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रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध  को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि तीन साल से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आने का रास्ता खुला है। मीडिया से बातचीत में पुतिन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेलेंस्की के साथ किसी औपचारिक बैठक का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वह ऐसी मुलाकात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं। उनके इस बयान को युद्ध खत्म करने की संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  और उनकी टीम की भी तारीफ की। पुतिन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन संकट को समाप्त कराने और शांति समझौते की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस ने युद्धविराम बढ़ाने और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे प्रस्तावों को तुरंत स्वीकार किया था। पुतिन ने यूक्रेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विक्ट्री डे से पहले कीव प्रशासन कैदियों की अदला-बदली के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस किसी देश के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उकसावे वाली घटनाओं के कारण हालात और तनावपूर्ण हो सकते थे। युद्ध की शुरुआत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के यूरोपीय संघ की ओर बढ़ते कदम, राजनीतिक उथल-पुथल और क्रीमिया विवाद के बाद हालात बिगड़ते गए, जिसके बाद रूस ने सैन्य अभियान शुरू किया। गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

Russia-Ukraine War: रेड स्क्वायर से पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, NATO को ललकारा; यूक्रेन युद्ध पर बोले- यह रूस की न्याय की लड़ाई

 Russia-Ukraine War: नई दिल्ली। मॉस्को के ऐतिहासिक रेड स्क्वायर पर शनिवार को रूस ने पूरे सैन्य शक्ति प्रदर्शन के साथ विक्ट्री डे मनाया। इस मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और NATO पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को रूस की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी बताते हुए इसे “न्यायसंगत लड़ाई” करार दिया। दरअसल, रूस हर साल 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में विक्ट्री डे परेड आयोजित करता है। इस बार भी रेड स्क्वायर पर हजारों सैनिकों ने मार्च किया, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में परेड में भारी हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों की मौजूदगी काफी कम रही। कई वर्षों में पहली बार परेड में बड़े पैमाने पर टैंक और मिसाइल सिस्टम नजर नहीं आए। अपने भाषण में पुतिन ने कहा कि रूस आज ऐसे आक्रामक गठबंधन का सामना कर रहा है, जिसे NATO का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता देकर संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सैनिकों और नागरिकों की ताकत के दम पर हर चुनौती का सामना करेगा। अमेरिका की नीति पर विवाद गहराया, लकी बिष्ट के दावों से फिर गर्माई वैश्विक राजनीति… रूसी राष्ट्रपति ने दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वही जज्बा आज यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए रूस हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा रहेगा। इस बार की परेड इसलिए भी खास रही क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के अस्थायी सीजफायर की घोषणा की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 9 से 11 मई तक दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम रहेगा और इस दौरान कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। हालांकि युद्ध को लेकर तनाव अब भी बरकरार है। विक्ट्री डे समारोह में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे। सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और सैनिकों की परेड के जरिए रूस ने दुनिया को साफ संदेश देने की कोशिश की कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी दबाव के बावजूद उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक आक्रामकता कमजोर नहीं हुई है

पुतिन ईरान वार्ता: ताकत के इस्तेमाल को नकारा, कूटनीतिक समाधान पर जोर

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस वार्ता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस इस मुश्किल वक्त में ईरान का समर्थन कर सकता है लेकिन पुतिन ने स्पष्ट किया कि तनाव कम करना और मुद्दों का कूटनीतिक हल निकालना ही प्राथमिकता है। रूसी विदेश मंत्रालय ने टेलीग्राम पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। मंत्रालय ने बताया कि पुतिन ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई उनके परिवार और देश की सेना और नेताओं की मौत पर संवेदना जताई। साथ ही अमेरिका और इजरायल के हमलों में आम नागरिकों की मौत पर भी दुख व्यक्त किया। पुतिन ने इस वार्ता में जोर दिया कि किसी भी तरह के संघर्ष या ताकत के इस्तेमाल से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि रूस की नीतियों के अनुसार सभी विवादों का हल डिप्लोमैटिक प्रक्रिया से ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा पुतिन ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जीसीसी के देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की बात भी कही। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने रूस की एकजुटता और सहयोग के लिए पुतिन का धन्यवाद किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा कर रहा है और दोनों नेताओं ने यह तय किया कि आने वाले समय में अलग-अलग माध्यमों से संपर्क जारी रहेगा। तेल की आपूर्ति इस वार्ता में एक अहम मुद्दा बनकर उभरी है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल न खरीदने के लिए दबाव डाल रहा है लेकिन हालात ने अमेरिकी चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों के बीच आपूर्ति और स्रोत तय करना भारत का अधिकार है। अलीपोव ने कहा “समाधान हमेशा बातचीत से होता है। संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए। आपूर्ति के लिए रूस हमेशा तैयार है। इससे पहले 28 फरवरी को रूस ने बिना कारण ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की थी। रूस ने तत्काल राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अतिरिक्त रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच भी शनिवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई। इसमें ईरानी पक्ष ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को रोकने के अपने कदमों की जानकारी दी साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना भी साझा की।