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दृष्टिबाधितों के लिए पहल: विजेंद्र गुप्ता का ‘ऑडिबल सिग्नल’ लगाने का आग्रह

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क सुरक्षा और समावेशी शहरी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष Vijender Gupta ने उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu को पत्र लिखकर ट्रैफिक सिग्नलों पर ‘ऑडिबल सिग्नल’ (ध्वनि आधारित संकेत) लगाने की मांग की है। यह पहल खासतौर पर दृष्टिबाधित, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य संवेदनशील पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है। गुप्ता ने अपने पत्र में बताया कि वर्तमान ट्रैफिक सिस्टम केवल दृश्य संकेतों पर आधारित है, जो बड़ी आबादी के लिए पर्याप्त नहीं है। 60 लाख लोगों को राहत देने की कोशिशVijender Gupta ने एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में करीब 60 लाख लोग किसी न किसी दृष्टि समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 12 से 18 लाख लोग गंभीर ‘लो विजन’ की स्थिति में हैं। ऐसे में सड़क पार करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने कहा कि सुलभ और सुरक्षित क्रॉसिंग सुविधाओं के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे उनकी स्वतंत्र आवाजाही भी सीमित हो जाती है। क्या हैं ‘ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल’ऑडिबल सिग्नल ऐसे ट्रैफिक लाइट सिस्टम होते हैं, जिनमें हरी बत्ती होने पर बीप या विशेष ध्वनि सुनाई देती है। यह ध्वनि पैदल यात्रियों को संकेत देती है कि सड़क पार करना सुरक्षित है। कुछ देशों में इसमें अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां या ‘मेलोडिक टोन’ भी होती हैं, जो दिशा और समय का संकेत देती हैं। यह तकनीक खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। दुनिया के कई देशों में सफल प्रयोगVijender Gupta ने अपने पत्र में अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि Japan, United Kingdom, United States, Singapore, France और Australia जैसे देशों में इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया गया है। खासतौर पर जापान में ‘पक्षियों की आवाज’ जैसी मधुर ध्वनियों का उपयोग किया जाता है, जिससे पैदल यात्रियों को सहज रूप से संकेत समझ में आता है। स्मार्ट सिटी की ओर बड़ा कदमविधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यह केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यदि दिल्ली के प्रमुख चौराहों पर ऑडिबल सिग्नल लगाए जाते हैं, तो इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है और शहर को एक सच्चे मायनों में ‘समावेशी स्मार्ट सिटी’ बनाया जा सकता है। उन्होंने उपराज्यपाल से इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का आग्रह किया है। क्यों जरूरी है यह पहलदिल्ली जैसे व्यस्त महानगर में हर दिन लाखों लोग सड़कों का उपयोग करते हैं। ऐसे में दृष्टिबाधित और बुजुर्ग नागरिकों के लिए सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऑडिबल सिग्नल न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनाएंगे।