने वामपंथी गढ़ को हिला दिया है, जो लंबे समय से सत्ता में बना हुआ था। इसे एंटी-इनकंबेंसी और बदलाव की चाह का नतीजा माना जा रहा है। वहीं तमिलनाडु में Vijay की पार्टी TVK ने जबरदस्त एंट्री करते हुए पारंपरिक दलों DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर दी है। यह राज्य की राजनीति में नई शुरुआत और युवा नेतृत्व के उभार के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में Bharatiya Janata Party की मजबूत बढ़त ने सबका ध्यान खींचा है। रुझानों में पार्टी 150 से 200 सीटों के बीच पहुंचती दिख रही है, जो राज्य की राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। वहीं असम और पुडुचेरी में भी बीजेपी और उसके सहयोगियों ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इन नतीजों से साफ है कि देश में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और नई ताकतें उभर रही हैं। जहां एक तरफ पारंपरिक गढ़ कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, वहीं नए नेतृत्व और नई पार्टियां तेजी से जगह बना रही हैं। कुल मिलाकर, 2026 के चुनावी रुझान भारतीय राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं जहां हर राज्य अपनी अलग कहानी लिख रहा है और आने वाले समय में सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।