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शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द

इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जंग और तनाव के बीच शनिवार को नई उम्मीद की किरण दिखी थी. लेकिन अब वह उम्मीद टूट गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi) अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) में थे. पाकिस्तान (Pakistan) दोनों देशों के बीच बिचौलिया यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था. लेकिन, ईरान का डेलिगेशन बिना अमेरिकी प्रतिनिधित्व के इस्लामाबाद में आए हुए ही पाकिस्तान से चले गए. अब अमेरिकी प्रतिनिधित्व ने भी पाकिस्तान का दौरा रद्द करने का ऐलान किया है। ईरान सीधे अमेरिका से बात करने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा. अमेरिका से भी स्पेशल दूत इस्लामाबाद आने वाले थे. लेकिन ईरानी प्रतिनिधित्व चले गए हैं तो उन्होंने भी अपने दौरे को रद्द कर दिया है. ये ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। अराघची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई. इस मीटिंग में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद थे. इस मुलाकात के बाद तेहरान के प्रतिनिधत्व पाकिस्तान से ओमान चले गए. अराघची इस्लामाबाद के बाद मस्कट यानी ओमान पहुंचे हैं. इसके बाद वह मॉस्को यानी रूस भी जाएंगे. यानी ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क करके रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने सीधी बात से किया इनकारईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी. ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताएं अमेरिका तक पहुंचाएगा. उन्होंने अमेरिका के इस पूरे कदम को ‘अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध’ बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश में जुटा है. ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान दौरे के बाद बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनका पाकिस्तान दौरा ‘काफी फलदायी’ रहा. यानी बातचीत अच्छी रही और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क पेश किया है. यानी ऐसा प्लान दिया गया है, जिससे स्थायी तौर पर संघर्ष खत्म किया जा सके. लेकिन साथ ही उन्होंने एक बड़ी बात भी कही. अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका सच में बातचीत को लेकर गंभीर है या नहीं. ईरान के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 18 घंटे की लंबी यात्रा करके बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. उनके मुताबिक, फोन पर भी बातचीत उतनी ही अच्छी तरह हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह खुद फोन कर सकता है. अमेरिका सिर्फ बैठकर बेकार की बातचीत के लिए यात्रा नहीं करेगा. जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करने जा रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है. उनके शब्दों में, ‘हमारे पास सारे पत्ते हैं’ यानी अमेरिका के पास बातचीत में बढ़त है. उन्होंने कहा कि वे बेकार की चर्चा में समय नहीं गंवाना चाहते. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात काफी अच्छी और पॉजिटिव रही. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा हुई. साथ ही, पाकिस्तान और ईरान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई. यानी सिर्फ मौजूदा तनाव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने यानी मई (May) के मध्य में यूरोप की एक सप्ताह की महत्वपूर्ण यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ (European Union-EU) के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देना है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ताबड़तोड़ विदेश दौरा करेंगे। वे नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली जाएंगे। नॉर्वे का दौरा: तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और EFTA पर जोरWION की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा, जहां वे तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हो चुका है। नॉर्वे ‘यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ’ (EFTA) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए ‘भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते’ के बाद इस दौरे की अहमियत काफी बढ़ गई है। भारत को क्या मिलेगा?इस समझौते के तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिससे देश में लगभग 10 लाख नए रोजगार पैदा होने का लक्ष्य है। साथ ही, इससे कपड़ा, चमड़ा और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलेंगे। ओस्लो में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), जलवायु परिवर्तन, ‘ब्लू इकॉनमी’, इनोवेशन, डिजिटलीकरण और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी। नीदरलैंड दौरा: कृषि और तकनीक पर फोकसओस्लो के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड जाएंगे। यहां उनकी पिछली यात्रा 2017 में हुई थी। द हेग (नीदरलैंड) जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है। पिछले साल कुछ कारणों से टल गए कार्यक्रमों और बैठकों की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके। इटली और वेटिकन सिटी: पहली द्विपक्षीय यात्राप्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इटली भी शामिल है। यह उनकी इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हालांकि वे 2021 में G20 शिखर सम्मेलन और 2024 में G7 आउटरीच के लिए रोम जा चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दे होंगे। पोप से मुलाकात संभवइस बात की भी प्रबल संभावना है कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी का दौरा करें और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात करें। ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलनमई का यह यूरोप दौरा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रहा है। उस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता पीएम मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की थी। उसमें ‘भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA)’ पर बातचीत पूरी होने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। साथ ही, एक नई ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ और ‘टुवर्ड्स 2030’ संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी तय किया गया था। मई यात्रा का लक्ष्यइस दौरे से FTA को तेजी से लागू करने, सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने और स्वच्छ तकनीक (क्लीन टेक) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। आगामी कार्यक्रम: फ्रांस में G7 सम्मेलनयूरोप के साथ इस सघन कूटनीति के क्रम में, प्रधानमंत्री मोदी जून के महीने में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस प्रभावशाली समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।

मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ के दौरे पर

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के प्रवास पर रहेंगे। वे यहां परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में अस्प प्रवास पर रीवा पहुंचेंगे और यहां से हेलीकाप्टर द्वारा अपरान्ह 1.40 बजे मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) जिले के परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 2:15 बजे शक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम हेलीपैड पर पहुंचेंगे। यहां वे स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री शाम 4:30 बजे शक्तेशगढ़ से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होंगे और 5:05 बजे रीवा एयरपोर्ट पहुंचेंगे और यहां से विमान द्वारा भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।