हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी

नई दिल्ली। Hantavirus Infection को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के मामलों में कई लोगों की मौत के बाद डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग इसे डेंगू, फ्लू या सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बजाद के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के यूरिन, लार और मल के संपर्क से फैलता है। लंबे समय से बंद कमरों, गोदामों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान धूल के जरिए वायरस शरीर में पहुंच सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि असली खतरा तब शुरू होता है जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करने लगता है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, सूखी खांसी और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर सकता है और मरीज को ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे खतरनाक रूप Hantavirus Pulmonary Syndrome माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर गंभीर मामलों में 35 से 40 प्रतिशत तक बताई गई है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि घरों और गोदामों में चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने पहनें तथा बंद कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है
हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस

नई दिल्ली। दुनिया एक बार फिर एक नए स्वास्थ्य संकट की आशंका से जूझ रही है। हंता वायरस के ताज़ा मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप में संक्रमण और मौतों की पुष्टि के बाद यह वायरस फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। WHO की विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरकोव ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस न तो कोविड-19 जैसा है और न ही सामान्य इन्फ्लूएंजा। यह वायरस अलग तरीके से फैलता है और इसकी प्रकृति भी अलग है। अच्छी बात यह है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, जिससे इसका व्यापक प्रसार सीमित रहता है। कैसे शुरू हुआ संक्रमणताजा मामला एक डच झंडे वाले क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जो अटलांटिक और दक्षिणी महासागर के मार्ग से गुजर रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक यात्री में शुरुआती लक्षण दिखे, जिनमें बुखार, सिरदर्द और कमजोरी शामिल थे। बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद दो और मौतों की पुष्टि हुई, जिनमें एक दक्षिण अफ्रीका और दूसरी जर्मनी की महिला यात्री शामिल थी। जहाज पर लगभग 150 लोग सवार थे, जो अर्जेंटीना से यात्रा पर निकले थे। यात्रा के दौरान सेंट हेलेना और अन्य द्वीपों पर कुछ यात्रियों ने उतरकर संपर्क किया, जिससे संक्रमण के फैलाव की आशंका और जांच तेज कर दी गई। किन देशों तक पहुंचा मामलाWHO और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों को अलर्ट किया है, जिनमें शामिल हैं: अर्जेंटीना (जहां से यात्रा शुरू हुई) सेंट हेलेना दक्षिण अफ्रीका नीदरलैंड ब्रिटेन केप वर्डे इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों को भी जानकारी दी गई है क्योंकि इनके नागरिक इस यात्रा से जुड़े हुए थे या संपर्क में आए थे। हंता वायरस कितना खतरनाक हैहंता वायरस को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है।पहला “ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस” जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है और मुख्य रूप से किडनी पर असर डालता है। इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम होती है, लगभग 1% से 15% के बीच। दूसरा और अधिक खतरनाक “न्यू वर्ल्ड हंता वायरस” है, जो अमेरिका में पाया जाता है। यह हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है, जिसमें फेफड़ों में तेजी से तरल भर जाता है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। इसकी मृत्यु दर 35% से 50% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद घातक संक्रमणों में शामिल है। कैसे फैलता है वायरसयह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित धूल या सतहों को सांस के जरिए शरीर में लेने से संक्रमण हो सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका संक्रमण दुर्लभ माना जाता है। क्या कहती हैं स्वास्थ्य एजेंसियांWHO का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और यात्रियों की ट्रैकिंग की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर पहचान और सावधानी से इसके फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।